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पड़ताल: सीने के एक 'मस्से' से सुलझा मर्डर केस, सगे भाइयों को सुनाई गई फांसी की सजा

ट्रेन के डिब्बे से तीन बोरों में बंद 7 टुकड़ों में बरामद हुई उस एक अदद लावारिस लाश की तह-तक हुई ‘पड़ताल’ कई दिनों तक दिल्ली-उत्तर प्रदेश पुलिस और फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट्स के बीच फाइलों में बंद इधर से उधर घूमती रही

Sanjeev Kumar Singh Chauhan Sanjeev Kumar Singh Chauhan Updated On: Mar 17, 2018 02:21 PM IST

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पड़ताल: सीने के एक 'मस्से' से सुलझा मर्डर केस, सगे भाइयों को सुनाई गई फांसी की सजा

ट्रेन के डिब्बे से तीन बोरों में बंद 7 टुकड़ों में बरामद हुई उस एक अदद लावारिस लाश की तह-तक हुई ‘पड़ताल’ कई दिनों तक दिल्ली-उत्तर प्रदेश पुलिस और फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट्स के बीच फाइलों में बंद इधर से उधर घूमती रही. अंतत: शातिर दिमाग 'मुलजिमों' को तह-तक हुई 'पड़ताल' ने 'मुजरिम' साबित करवा दिया. इतना ही नहीं, आरोपियों को अदालत ने फांसी की सजा भी सुनाई. इस पूरे मामले को सुलझाने में कैसे महत्वपूर्ण भूमिका अदा की लाश के सीने पर मौजूद एक अदद अदने से 'मस्से' ने. जानने के लिए पढ़िए देश की राजधानी दिल्ली और उत्तर-प्रदेश के कस्बा कांधला से जुड़ी इस सच्ची घटना को 'पड़ताल' की पहली कड़ी में...

एक इंसान की लाश के सात टुकड़े और तीन बोरे

2 और 3 मार्च, 2001 को आधी रात के बाद करीब एक बजे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (दिल्ली पुलिस थाना) के ड्यूटी अफसर हवलदार जोगेंद्र सिंह के पास ब-जरिए रेलवे कर्मचारी राम आसरे खबर आई कि पुरानी दिल्ली वाशिंग शेड में धुलाई-सफाई को खड़ी ट्रेन दिल्ली-देहरादून-शामली-सहारनपुर कोच नंबर 11278A में तीन बोरे रखे हैं.

बोरों में से असहनीय बदबू आ रही है. सूचना मिलते ही थाने में मौजूद सब-इंस्पेक्टर सतेंद्र सिंह तोमर, सिपाही उद्धव काम्बले को लेकर मौके पर पहुंच गए. मालूम हुआ कि, तीनों बोरे दो-दो और कट्टों (प्लास्टिक बैग्स) में बंद थे. बोरों में 35-40 साल के आदमी की लाश 7 टुकड़ों में बरामद हुई. अगले दिन थाना पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (दिल्ली मेन) में एफआईआर नंबर 79/ 2001 दर्ज करके मामले की जांच थाना प्रभारी एसएचओ इंस्पेक्टर बनी सिंह अहलावत (अब दिल्ली पुलिस के रिटायर्ड एसीपी) ने शुरू कर दी.

सबूत जिसने मामले में अवैध संबंधों का इशारा किया

बकौल जांच अधिकारी इंस्पेक्टर अहलावत, थाने लाकर लाश के टुकड़ों को मिलाकर देखने से पता चला कि हत्यारों ने वारदात के वक्त लिंग और नाक को भी काटा था. बदन के टुकड़े आरी से किए गए. सिर्फ उन जगहों पर से युवक के बदन को काटा गया है, जिन जगहों से इंसान के शरीर को काटने में मेहनत नहीं करनी पड़ती है.

