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अहिंसा: महात्मा गांधी ने जब एक गौहत्या का समर्थन किया था

12 मार्च 1930 को 63 साल के गांधी ने जब दांडी मार्च शुरू किया था तो लोगों को भरोसा नहीं था कि ये पूरा भी होगा

Updated On: Mar 12, 2018 02:16 PM IST

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee

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अहिंसा: महात्मा गांधी ने जब एक गौहत्या का समर्थन किया था

दक्षिण अफ्रीका वाले कहते हैं कि भारत ने हमें एक बैरिस्टर दिया, हमने उसे महात्मा बनाकर वापस किया. भारतीय नेता भारत में कुछ भी कहें, विदेश में जाकर गांधी और बुद्ध के देश से आने का हवाला देते हैं.

गांधी के बारे में उनके अपने देश में काफी अलग-अलग प्रचार दुष्प्रचार किए जाते रहे हैं. गांधी के हत्यारे और उसके पीछे के विचार का महिमामंडन करने वाले कम नहीं हैं. कहा जाता है कि गांधी ने सत्ता से जुड़े अपने स्वार्थों के लिए देश का बंटवारा होने दिया. जबकि जब देश आजाद हो रहा था तो महात्मा गांधी जश्न से दूर नोआखली में दंगे शांत कराने में लगे थे.

गांधी पर अफ्रीका में बना कार्टून साभार- गांधी दर्शन

गांधी पर अफ्रीका में बना कार्टून साभार- गांधी दर्शन

जिस पल के लिए पूरे जीवन संघर्ष किया हो जब उसे पाने का समय आया तो उस से खुद को अलग कर लिया. गांधी का अंधविरोध करने वालों ने उनके प्रति बहुत दुष्प्रचार किया. वैसे ही गांधी के नाम पर सत्ता चलाने वालों ने भी उनकी बातों का रट्टा मारकर उसका अनर्थ किया.

गौहत्या की सहमति पर गांधी का यंग इंडिया में छपा संपादकीय

गौहत्या की सहमति पर गांधी का यंग इंडिया में छपा संपादकीय

गांधी ने अपनी कमियों से सीखा और उसके बारे में सबके सामने खुल कर बात की. इसका एक उदाहरण गांधी के आश्रम में एक बछड़े को दी गई दया मृत्यु है. गांधी अहिंसा के पुजारी थे. उन्होंने गौसेवा पर भी बहुत कुछ कहा है. मगर एक घटना ऐसी भी है जब गांधी ने दया मृत्यु को अहिंसा का हिस्सा बताया.

अफ्रीका में गांधी की सफलता पर एक कार्टून साभार- गांधी दर्शन

अफ्रीका में गांधी की सफलता पर एक कार्टून साभार- गांधी दर्शन

1926 में गांधी के सामने एक दुविधा सामने आई. आश्रम के एक बछड़े को कोई तकलीफ देह बीमारी हो गई जिसका कोई इलाज नहीं था. वेटनरी डॉक्टर का कहने पर गांधी ने उस बछड़े को मारने की इजाज़त दे दी. कस्तूरबा सहित दूसरे आश्रमवासियों ने गांधी का विरोध किया कि वो एक हिंदू होकर कैसे गौहत्या को सही ठहरा सकते हैं. गांधी का कहना था कि किसी को पीड़ा से मुक्ति दिलाना अहिंसा का पहला मंत्र है. उस बेचारे बछड़े को राहत देने का यही तरीका था.

अफ्रीका में अहिंसा और गांधी पर एक कार्टून

अफ्रीका में अहिंसा और गांधी पर एक कार्टून

इसी तरह की दो तीन घटनाएं और गांधी के जीवन में सामने आती हैं. इनके बारे में गांधी ने खुद अपने पत्र यंग इंडिया में लिखा था. बापू की समाधि के पास बने गांधी दर्शन में ये संपादकीय आज भी लगा हुआ है.

अफ्रीका में गांधी की सफलता पर एक कार्टून साभार- गांधी दर्शन

अफ्रीका में गांधी की सफलता पर एक कार्टून साभार- गांधी दर्शन

गांधी के अनुयायी अंबालाल साराभाई की कपड़ा मिल थी. साराभाई के मिल कंपाउंड में 60 कुत्ते रैबीज़ से पागल हो गए. ये कुत्ते लोगों के लिए खतरा बन गए. साराभाई ने उन कुत्तों को मारने के आदेश दिया. इसके बाद साराभाई गांधी के पास ग्लानि से भर कर आए. उन्हें लगता था कि एक जैन होकर उन्होंने गलत फैसला लिया. गांधी ने कहा कि साराभाई ने जो किया वो सही था.

जलियांवाला बाग में महात्मा गांधी

जलियांवाला बाग में महात्मा गांधी

इस घटना के बाद एक जैन ने गांधी को खत लिखा. कहा आपने एक गौहत्या करवाई, अगर मैंने आपकी हत्या नहीं की तो मैं सच्चा जैन नहीं. लोगों ने ये भी कहा कि गाय की जगह वो जहर गांधी को ही दे देना चाहिए था. इन सबके बाद भी गांधी अडिग रहे. उनसे पूछा गया कि अगर कोई इंसान लोगों को पागल होकर मारने लगे तो क्या उसकी भी हत्या करनी चाहिए.

नमक सत्याग्रह में गांधी की सफलता पर एक कार्टून

नमक सत्याग्रह में गांधी की सफलता पर एक कार्टून

गांधी ने हर परिस्थिति में लोगों को बचाने की बात कही. इसके साथ ही गांधी ने ये भी कहा, 'फसल बर्बाद करने वाले जानवरों को भगाना हिंसा नहीं कही जा सकती. अगर मुझे फसल बचाने के लिए बंदरों पर सीधे लाठी से प्रहार करना पड़ेगा तो मैं एक पल के लिए भी नहीं हिचकिचाऊंगा.'

ब्रिटिश शेर को नमक डालकर पकाते गांधी का कार्टून

ब्रिटिश शेर को नमक डालकर पकाते गांधी का कार्टून

गांधी की जिजविषा कई जगह दिखती है 12 मार्च 1930 को जब गांधी दांडी शुरू करते हैं तो लोगों को लगता है कि 60 साल पार कर चुका ये शख्स इतनी मेहनत नहीं कर पाएगा. उस समय के वायसराय लॉर्ड इरविन ने इस मार्च को कतई गंभीरता से नहीं लिया. मगर गांधी लगभग एक महीने (12 मार्च से 6 अप्रैल) मे पूरी हुई इस 358 किलोमीटर की इस यात्रा में देश को हिला देते हैं.

नमक सत्याग्रह में गांधी की सफलता पर एक कार्टून

नमक सत्याग्रह में गांधी की सफलता पर एक कार्टून

कच्छ के समुद्र तट पर जब वो अरब सागर से कीचड़ से नमक उठाते हैं तो नमक कानून के साथ-साथ ब्रिटिश शासन की नींव हिल जाती है. उस समय के दुनिया भर के अखबारों ने इस घटना पर कार्टून बनाए. नमक सत्याग्रह के बाद ही इरविन को गांधी से समझौता करना पड़ा, इसे गांधी-इरविन पैक्ट कहा गया.

इसी गाड़ी पर महात्मा गांधी की शवयात्रा गई थी साभार- गांधी दर्शन

इसी गाड़ी पर महात्मा गांधी की शवयात्रा गई थी साभार- गांधी दर्शन

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