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एम एफ हुसैन: एक पेंटर जिसके प्यार और इकरार में गहरा फासला था

एक छोटे से कस्बे से निकल कर लंदन की आलीशान जिंदगी तक का सफर आसान नहीं था लेकिन उन्होंने इसे अपनी शर्तों के साथ पूरा किया.

Updated On: Sep 17, 2018 01:56 PM IST

Rituraj Tripathi Rituraj Tripathi

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एम एफ हुसैन: एक पेंटर जिसके प्यार और इकरार में गहरा फासला था

कहते हैं कि एक अच्छा चित्रकार समाज के हर पहलू को अपने चित्रों में जीवंत कर सकता है. कई बार ध्यान से देखने पर पाया भी गया है कि चित्र कुछ कहना चाहते हैं, बातें करना चाहते हैं.

लोगों ने इस बात का कई बार दावा किया कि जब वह अकेले थे तो उन्हें लगा कि दीवार पर लगी तस्वीर उनकी जिंदगी से जुड़ा अहम किस्सा बयां कर रही है. यह सब एक मंझे चित्रकार की कला का कमाल होता है. एम एफ हुसैन इसी कड़ी के चित्रकार थे.

आलोचना या तारीफ की परवाह किए बिना उन्होंने ऐसे चित्र बनाए जो लोगों के दिलों में घर कर गए. इसलिए उन्हें भारत का पिकासो भी कहा जाता है. आज यानि सोमवार को हुसैन का जन्मदिन है. उनका जन्म 1915 में महाराष्ट्र के छोटे से कस्बे पंढारपुर में हुआ था.

हुसैन के लिए एक छोटे से कस्बे से निकल कर लंदन की आलीशान जिंदगी तक का सफर आसान नहीं था लेकिन उन्होंने इस सफर को अपनी शर्तों के साथ ही पूरा किया. उनके बारे में दिलचस्प बात यह है कि वह कभी चप्पल या जूते नहीं पहना करते थे, हमेशा नंगे पैर रहना उनकी पहचान थी.

संघर्ष के दिनों में फिल्मों के होर्डिंग बनाया करते थे हुसैन

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ऐसा नहीं है कि हुसैन की चित्रकारी को शुरुआत में ही कदरदान मिल गए थे. उन्हें भी अपने करियर की शुरुआत में काफी पापड़ बेलने पड़े थे. हुसैन संघर्ष के दिनों में फिल्मों के लिए होर्डिंग बनाया करते थे लेकिन एक वक्त ऐसा आया जब निर्माता अहसान मियां ने उन्हें बाहर का दरवाजा दिखा दिया था.

वैसे सच बात तो यह है कि चित्रकला हुसैन का पहला प्यार नहीं थी बल्कि वह तो सिनेमा के लिए दीवाने थे. वह प्यार सिनेमा से करते थे लेकिन इकरार उन्होंने चित्रकारी से किया. 'मीनाक्षी-ए टेल ऑफ थ्री सिटीज' उनकी प्रसिद्ध फिल्मों में से एक है.

हुसैन मुंबई भी इसलिए गए थे क्योंकि वह निर्देशक बनना चाहते थे. शुरु में मुंबई में अपना खर्च चलाने के लिए वह बिलबोर्ड बनाने और खिलौने का काम करते थे. होर्डिंग बनाते समय ही हुसैन का चित्रकला के लिए प्यार जागा और फिर उन्होंने अपना पूरा ध्यान इसी तरफ लगा दिया.

1940 में उन्हें अपने बनाए चित्रों की वजह से राष्ट्रीय रूप से पहचान मिली. उनकी पहली एकल प्रदर्शनी 1952 में ज्यूरिख में हुई. इसके बाद यूरोप और अमेरिका में उनकी कलाकृतियों की अनेक प्रदर्शनियां लगीं.

