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आपके मुलायम फर के कपड़ों के पीछे एक बेरहम दर्दनाक कहानी छुपी है

सवाल ये है कि आप नकली फर क्यों खरीदते ही हैं? फर का बना सामान खरीदने का मतलब है कि आपकी वजह से एक और जानवर की जिंदा ही खाल उतारी जाएगी

Maneka Gandhi Maneka Gandhi Updated On: Mar 21, 2018 04:27 PM IST

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आपके मुलायम फर के कपड़ों के पीछे एक बेरहम दर्दनाक कहानी छुपी है

पिछले हफ्ते मेरा एक जैन परिवार के मुखिया के यहां जाना हुआ. रास्ते में मुझे बताया गया कि वो परिवार बहुत धार्मिक है. वो सूरज डूबने से पहले ही खाना खा लेते हैं. परिवार के लोग जड़ वाली कोई भी सब्जी नहीं खाते. जब मैं उनके घर के मेहमानखाने में दाखिल हुई, तो देखा कि फर्श पर जो बड़ा सा कालीन बिछा था, वो घोड़े की खाल का बना हुआ था. अमेरिका में खाल के लिए नौजवान घोड़ों को मारकर उनकी खाल उतार ली जाती है. फिर अलग-अलग रंगों की घोड़े की खालों को जोड़कर बेदर्द अमीर लोगों के लिए कालीन बनाए जाते हैं. मेरे मेजबान साहब मुझे ये यकीन दिलाते रहे कि ये नकली खाल का है. फिर जब मैंने उन्हें चमड़े से लगे हुए बाल दिखाए, तब जाकर उन्हें यकीन हुआ कि उनके घर में बिछा कालीन वाकई घोड़े की असली खाल से बना था.

हाल ही में इंग्लैंड में भी ऐसा ही एक पर्दाफाश हुआ था. लोग फर वाले कोट और बूट अपने बच्चों के लिए खरीदते हैं. उनके लिए रंगीन हेयरक्लिप, मुलायम खिलौने और नरम जूते खरीदते हैं. खरीदारों को लगता है कि ये सस्ते हैं और रंगबिरंगे है, तो फर बनावटी होंगे. मगर ये सही नहीं है.

नकली बताकर असली फर बेच रही है कंपनियां

ह्यूमेन सोसाइटी इंटरनेशनल की एक पड़ताल से पता चला है कि फर वाली बहुत सी चीजें नकली नहीं, असली फर से बनाई जाती हैं. एचआईएस ने पाया कि फर वाले सामान बेचने वाली बहुत सी दुकानों ने बोर्ड पर लिख रखा था कि यहां असली फर के सामान नहीं मिलते. बूट्स नाम की कंपनी की मुलायम फर वाली क्लिप मिंक से बनी हुई थीं. इसी तरह रिटेल स्टोर चेन टेस्को में बिक रहे पॉमपॉम के चाबी के गुच्छे और फैट फेस के दस्ताने खरगोश की खाल के बने हुए थे. इसी तरह अर्बन आउटफिटर्स असली फर वाले स्वेटर ये कहकर बेच रही थी कि ये नकली फर हैं. इसी तरह मिसगाइडेड नाम की कंपनी के जूतों में लगी फर की लाइनिंग असली थीं. हाउस ऑफ फ्रेसर, लिली लुलु, अमेजन और एसओएस जैसी कंपनियां असली फर को नकली बताकर बेच रही थीं. इसी तरह नीमैन मार्कस नाम की कंपनी को नकली बताकर असली फर वाले बूट बेचते धरा गया.