ब्लाइंड मर्डर खुलवाने में फॉरेंसिक साइंस का कमाल

bani singh

बनी सिंह अहलावत रिटायर्ड एसीपी दिल्ली पुलिस

लाश को उत्तरी दिल्ली के सिविल हॉस्पिटल के मुर्दाघर (सब्जी मंडी पोस्टमार्टम हाउस) में 72 घंटे के लिए सुरक्षित रख दिया गया. पहचान के लिए लाश के पोस्टर उन रास्तों (पुरानी दिल्ली, सहारनपुर, मथुरा, शामली, कांधला और रोहतक ) के थानों, पुलिस चौकियों, अदालतों, स्टेशनों और बस-ट्रेनों सहित तमाम सार्वजनिक स्थानों पर चिपकवाए गए, जिन रास्तों से होकर ट्रेन गुजरती थी. कोई सुराग हाथ न लगता देख टीम में एडिश्नल एसएचओ राजवीर शर्मा को भी शामिल कर दिया गया. लाश की पहचान करने की हर कोशिश नाकाम रही. सात दिन बाद देश के वरिष्ठ फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट दिल्ली की सब्जी मंडी मोर्च्यूरी प्रभारी डॉक्टर के.एल. शर्मा (अब रिटायर्ड) ने एसएचओ इंस्पेक्टर बनी सिंह अहलावत की मौजूदगी में लाश का पोस्टमॉर्टम कर दिया.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट मील का पत्थर साबित हुई. पोस्टमार्टम एक्सपर्ट डॉ. के.एल. शर्मा के मुताबिक, लाश को जिस तरीके से काटा गया था और जहां-जहां से काटा गया था, इंसानी बदन काटने का कोई एक्सपर्ट ही उस तरह से ह्यूमन बॉडी-पार्ट्स काट सकता है. बदन पर जिस तरीके से आरी चलाई गई थी, वो आर्ट भी किसी एक्सपर्ट (कसाई या डॉक्टर) को ही पता होती है.

उनके मुताबिक, हत्यारों को पता था कि, इंसान में कहां-कहां बिना हड्डी का स्थान है, उसी जगह से टुकड़े किए गए थे. लाश के टुकड़ों पर ईंट का बुरादा, सीमेंट, बदरपुर (बिल्डिंग मटीरियल) चिपका मिला. इससे साबित हो रहा था कि हत्या या तो किसी कंस्ट्रक्शन साइट पर की गई है. या फिर मृतक और हत्यारों का कोई न कोई संबंध बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन साइट से जरूर है.

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बदन सड़ने के बाद भी लाश के सीने पर मौजदू एक अदद ‘मस्सा’ जैसे का तैसा था, जो कि मृतक की पहचान में बहुत काम का साबित हो सकता था. साथ ही मरने वाले के पांव की अंतिम (आखिरी) अंगुली आम इंसान की उंगलियों से बहुत ज्यादा लंबी थी.

जब मामला ज्वाइंट कमिश्नर के.के. पॉल तक पहुंचा

उत्तर प्रदेश पुलिस ने पोस्टरों के आधार पर ऐसे किसी इंसान की कोई सूचना अपने यहां होने से इंकार कर दिया. लिहाजा जांच अधिकारी इंस्पेक्टर बनी सिंह अहलावत उस समय मामले की फाइल मशविरे के लिए दिल्ली पुलिस के संयुक्त आयुक्त डॉ. कृष्ण कांत पॉल (क्राइम) के पास लेकर पहुंचे. बाद में डॉ. केके पॉल दिल्ली पुलिस कमिश्नर बने और आजकल उत्तराखंड के उप-राज्यपाल हैं.

यूपी पुलिस दबाए बैठी थी मृतक की गुमशुदगी शिकायत

डॉ. पॉल के दिशानिर्देशों पर जांच दोबारा शुरू की गई. तब पता चला कि जिस इंसान की लावारिश लाश की पहचान की नाकाम कोशिशों ने दिल्ली पुलिस को पसीना ला दिया है, उसी इंसान की गुमशुदगी की रिपोर्ट कांधला थाने (उस वक्त जिला मुजफ्फरनगर अब जिला शामली) का हेड मोहर्रिर अपनी मेज पर कागजों की टोकरी में दबाए बैठा था. हालांकि बाद में इस मामले को दिल्ली पुलिस ने तूल नहीं दिया था.

