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बाल ठाकरेः तमिलों से सचिन तेंदुलकर तक सब पर गरजे

बाल ठाकरे की छवि को हिंदी सिनेमा ने खूब भुनाया. सरकार के बाद उनपर फिल्म भी बन रही है

Ravi kant Singh Updated On: Jan 23, 2018 08:51 AM IST

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बाल ठाकरेः तमिलों से सचिन तेंदुलकर तक सब पर गरजे

बाल ठाकरे किसी परिचय के मोहताज नहीं. 26 जनवरी 1926 को पुणे में जन्मे बाल ठाकरे को उनके पिता ने प्यार से विलियम मेकपिस ठाकरे बुलाया. अंग्रेजी लेखक वैनिटी फेयर को बाल ठाकरे के पिता इतना चाहते थे कि उन्होंने अपनी इस चाहत को बेटे से जोड़ लिया. लेकिन ठाकरे के पिता शायद यह नहीं जानते थे कि उनका बेटा आगे चलकर इतना प्रभावी नेता बनेगा.

बाल ठाकरे ने अपने राजनीतिक एजेंडे के तहत राष्ट्रवाद को हथियार के रूप में धार दिया. तब से उन्हें टाइगर पुकारा जाने लगा. लेकिन उनके टाइगर नाम पर कुछ लोगों ने मज़े ले लिए. लेखक सुकेतु मेहता किसी मौके पर बाल ठाकरे के घर गए और लिखा-टाइगर अपने लोगों की रक्षा के लिए सिर्फ पीछे से दहाड़ता है. मेहता ने लिखा कि ठाकरे का घर किसी किले से कम नहीं जिसकी रक्षा में 179 गार्ड लगे रहते हैं.

इन सबके बाद भी ठाकरे की ठसक का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने बूते अंग्रेजी नाम बॉम्बे को मराठी में मुंबई कराया. नाम तो बदलवाया लेकिन इसी के साथ वे कई राजनीतिक विवादों में फंसते चले गए. आइए जानते हैं उन विवादों के बारे में.

फोटो सोर्स- फ्री प्रेस

फोटो सोर्स- फ्री प्रेस

बजाओ पुंगी भगाओ लुंगी

पुराने बॉम्बे में साउथ इंडियन मजदूरों के खिलाफ एक नारा दिया गया. "बजाओ पुंगी, भगाओ लुंगी" उसके बाद तमिल मजदूरों पर हमले होने लगे और उन्हें बॉम्बे छोड़कर भागना पड़ा. इस अपमान के बाद उन्होंने बॉम्बे जाना छोड़ दिया और तमिलनाडु को इंडस्ट्रियल हब बना दिया विशेषकर मद्रास को.

सचिन पर तीखा बयान

फोटो सोर्स- फ्री प्रेस

फोटो सोर्स- फ्री प्रेस

बात 2009 की है जब तेंदुलकर ने कहा था कि मुंबई सभी भारतीयों के लिए है, न कि किसी एक के लिए. तब तेंदुलकर को घेरते हुए बाल ठाकरे ने कहा था, जब आप चौका या छक्का मारते हैं तो लोग आपकी सराहना करते हैं. लेकिन कोई मराठी मानुष यह स्वीकार नहीं करेगा कि उनके खिलाफ कुछ बोला जाए. ठाकरे ने तेंदुलकर को सलाह दी कि जो क्रिकेट मैदान पर कमाया, राजनीति में आकर उसे गंवाने की कोशिश न करें.

सानिया मिर्जा से भी खफा

सानिया मिर्जा की शादी शोएब मलिक से होने पर सबसे ज्यादा किसी को नाराजगी हुई तो वे बाल ठाकरे थे. तब ठाकरे ने कहा था कि सानिया मिर्जा अपने खेल के कारण मशहूर नहीं हैं बल्कि अपने चुस्त कपड़े, फैशन और लव अफेयर की वजह से हैं. ठाकरे के इस बयान की काफी आलोचना हुई थी.

मुंबई बन गई धर्मशाला

मुंबई पूरी तरह से धर्मशाला बन गई है. मुंबई में अगर बाहरी लोगों का आना रोकना है तो जरूरी है कि एक परमिट सिस्टम लागू की जाए. ठाकरे का यह बयान 2010 का है जब तत्कालीन गवर्नर के शंकरनारायण ने कहा था कि ‘मुंबई में कोई रह सकता है’. ठाकरे ने गवर्नर के खिलाफ शिवसेना के मुखपत्र में काफी कुछ लिखा. विरोध में ठाकरे ने कहा, बाहरी लोगों का मुंबई आना महाराष्ट्र के साथ धोखा है.

शाहरुख खान पर निशाना

शाहरुख खान ने अपनी आईपीएल टीम में एक पाकिस्तानी खिलाड़ी को लेने का मन बनाया था. इस पर बाल ठाकरे ने कहा, शाहरुख खान को निशान-ए-पाकिस्तान दिया जाना चाहिए. यह सम्मान पाकिस्तान का सबसे खास माना जाता है, इसीलिए बाल ठाकरे ने शाहरुक पर यह विवादित बयान चस्पा किया.

मुस्लिमों का विरोध

बाल ठाकरे वैसे मुस्लिमों के बारे में अक्सर बोलते रहते थे, लेकिन उनका 26/11 वाला बयान काफी चर्चा में आया था. उन्होंने कहा था, 26/11 का हमला अचानक हुआ था, लेकिन शनिवार (11 अगस्त 2012) की हिंसा सिटी पुलिस की नाक के ठीक नीचे हई है. जिन्होंने भी साउथ मुंबई में तबाही मचाई है, वे राष्ट्र विरोधी मुस्लिम हैं. यह दुर्भाग्य की बात है जो पुलिस इन्हें कंट्रोल नहीं कर सकी.

ठाकरे ने कहा, घटनास्थल से महज 100 कदम की दूरी पर पुलिस आयुक्त का दफ्तर है जहां मुस्लिम युवाओं ने हंगामा मचाया. मुस्लिमों ने पुलिस से हथियार छीन लिए, महिलाओं को छेड़ा, निर्दोष लोगों को परेशान किया और सरकारी गाड़ियों को आग लगा दी.

इसके अलावा समय समय पर ठाकरे बॉलीवुड को निशाने पर लेने के लिए जाने जाते रहे. अदम गोंडवी कह गए हैं, ठाकरे जो भी कहे वो बॉलीवुड दोहराएगा, देखिए पंडाल में फिल्मी सितारे आ गए.

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