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जब एक महिला टीके मैक्स कंपनी का नकली फर वाला चाबी का गुच्छा लेकर घर गई, तो उसे शक हुआ. दुकानदार ने उसे यकीन दिलाया कि उसने खूब जांच-परख लिया है, ये पॉमपॉम चाबी का गुच्छा असली नहीं, नकली फर का बना है. लेकिन एचआईएस की पड़ताल में पता चला कि चाबी का वो गुच्छा खरगोश की खाल का बना था. इसी तरह जांच करने वालों ने पाया कि टीके मैक्स कंपनी लोमड़ी की खाल के बने जैकेट बेच रही थी. इसी तरह मिंक की बनी ईयररिंग, खरगोश की खाल के बने जूते, की-चेन, लोमड़ी की खाल के बने हैट, भेड़ की खाल के बने स्कार्फ, जैसी तमाम चीजों को अमेजन पर ये कहकर बेचा जा रहा था कि ये नकली फर के बने हैं. अमेजन ही नहीं, बूहू, मिस बार्डो, नॉट ऑन द हाई स्ट्रीट और एट्सी और ग्रुपॉन जैसी कंपनियां भी ऐसे ही दावे कर रही थीं.

पिछले साल एचएसयूएस ने अमेरिका में फेडरल ट्रेड कमीशन में केस दर्ज कराया कि नीमैन मार्कस, कोह्ल और नॉर्डस्ट्रॉम जैसे 17 रिटेलर ऐसे कपड़े बेच रहे थे, जो थे तो असली फर के. मगर ये कंपनियां उन्हें नकली फर से बना बताकर बेच रही थीं. इसी तरह फॉरेवर 21 नाम की कंपनी पर गुड मॉर्निंग ब्रिटेन ने ऐसे ही आरोप लगाए हैं. ये सभी कंपनियां इस बात का जोर-शोर से प्रचार करती हैं कि वो फर से बने सामान नहीं बेचती हैं.

फर का फैशन बेरहमी से लेता है जानवरों की जान

ज्यादातर ग्राहक ये सोचते हैं कि चूंकि पॉमपॉम और फर की लाइनिंग वाले सामान इतने सस्ते हैं, तो वो असली फर के हो नहीं सकते. सच तो ये है कि फर के ये सामान बनाने के लिए जानवरों को बहुत बुरे हालात में रखा जाता है. साफ है कि असली फर को नकली से भी कम कीमत पर बेचा जा सकता है. किसी भी जानवर का जीवन उस वक्त बेकार हो जाता है, जब उसे बुरे हालात में रखा जाता है. उसे खाना नहीं दिया जाता. जबरदस्ती बच्चे पैदा कराए जाते हैं और कुछ ही महीनों में उन्हें मार दिया जाता है.

फर बनाने वाले फॉर्म में दसियों लाख जानवर छोटे-छोटे तारों वाले पिंजरों में कैद कर के रखे जाते हैं. पोलैंड, चीन, फ्रांस, फिनलैंड में इन जानवरों पर जुल्म ढाने से रोकने के कोई नियम नहीं हैं. जैसा कि टैन्सी हॉस्किन्स ने द गार्जियन में लिखा था, 'फर फॉर्म में 7.5 करोड़ जानवर पिंजरों में कैद करके रखे गए हैं. इनमें से कई जानवर तरह-तरह की बीमारियों के शिकार हैं. इनका इलाज भी नहीं होता. ये जानवर इतने बुरे हालात में रखे जाते हैं कि अक्सर तकलीफ और तनाव की वजह से पागल हो जाते हैं'. फर फॉर्म में रखे इन जानवरों के पास भागने का भी मौका नहीं होता. इन्हें कूड़ा-कचरा खिलाया जाता है. अक्सर इनके हाथ-पांव टूट-फूट या कट जाते हैं. आखिर में इनकी बेरहम मौत होती है. कभी बिजली के झटके से, तो कभी गैस चैम्बर में. कई बार तो जिंदा जानवरों की खाल तक उतार ली जाती है.

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जानवरों की भलाई के लिए काम करने वाली संस्था पेटा ने पालोमा फेथ की एक तफ्तीश को दुनिया के सामने रखा था. पालोमा ने यूरोप के कई फर फॉर्म की तस्वीरें ली थीं. इन सबमें देखा गया था कि ज़ुल्मो-सितम की इंतेहा से जानवर पागल हो गए थे. हमने देखा है कि खाल उतारी लोमड़ियों को उनके मुर्दा साथियों के साथ रखा जाता है. इसी तरह मिंक को उनके जख़्मों के साथ मरने के लिए छोड़ दिया जाता है. इन तस्वीरों में एक मिंक का तो फटा हुआ भेजा तक दिखा था. फर फॉर्म के बुरे हालात में कई जानवर तो खुद को भी नुकसान पहुंचाते हैं और एक-दूसरे को खा जाते हैं.