हत्यारों ने ही मृतक के बेटे से थाने में दिलाई गुमशुदगी

पड़ताल करते हुए जब जांच टीमें तह-तक पहुंचने में जुटीं तो, एक के बाद एक सनसनीखेज खुलासे होते गए. कड़ी से कड़ी जुड़ती गईं. ज्यों-ज्यों दिल्ली पुलिस की कामयाबियां बढ़ीं, त्यों-त्यों कांधला थाने की पुलिस (तब मुजफ्फरनगर अब जिला शामली) की नाकामी और कारगुजारियां शीशे में उतरती गईं. पता चला कि जिस कांधला थाना इलाके में सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम दिया गया, वहीं पर हत्यारोपी झोला छाप डॉक्टर (बाद में उसे अदालत ने इसी मामले में फांसी की सजा सुनाई), मरने वाले के लड़के को लेकर मृतक की गुमशुदगी की लिखित रिपोर्ट दिलाकर खुद ही आया था. ताकि मृतक के परिजनों को उन पर शक न हो. कांधला थाना पुलिस ने गुमशुदगी रिपोर्ट तक दर्ज करना मुनासिब नहीं समझा.

पत्नी बेटे ने ही जब दिल्ली पुलिस की नींद उड़ा दी

दिल्ली पुलिस के उस वक्त होश फाख्ता हो गए जब, दिल्ली की सब्जी मंडी मोर्च्यूरी में मौजूद लाश को मरने वाले की पत्नी, बेटे और भाई ने ही नहीं पहचाना. दिल्ली पुलिस जांच टीमों को मां-बेटे द्वारा लाश न पहचान पाने के पीछे प्रमुख वजह लाश का बुरी तरह सड़ जाना और टुकड़ों में होना लगी.

इसके बाद एसएचओ और मामले के जांच अधिकारी इंस्पेक्टर बी.एस. अहलावत ने घनीराम (मृतक) की पत्नी, बेटे, भाई को दोबारा पोस्टमॉर्टम हाउस में बुलाकर लाश दिखाई. साथ ही सीने पर मौजूद ‘मस्सा’ और मृतक के दोनो पांवों की अंतिम मगर बाकी अंगुलियों की तुलना में कहीं ज्यादा लंबी अंगुलियां दिखाईं गईं, तो उन्होंने लाश की पहचान कर दी.

ऐसे कानून के शिकंजे में फंसते चले गए हत्यारोपी

दिल्ली के रिठाला गांव (रोहिणी) निवासी घनी राम हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ सबूत तो दिल्ली पुलिस को पहले ही हाथ लग चुके थे. मुलजिमों तक दिल्ली पुलिस को पहुंचाने में घनीराम की पत्नी और बेटे दिनेश ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. मां-बेटे से मिली जानकारी पर ही दिल्ली पुलिस ने कांधला यूपी में घटनास्थल (मोहल्ला खार, खालापार) पर छापा मारा. पुलिस ने इस मामले में तीन सगे भाइयों और उनके पिता को गिरफ्तार किया. जिस मकान में घनी राम की आरी से काटकर हत्या की गई, पुलिस ने उस मकान के बाथरूम से खून के निशान, आरोपियों के बताए स्थान से हत्या में इस्तेमाल एक आरी, 8 आरी ब्लेड जब्त किए. कांधला बाजार से, जिन लोगों से लाश को पैक करके ट्रेन में रखने के लिए प्लास्टिक के बैग (थैले-बोरे-पॉलिथिन) खरीदे उनको भी पुलिस ने गवाह बनाया. केस में पुलिस ने कांधला रेलवे स्टेशन के स्टेशन मास्टर को भी गवाह बनाया, जिसने आरोपियों को ट्रेन में सफेद प्लास्टिक के तीन बैग चढ़ाते हुए देखा.

एक ही मामले में पुलिस की कामयाबी-नाकामयाबी

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पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन थाने का लॉकअप जिसमें आरोपी बंद करके रखे गए

दिल्ली पुलिस ने इस सनसनीखेज हत्याकांड की पड़ताल की तह तक पहुंचने के लिए रेलवे, दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस के कर्मचारियों, फॉरेंसिक साइंस एक्सपर्ट (पोस्टमॉर्टम करने वाले विशेषज्ञ) और पीड़ित परिवार के सदस्यों को मिलाकर कुल 27 गवाह और तीन सगे भाइयों और उनके पिता सहित चार मुलजिम अदालत में पेश किए. ट्रायल के दौरान गवाहों में से अधिकांश अदालत में बयान से मुकर गए. इसके बाद भी दिल्ली पुलिस तीस हजारी के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस. सी. राजन की अदालत में परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपी तीन भाइयों और उनके पिता में से दो मुख्य आरोपी सगे भाइयों को ‘मुजरिम’ करार करवा कर सजा-ए-मौत यानी फांसी की सजा सुनवाने में कामयाब रही.

