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जाने-अनजाने में सुअर का मांस खा रहे हैं भारतीय मुसलमान

ज्यादातर भारतीय मुसलमान ये जानते ही नहीं हैं कि कुरान में उन्हें क्या खाने के लिए कहा गया है किस बात की मनाही है. आम धारणा में वो सिर्फ हलाल और हराम का ध्यान रखते हैं

Updated On: Feb 14, 2018 10:23 PM IST

Maneka Gandhi Maneka Gandhi

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जाने-अनजाने में सुअर का मांस खा रहे हैं भारतीय मुसलमान
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हाल ही में हैदराबाद के मुस्लिम विश्‍वविद्यालय जामिया निज़ामिया (1876) ने, मुसलमानों पर प्रॉन, श्रिम्‍प, और क्रेब्‍स खाने की रोक लगा दी है. सी फूड की इन किस्‍मों को मकरूह तहरीम (घृणित) बताया गया है.

इस्लाम के अनुसार, फूड की तीन केटेगरी हैं: हलाल (अनुमत), हराम (निषिद्ध) और मकरूह तहरीम (घृणित होने के चलते उससे कड़ाई से बचा जाए.) अधिकांश मुसलमान हर तरह का मीट खाते हैं. वास्तव में ये धर्म मीट खाने को लेकर खुल कर बात करता है-बावजूद इसके कि पैगंबर साहब खुद शाकाहारी थे. हालांकि, ज्यादातर मुसलमानों को यह पता नहीं है कि उन्हें क्‍या खाने को कहा गया है.

वे बस इतना ही जानते हैं, मीट दो तरह से काटा जाता है. पहला हलाल जिसे मुसलमान खाते हैं और दूसरा है झटका, जिसे गैर-मुसलमान खाते हैं. (यह एक और मामला है कि भारत में जिन जानवरों को काटा जाता है वे न तो झटका और न ही हलाल की केटेगरी में आते हैं और दोनों धर्मों का मजाक ही उड़ाते हैं). विस्‍तृत रूप में इस्‍लाम में भोजन की चार श्रेणियां हैं -

1. हलाल - वैध

हलाल में जानवर काटने के लिए तेज चाकू इस्‍तेमाल होता है और जानवर को इसे काटने से पहले नहीं देखना चाहिए. जानवर अच्छी तरह से आराम में हो और उसे काटने से पहले खिलाया जाना जाए, और दूसरे जानवरों के सामने चाकू नहीं चलाना चाहिए. गर्दन की नस को इस तरह से काटना चाहिये कि जिंदा जानवर का सारा खून निचुड़ जाए और कसाई को 'बिस्मिल्लाह' कहते हुए अल्लाह के नाम का आह्वान करना चाहिए ताकि खाने की जरूरत विधिवत ढंग से पूरी हो सके.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

केवल शाकाहारी जानवर का गोश्‍त खाने की अनुमति है. ऐसी चिड़िया जो बीज और सब्‍जियां खाती हैं केवल उन्‍हीं का गोश्‍त खाया जा सकता है. ऐसी चिडि़या जो मनाही वाली चीजें जैसे कीड़े वगैरह खाती हैं, उन्हें खाया जा सकता है बशर्ते वो कीड़े खाना चिड़िया के अपने आहार का एक अहम हिस्सा नहीं हो. टिड्डियों जैसी कीटों की अनुमति है, पर अन्य सभी निषिद्ध हैं. खाने से पहले फलों और सब्जियों को देखना चाहिए कि कहीं उनमें कीड़े तो नहीं हैं. पानी से हटाई गई मछलियों की अनुमति है. घोंघे को मना किया गया है. एसिड मिला चीज या वेजेटेबिल एंजाइमों की अनुमति है. अनाज की अनुमति है, बशर्ते वे जानवरों की चर्बी या अन्य निषिद्ध सामग्री का उपयोग करके तैयार नहीं हों. ऐसा सिरका खाया जा सकता है जिसमें अल्कोहल का इस्तेमाल न किया गया हो.

2. हराम - प्रतिबंधित, गैरकानूनी

हराम एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है 'मना किया'. कुरान के धार्मिक ग्रंथों और सुन्नत में हराम चीजों को निषिद्ध माना गया है. यदि किसी चीज को हराम माना जाता है, तो वो निषिद्ध है चाहे फिर उसका कितना ही अच्छा इरादा, या कितना ही सम्मानजनक उद्देश्य हो इस्लामी कानून में, आहार निषेध को दैवीय इच्छा से जोड़कर देखने की बात कही जाती है.

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मुसलमानों को बहने वाले खून को खाने से मना किया जाता है. सुअर, कुत्ता, बिल्ली, बंदर, या किसी भी दूसरे हराम जानवरों का गोश्‍त हराम माना जाता है. इन्‍हें केवल एक आपात स्थिति में वैध माना जा सकता है जब कोई व्यक्ति भुखमरी का शिकार हो और उसके मीट को खाने से जान बच सकती है. हालांकि, इनका गोश्‍त तब एक आवश्यक या अनुमत नहीं है यदि समाज में कोई दूसरा भोजन मौजूद हो.