इन तस्वीरों को देखकर उल्टी आती है. ऐसी तस्वीरें और हालात हमने कई बार देखे हैं. यू-ट्यूब पर ऐसे एनिमल फॉर्म की तमाम तस्वीरें आप देख सकते हैं. चीन दुनिया का फर का सबसे बड़ा निर्यातक है. यहां के फर फॉर्म में बिल्लियों, खरगोशों और कुत्तों की खालें जिंदा उतारे जाने की तस्वीरें सामने आई हैं. हाल ही में फिनलैंड के फर फॉर्म के वीडियो सामने आए थे. इनमें अपने कुदरती वजन से पांच गुना मोटी लोमड़ियों को देखा जा सकता है. वो न तो ठीक से खड़ी हो पा रही थीं और न ही सांस ले पा रही थीं. इन्हें ज़बरदस्ती इतना मोटा किया गया था, ताकि ज़्यादा खाल और फर निकाला जा सके. इससे कंपनी का मुनाफ़ा मोटा होगा.

बस कपड़ें ही नहीं, छोटी चीजों में भी होता है इस्तेमाल

भेड़ियों, उदबिलाव, लोमड़ियों, रकून, कुत्तों और बिल्लियों की खालों को बेहद सस्ते दाम पर बेचा जाता है. ग्राहक चाहते हैं कि नकली फर भी असली जैसा दिखे. वो असली फर नहीं चाहते. इसलिए बेचने वाले असली फर को ही नकली बताकर बेच रहे हैं. अब फर के सामान का मतलब सिर्फ ऊदबिलाव की खाल के बने कोट या लोमड़ी की खाल का स्कार्फ भर नहीं रहा. अब फर और जानवरों की चमड़ियों को चटख रंगो में रंगकर, तरह-तरह के सामान बनाकर बेचा जाता है. इनमें जूते से लेकर चाबी का गुच्छा तक शामिल है.

ब्रिटेन में फर के बने सामान अक्सर दस पाउंड से भी कम कीमत पर मिल जाते हैं. इन्हें एक्सेसरीज कहकर बेचा जाता है. एचएसआई ने अपनी पड़ताल में असली खाल से बने जो सामान बिकते पाए थे, उनमें 5 पाउंड की की-चेन थी, जो खरगोश की खाल से बनी थी. एक खास नस्ल के कुत्ते की खाल से बना पारका था, जो महज 35 पाउंड में बिक रहा था. इसी तरह फर से बनी हैट 3.50 पाउंड में बिक रही थी. अब चूंकि जानवरों की खाल से बने हर सामान पर ये लिखा होना जरूरी नहीं है कि वो फर से बना है, तो कंपनियां ग्राहकों को धोखे में रखकर सामान बेच रही हैं. लोगों को लगता है कि जानवरों की असली खाल से बना सामान जैकेट या स्कार्फ होगा. मगर उन्हें ये पता नहीं है कि आज चटख रंगों में रंगकर छोटे-मोटे सामान भी फर से बनाकर बेचे जा रहे हैं. जैसे हैट, दस्ताने और जूते. इन्हें बहुत कम कीमत पर बेचा जा रहा है. कई बार इन पर ये लिखा होता है कि ये नकली फर से बने हैं.

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यहां ये जानकर हैरानी होती है कि अच्छी किस्म का नकली फर और चमड़े का सामान बहुत महंगा होता है. इसलिए ये सामान बनाने वाली कंपनियां असली चमड़े और फर के इस्तेमाल से सामान बनाती हैं और फिर उन्हें नकली बताकर बेचती हैं. अब अगर बूट्स और टेस्को जैसी कंपनियां झूठ बोलकर, असली फर को नकली बताकर बेच सकती हैं. तो खरीदारों को खुद ही सावधान रहना होगा.