जिंदगी और इज्जत, अवैध संबंधों ने दोनों छीन लिए

जांच रिपोर्ट और तीस हजारी अदालत में कई साल तक चले ट्रायल की फाइलों के मुताबिक, रिठाला गांव निवासी घनी राम की हत्या के पीछे अवैध संबंध प्रमुख वजह रही. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, हत्यारोपियों में से एक की पत्नी, जो कि मेहरौली दिल्ली की रहने वाली थी, से घनी राम के नाजायज संबंध थे. घनी राम हत्यारोपियों में से एक भाई और उसके पिता के साथ भरतपुर (राजस्थान) में रेलवे का शेड बनाने का काम साझीदारी में करता था. हिसाब-किताब के बहाने कांधला (यूपी) के पीसीओ से फोन करके हत्यारों ने घनीराम को बुलाकर उसकी हत्या कर दी.

जब 10 घंटे दिल्ली पुलिस गन्ने के खेत में छिपी रही

ब-जरिए पड़ताल मामले की तह-तक पहुंचने के लिए दिल्ली पुलिस कांधला में एक दिन 10 घंटे से भी ज्यादा समय तक गन्ने (ईख) के खेतों में आरोपियों को लेकर छिपी रही. इंतजार था उस रिक्शे वाले के आने का, दो सगे भाई और हत्यारोपी जिसके रिक्शे पर घनी राम की लाश के टुकड़ों के तीनो बैग रखकर कांधला रेलवे स्टेशन तक ले गए. जैसे ही रिक्शा चालक को ईख के खेत के सामने से गुजरते हुए आरोपियों ने पहचाना दिल्ली पुलिस की गन्ने के खेतों में छिपी बैठी टीम ने उसे पकड़ लिया.

दिल्ली पुलिस की ‘पड़ताल’ जिसने पेश की नजीर

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दिल्ली के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर बीएस बस्सी से सम्मानित होते इस पड़ताल के जांच अधिकारी बनी सिंह अहलावत

इस पूरी पड़ताल में यह तो तय है कि कांधला थाना पुलिस (यूपी पुलिस) की मानिंद ही अगर दिल्ली पुलिस भी लापरवाही बरतते हुए, जांच को सूत्र से सूत्र मिलाते हुए इतनी बारीकी से तह-तक न ले जा पाती, तो 7 टुकड़ों में मिली यह लाश हमेशा कानून की झोली में एक ‘अनसुलझे’ हत्याकांड के रूप में कई साल तक झूलती रहती. और अंतत: अदालती फाइलों में ‘अनट्रेस’ बताकर हमेशा-हमेशा के लिए एक लावारिस लाश का सच ‘दफन’ कर दिया जाता.

मिलिए ‘पड़ताल’ करने वाले पुलिस अफसर अहलावत से

इस बेहद पेचीदा मामले के आरोपियों को फांसी के तख्ते तक पहुंचाने की सजा कराने वाले इंस्पेक्टर बनी सिंह अहलावत मूलत: जिला जींद हरियाणा के गांव बिशनपुरा के रहने वाले हैं. गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज जींद से स्नातक करने के बाद बनी सिंह अहलावत दिल्ली चले आए.

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1979 में दिल्ली पुलिस में डायरेक्टर भर्ती में सब-इंस्पेक्टर शामिल हुए. प्रमोट होने के बाद 1994 में इंस्पेक्टर के पद पर प्रमोट हुए. इंस्पेक्टर रहते हुए दिल्ली के थाना बाड़ा हिंदूराव, भजनपुरा, गीता कालोनी, ज्योति नगर, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन (दिल्ली मेन), महिपालपुर में एसएचओ (थाना-प्रभारी) रहे.

दिल्ली के उत्तरी, उत्तर-पूर्व और दक्षिण-पूर्व जिलों के इंस्पेक्टर स्पेशल स्टाफ भी रहे. जून, 2011 में सहायक पुलिस आयुक्त पद पर(एसीपी) पदोन्नत किए गए. 35 साल की दिल्ली पुलिस की सर्विस के दौरान बनी सिंह अहलावत उत्तर-पूर्वी दिल्ली के खजूरी खास सब-डिवीजन में असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर (सहायक पुलिस आयुक्त) पद से 30 जून, 2014 को दिल्ली पुलिस सर्विस से रिटायर हो गए.

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