67 बार देखी थी इस एक्ट्रेस की फिल्म, पूरा सिनेमा हॉल कर दिया था बुक

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एम एफ हुसैन का पूरा नाम मकबूल फिदा हुसैन था. मकबूल का फिल्मों के प्रति लगाव और दीवानगी का आलम यह था कि वह अपनी पसंद की मूवी देखने के लिए पूरा सिनेमा हॉल बुक कर लिया करते थे. बॉलीवुड की धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित उनकी पसंदीदा हीरोइन थीं.

उनकी फिल्म 'हम आपके हैं कौन' हुसैन ने 67 बार देखी थी. फिल्म देखने के बाद हुसैन ने उनके ऊपर पेंटिंग की पूरी सीरीज बना डाली थी. जब हुसैन 85 साल के थे तब उन्होंने माधुरी दीक्षित को लेकर एक फिल्म बनाई थी. इस फिल्म का नाम गजगामिनी था.

हैरानी की बात यह है कि माधुरी की दीवानगी की वजह से इस फिल्म का बजट 2.5 करोड़ रुपए था जबकि फिल्म से कमाई केवल 26 लाख रुपए की ही हुई. हालांकि हुसैन ने कभी इस बात का अफसोस नहीं जताया. हुसैन आखिरी समय तक माधुरी के दीवाने रहे.

जब काफी समय बाद माधुरी ने 'आजा नचले' के साथ बॉलीवुड में दूसरी पारी की शुरुआत की तो हुसैन ने दुबई में लैम्सी सिनेमा को पूरा बुक कर लिया था. वह तब्बू और विद्या बालन के साथ भी काम करना चाहते थे.

विवादित चित्रों की वजह से छोड़ना पड़ा था देश, यहां ली अंतिम सांस

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एम एफ हुसैन के कुछ चित्रों पर खूब विवाद हुआ जिसकी वजह से 2006 में उन्हें भारत छोड़ना पड़ा. हिंदूवादी संगठनों का कहना था कि हुसैन हिंदू विरोधी हैं. उन्होंने हिंदू देवी देवताओं से जुड़ी ऐसी तस्वीरें बनाईं जिनसे लोग काफी भड़क गए.

1970 में हुसैन ने ऐसी ही एक पेंटिंग बनाई थी जिसे 1996 में विचार मीमांसा पत्रिका में छापा गया था. इस पेंटिंग का नाम था 'मकबूल फिदा हुसैन-पेंटर या कसाई'. हुसैन ने कई उत्तेजक चित्र भी बनाए. उन पर देश के कई हिस्सों में अश्लील चित्र बनाने के मामले दर्ज हुए.

हिंदू संगठनों ने 1998 में उनके घर पर हमला कर दिया और सारी पेंटिंग्स को नष्ट कर दिया. लेकिन हुसैन ने विवादों को कभी खुद से दूर नहीं होने दिया. हालांकि अपनी कई पेंटिंग्स की वजह से हुसैन को बड़े पुरस्कार मिले. उन्हें पद्म श्री (1955), पद्म भूषण (1973) और पद्म विभूषण (1991) से सम्मानित किया गया. 1986 में वह राज्यसभा के सदस्य भी रहे.

2006 में हुसैन ने भारतमाता की नंगी तस्वीर बनाई. एक मैग्जीन के कवर पेज पर एक नंगी लड़की को भारतमाता के रूप में पेश किया गया. उस लड़की को भारत के मानचित्र के रूप में दर्शाया गया जिसके पूरे शरीर पर देश के राज्यों के नाम लिखे थे. हिंदू संगठनों ने इसका कड़ा विरोध किया था.

हुसैन नास्तिक थे और किसी धर्म को नहीं मानते थे.इस्लामी संगठन ने भी उन पर ईशनिंदा के आरोप लगाए थे. विवादों की वजह से हुसैन को जान से मारने की धमकी मिलने लगीं थी इसलिए वह भारत छोड़कर दोहा में बस गए. हालांकि 2010 में उन्हें कतर की नागरिकता मिल गई लेकिन 9 जून 2011 को लंदन में वह दुनिया को अलविदा कह गए.

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