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कुष्ठ रोगः भारत में गंभीर है यह मर्ज, लेकिन इलाज भी है

साल 2005 में इस बीमारी के उन्मूलन की घोषणा तो हो गई थी लेकिन अब भी इसके नए मामले सामने आते रहे हैं

Updated On: Feb 12, 2018 05:39 PM IST

FP Staff

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कुष्ठ रोगः भारत में गंभीर है यह मर्ज, लेकिन इलाज भी है

भारत में कुष्ठ रोग एक बड़ी समस्या है. पूरी दुनिया में इस गंभीर बीमारी के लगभग 40 लाख मरीज हैं जिनमें 70 परसेंट मरीज भारत में ही पाए जाते हैं. हर साल कुष्ट रोग के 750,000 नए केस सामने आते हैं.

भारत में कितनी गंभीर यह बीमारी

भारत में यह बीमारी दिनों दिन घटती जा रही है. साल 2005 में इस बीमारी के उन्मूलन की घोषणा तो हो गई थी लेकिन अब भी इसके नए मामले सामने आते रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक दुनिया में अब भी भारत में ही सबसे ज्यादा कुष्ठ रोग के मरीज पाए जाते हैं

कैसी बीमारी है यह

यह रोग पुराना और गंभीर है जो माइकोबैक्टीरियम लैप्री नामक बैक्टीरिया से फैलता है. इसका असर स्किन, नसों, आंखों और सांस तंत्र पर देखा जाता है. इसे हैंसेन डिजीज भी कहते हैं. इस बीमारी का बैक्टीरिया काफी सुस्ती से फैलता है, इसलिए इसे विट्रो कल्चर टेस्ट में पकड़ना आसान नहीं है.

कुष्ठ रोग की गंभीरता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि रोगी समय रहते बीमारी का पता नहीं लगा पाते. इसके बाद इलाज के अभाव में अपंग हो जाते हैं. जानकारों की मानें तो अगर कुष्ठ रोगियों के आसपास रहने वाले लोगों को इसका टीका दिया जाए, तो 3 साल के अंदर ही 60 फीसद इस बीमारी में कमी लाई जा सकती है. अगर कुष्ठ के कारण किसी का स्किन जख्मी हो गया है, तो इस टीका के लगने के साथ ही ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है.

भारत में बन चुका है इसका टीका

यहां जान लेना जरूरी है कि अगर भारत में कुष्ठ रोग के मरीज सबसे ज्यादा हैं तो इसके इलाज के लिए दुनिया का पहला टीका भी यहीं बनाया गया है. रोगियों की संख्या को देखते हुए टीके को एक बड़ी कामयाबी के रूप में देखा जा रहा है. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी के जीपी तलवार ने इस टीके को बनाया है. ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया और अमेरिका की एफडीए की मंजूरी इस टीके को मिल चुकी है. कुष्ठ रोग से पीड़ित लोगों के संपर्क में आने वाले भी इस गंभीर बीमारी से संक्रमित हो जाते हैं. यह टीका उनके लिए भी कारगर साबित होगा.

उपचार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने कुष्ठ रोग के इलाज के लिए मल्टीड्रग थेरापी शुरू किया है जिसमें रिफैंपसिन, डैप्सोन और क्लोफाजिमाइन दवाएं शामिल हैं. इलाज के लिए नई दवाएं भी आई हैं जिनमें पेफ्लोक्सासिन और ओफ्लोक्सासिन के नाम हैं. निप्पॉन फाउंडेशन की ओर से फ्री एमटीडी भी चलाया जा चुका है.

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