इन तरीकों से पता लगा सकते हैं अंतर

अगर आप विदेश में खरीदारी करने जा रहे हैं, तो, आप इन नुस्खों की मदद से ये पता लगा सकते हैं कि कोई सामान असली फर का बना है या नकली.

टिप पर देखें: अगर असली चमड़े का सामान होगा, तो उसके बाल मोटे होंगे. उनकी नोंक तीखी होगी. वहीं नकली फर के सामान के बाल मोटे होंगे. असली फर के सामान के बालों की लंबाई भी अलग-अलग होगी. वहीं नकली फर के बालों की लंबाई कमोबेश एक जैसी होगी. असली फर इंसान की चमड़ी की तरह ही सतह पर चिकना और मुलायम होता है.

बेस की पड़ताल करें: आपको देखना चाहिए कि फर के बने जो सामान हैं, वो जड़ों पर कैसे हैं. असली फर का जुड़ाव चमड़ी से जरूर होगा. वहीं नकली फर का बेस बुना हुआ सा लगेगा.

जलाकर देखें: कोई सामान घर ले आएं तो उसके कुछ बाल काटकर जलाकर देखें. असली फर वाले बाल जलाने पर इंसान के बालों के जलने जैसी बू निकलेगी. वहीं नकली फर के बाल पिघल से जाएंगे. वो या तो लिनेन या कपास के बने नकली बाल हो सकते हैं.

कीमत पर न जाएं: असली फर से बने सामान आप को काफी कम दाम पर मिल सकते हैं. फर से बने छोटे सामान काफी कम कीमत पर बिकते हैं. ये जानवरों के बचे हुए हिस्सों के बने होते हैं. इसलिए आप ये न सोचें कि फर का बना कोई सामान सस्ता है, तो वो नकली फर का होगा.

Models hold placards as they demonstrate against the use of fur and leather in clothing at a protest organised by PETA at London Fashion Week Spring/Summer 2017 in London

यूरोपीय यूनियन की गाइडलाइन कहती है कि कपड़े के बने सामान में अगर असली फर लगा है, तो उस पर लिखा होना चाहिए कि इसमें जानवरों के शरीर का इस्तेमाल हुआ है. लेकिन ऑनलाइन बिकने वाले सामान पर ये नियम लागू नहीं होता. इसी तरह फुटवियर और एक्सेसरीज पर भी ये नियम लागू नहीं होता. हालांकि ग्राहकों को धोखा देना गैरकानूनी है. लेकिन फर के बने सामान बेचने वालों पर शायद ही कार्रवाई होती हो. ज्यादातर मामलों में गलती से गलती हो गई कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है.

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फर को महसूस करें: फर बहुत मुलायम महसूस होता है. चिकना लगता है. आपकी अंगुलियों से गुजरते हुए यूं महसूस होता है कि आप ने किसी बिल्ली पर हाथ फेरा है. नकली फर मोटा और सख्त मालूम होता है. उमस भरे मौसम में नकली फर चिपचिपा लगता है. प्लास्टिक जैसे सामान से बना होने पर नकली फर आप के हाथ से चिपक भी जाता है. आप फर का बना सामान खरीदने से पहले इसमें एक पिन चुभाएं. अगर पिन आसानी से चली जाती है, तो जानिए कि वो सिंथेटिक है. अगर पिन बमुश्किल जाती है, तो जानिए कि ये असली फर है.

सवाल ये है कि आप नकली फर क्यों खरीदते ही हैं? किसी और जानवर की चमड़ी खरीदना या चुराना कोई अच्छी बात तो नहीं. या बनावटी सामान खरीदना भी अच्छी बात नहीं. फर का बना सामान खरीदने का मतलब है कि आपकी वजह से एक और जानवर की जिंदा ही खाल उतारी जाएगी. या फिर उसे बिजली का झटका देकर मारा जाएगा. और ये किसलिए होगा. सिर्फ़ फैशन के लिए.

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