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मोनू की सीक्रेट डायरी: भगवान आप लड़का हो या लड़की?

तुम मेरी अच्छी दोस्त बनना, अच्छे दोस्त एक-दूसरे के सारे सीक्रेट जानते हैं

Updated On: Apr 23, 2017 07:49 AM IST

Nikhil Sachan

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मोनू की सीक्रेट डायरी: भगवान आप लड़का हो या लड़की?

प्यारी डायरी,

मेरा नाम मोनू है. मां कहती है कि मोनू मेरा प्यार का नाम है. वैसे स्कूल का नाम मानवेंद्र है. पर मुझे अपना स्कूल का नाम अच्छा नहीं लगता. स्कूल का नाम बड़ा कठिन है. जब मैं छोटा था तो मानवेंद्र लिखने में अक्सर गलती हो जाती थी और हिंदी के टीचर से मार पड़ती थी.

तुम मुझे मोनू ही कहना. मैं 12 साल का हूं और 6th क्लास में पढ़ता हूं. मैं पढ़ने के लिए विद्या निकेतन जाता हूं.

आज पापा ने मुझे जन्मदिन पर डायरी दी है. मैं रोज डायरी लिखा करूंगा. पापा कहते हैं कि नेहरू जी और गांधी जी रोज डायरी लिखते थे. मैं भी रोज तुम्हें अपने बारे में बताऊंगा और महान आदमी बनूंगा.

तुम मेरी अच्छी दोस्त बनना. अच्छे दोस्त एक-दूसरे के सारे सीक्रेट जानते हैं. इसलिए मैं भी तुम्हें अपना सीक्रेट बताता हूं - मैंने आंगन में पांच का सिक्का क्यारी में दबा दिया है. थोड़े दिनों में वो पौधा बनकर बड़ा हो जाएगा और उसमें सिक्के निकलने लगेंगे.

मेरा एक और सीक्रेट भी है - मैंने हरिया जमादार को छू लिया था और छूने के बाद नहाया नहीं था. मां कहती है कि जमादार को गलती से छू लेने के बाद तुरंत नहा लेना चाहिए नहीं तो हाथ में कीड़े लग जाते हैं. मैं रोज उसे छू लेता हूं और हाथ पर नमक डाल लेता हूं. इससे कीड़े लगने से पहले ही मर जाते हैं.

आज मैंने स्कूल में पढ़ा कि डायनासोर कई साल पहले गायब हो गए. कितना अच्छा हुआ न? अगर डायनासोर गायब नहीं हुए होते तो वो हम लोग को खा जाते.

हमने स्कूल में ये भी पढ़ा कि आदमी मरने के बाद फिर जन्म लेता है. जरूरी नहीं है कि वो आदमी बन कर पैदा हो. बल्कि कोई और जानवर बन कर भी पैदा हो सकता है. अगर मैं डायनासोर बन कर पैदा हुआ तो कितना मजा आएगा.

मैं भगवान को इस बारे में चिट्ठी लिखूंगा. तुम्हें पता है ? मैं भगवान को कई बार चिट्ठी लिखता हूं. मैंने एक बार उनसे चिट्ठी लिख कर पूछा था कि मैं ‘इंडियन’ हूं, आप किस देश से हैं? और आप लड़की हैं या लड़का? मुझे लड़कियां एकदम नहीं पसंद.

एक बार मैंने उनसे चिट्ठी में लिखा था कि स्कूल में बताया गया है कि आप मुझे हर समय देख रहे होते हैं. मैं जो भी करता हूं. सब. हमेशा. लेकिन आप ऐसा क्यों करते हैं? मुझे कपड़े बदलने में कितनी शर्म आती है. मुझे हमेशा बिस्तर के नीचे घुस कर कपड़े बदलना पड़ता है. बेड से सिर भिड़ जाता है और गुम्मड़ निकल आता है. हो सके तो कपड़े बदलते समय आंख बंद कर लिया करिए.

मैं उनकी चिट्ठी का इंतजार कर रहा हूं. चिट्ठी पहुंचने में टाइम लगता है. कानपुर से दिल्ली चिट्ठी पहुंचने में ही सात दिन लग जाते हैं. फिर आसमान तो यहां से बहुत दूर है. जब चिट्ठी का जवाब आएगा तो मैं तुम्हें जरूर बताऊंगा.

चलो अब मैं सोने जाता हूं. जो बच्चे सुबह जल्दी उठते हैं वो बड़े होकर महान बनते हैं.

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