सभी नुकीले दांतों वाले मांसाहारी जैसे शेर, बाघ, भेड़िये, कुत्ते, बिल्लियां हराम के दायरे में आते हैं. बाज़, गिद्ध, चील जैसे मांसाहारी पक्षी हराम हैं. घरेलू गधे हराम हैं. ऐसे जानवर जिन्हें मार दिया जाता है जैसे चूहे, बिच्छू, सांप हराम हैं. वास्तव में सभी रेंगने वाले, उभयचर (मेंढक) और कुतरने वाले जानवर हराम हैं. कोई जानवर जो इस्लामिक तरीके से मारे जाने से पहले ही मर गया हो, या ठीक से काटा नहीं गया है, हराम है. ऐसे जानवर जो अल्‍लाह के अलावा किसी और के नाम पर काटे जाते हैं, हराम हैं.

नशीली चीजें खाने की इस्लाम में मनाही है. पैगंबर साहब ने नशीली चीजों के व्यापार को मना किया है. मुस्लिमों को इस बात की इजाजत नहीं है कि ऐसी जगह में काम करें जहां नशीली चीजों का कारोबार होता हो. यह मनाही सिर्फ शराब पर ही नहीं बल्कि मादक पदार्थों जैसे तम्बाकू, पान जैसी चीजों पर भी लागू होती है. एक मुस्लिम को उस मेज पर बैठने की भी इजाजत नहीं है, जहां शराब परोसी जा रही हो. हेरोइन, कोकीन, मारिजुआना, और नशा की वजह बनने वाली अन्य चीजों को भी मना कर दिया गया है.

Meat Shop slaughter house beef

प्रतीकात्मक तस्वीर

जायफल, हींग, वनीला एसेंस और जिलेटिन की मनाही है. जिसकी वजह या तो ये है कि वनीला में शराब हो सकती है और जिलेटिन सुअर के अंगों से बना हो सकता है. हकीकत में अधिकांश कन्फेक्शनरी की मनाही है, क्योंकि उनमें जायफल, वनीला एसेंस और जिलेटिन शामिल होता है.

इंसानी जिस्‍म से बनाया गया कुछ भी हराम है (लेकिन सभी कमर्शियल बिस्कुटों में एल सिस्टीन नाम का केमिकल का इस्‍तेमाल करते हैं जो इंसानी बालों से बनता है और दुनिया में इसकी अधिकांश आपूर्ति तिरुपति के उस हिंदू मंदिर से होती है जहां लोग श्रद्धापूर्वक मुंडन कराते हैं.)

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मांसाहारी जानवर, शिकारी चिड़िया और जमीन पर रहने वाले ऐसे जानवर जिनके बाहरी कान (जैसे सांप, सरिसृप, कीड़े, आदि) न हों. चूंकि सभी पक्षी अपने आहार के बड़े हिस्से के रूप में कीड़े खाते हैं, इसलिए मुर्गियों सहित उनकी तकनीकी रूप से मनाही होनी चाहिए लेकिन केवल मुसलमान ही सड़क के किनारे चल रहे चिकन की दुकानों को चला रहे हैं. खाने की ऐसी चीजें या बाई प्रोडक्‍टस जिनमें खून मिला हुआ हो या उपरोक्त उत्पादों में से कोई भी, अवैध ही है.

3. मशबूह, मुश्तबाह – सवालिया या संदिग्ध

मशबूह ऐसे ग्रे एरिया हैं, जब किसी व्यक्ति को किसी खास भोजन या पीने को लेकर हलाल या हराम का दर्जा साफ नहीं है, तो इसका इस्‍तेमाल नहीं किया जाना चाहिए.

4. मकरूह - अनुचित, अरुचिकर या आक्रामक

हालांकि मकरूह की गतिविधियां हराम से कम गंभीर हैं. उनसे बचे जाने की बात कही जाती है. इससे अल्‍लाह का आशीर्वाद पाने का मौका मुसलमान को मिलता है. कुरान द्वारा निर्धारित मकरूह भोजन के लिए कहा गया है कि इंसान को शुद्ध भोजन ही खाना चाहिए और जो कुछ भी अशुद्ध है वह मकरूह है. इसमें खराब या सड़ा हुआ भोजन शामिल है. अब इसमें प्रॉन, श्रिम्‍प और क्रैब्‍स भी आ गए हैं - ये सब सड़े हुए खाने में शामिल हो गया है. इसलिए, एक मुसलमान को यह देखना चाहिए:

सूप स्‍टॉक हड्डियों से बना होता है और इनमें सुअर की होने की संभावना है, जबतक कि विशेष रूप से कहा नहीं जाता. किसी कॉस्मेटिक (लिपस्टिक आदि), या खाने वाला गुलाबी/लाल रंग को आमतौर पर कोचिनियल बीटल्‍स नामक कुचले और सूखे मादा कीड़े से बनाया जाता है. लार्ड, जो आमतौर पर सुअर की चर्बी होती उसका पेस्ट्री में उपयोग किया जाता है. जिलेटिन, जो हड्डियों को उबालकर और जानवरों के अन्य भागों से हासिल किया जाता है, वह अधिकांश मीठी चीजों और जेली में होता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

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मैं डायग्लिसरायड और दूसरे (E470 से E483) इम्‍लसीफायर के बारे में नहीं बताने नहीं जा रही जो सुअर, या दूसरे गैर हलाल स्रोतों से मिलते हैं या मैग्नीशियम स्टीयरेट जो दवा में उपयोग किया जाता है. यहां तक कि डाईजेस्टिव में पेप्सीन होता है जो सुअर के पेट से बने डाइजेस्टिव एंजाइम से बनता है.

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