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अलविदा 2017: हम तो जाते अपने 'गांव', सबको राम राम राम 

लालू जी जानते हैं कि जब राजनीति की ओखली में सिर दिया है तो सीबीआई-ईडी के मूसल से किस बात का डर

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Dec 30, 2017 09:26 AM IST

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अलविदा 2017: हम तो जाते अपने 'गांव', सबको राम राम राम 

नए साल में लालू जी को कारागार में 'फ्लेक्सी प्लान' मिलने की उम्मीद कम है.  चारा घोटाले का जिन्न लालू जी को ही बोतल में बंद करने पर आमादा है. 3 जनवरी को सजा का ऐलान होगा. ना मालूम कितनी कड़ी और कितनी बड़ी सजा होगी. उस पर यक्षप्रश्न ये है कि जमानत मिलेगी या नहीं? जमानत मिलेगी तो दो बातें होंगी. लालू साल 2019 के लोकसभा चुनावों में विपक्ष को एकजुट कर ताल ठोंकेंगे. ताल ठोंकने से भी दो बातें होंगीं. एक तो विपक्ष में जान आएगी तो दूसरा ये कि लालू इस बार आर-पार के मुकाबले में बिहार में सबकुछ दांव पर लगा देंगे. वहीं जमानत मिलने पर दूसरी बात ये हो सकती है कि लालू बाहर आ कर न सिर्फ पीएम मोदी को ललकारते रहेंगे बल्कि आरजेडी को बिखरने भी नहीं देंगे. वो चाहेंगे कि उनके बेटे तेजस्वी यादव की भी अध्यक्ष पद पर जल्द ताजपोशी कर  दी जाए ताकि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के बराबर अपना वारिस भी छोड़ सकें.

lalu prasad yadav rise and fall

लेकिन दिक्कत जमानत की है. जमानत नहीं हुई तो? नहीं हुई तो लालू जी जेल जाएंगे. जेल जाएंगे तो तेजस्वी स्वाभाविक रूप से पार्टी संभालेंगे. लेकिन बिहार की सियासत इस वक्त नाजुक मोड़ पर है. खुद बिहार के सीएम नीतीश भी नहीं जानते कि उनके मंत्री या फिर नेता कब क्या बोल जाएं? जैसा कि अभी एक जेडीयू नेता ने ही आरोप लगाया है कि लालू जी के खिलाफ बीजेपी और राज्य सरकार ने साजिश की है. ऐसी ही स्थिति कमोबेश आरजेडी में है. वहां अभी समस्त नेतागण लालूजी के अनुशासन और मोहपाश से बंधे हुए हैं. लालू जी के बाहर न रहने पर जब युवा हाथों की कमान में उन वरिष्ठ नेताओं को उपेक्षा दिखी तो वो नीतीश कुमार या फिर सुशील मोदी के घर पर दही-चूड़ा खाने जा सकते हैं. ऐसे में जो पार्टी पहले सरकार में थी वो धीरे धीर आकार में भी घट सकती है. यानी पेंच कई हैं. लालू जी उन पेंच को बेहतर समझते हैं तभी कसना भी जानते हैं.

Ranchi: RJD supremo Lalu Prasad Yadav and his son Tejashwi Yadav arrive at a special CBI court in Ranchi on Saturday for hearing into the fodder scam case . PTI Photo(PTI12_23_2017_000065B)

रहा सवाल करप्शन के आरोपों का तो लालू जी के लिए इनसे निपटना नई बात नहीं है. 25 साल से लालू जेल-बेल के खेल में माहिर हो चले हैं. जेपी आंदोलन के वक्त भी जेल जा चुके हैं. देश के तमाम नेताओं ने एक बात जरूर सीखी कि जेल जाने से डरना नहीं चाहिए. न तो ए राजा डरे और न कनिमुई. जेल जाने को बस ये मान लेना चाहिए कि अपने गांव जा रहे हैं. यानी जेल केवल एक मानसिक स्थिति है. ठीक उसी तरह जिस तरह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कभी गरीबी को मानसिक स्थिति बताया था. ऐसे में कोई चिंता की बात नहीं है. लालू जी जानते हैं कि जब राजनीति की ओखली में सिर दिया है तो सीबीआई-ईडी के मूसल से किस बात का डर.

Patna: RJD Chief Lalu Prasad Yadav addressing a press conference in Patna on Friday. PTI Photo (PTI11_10_2017_000056B)

लालू जी अपनी स्टाइल में जीने वाले आदमी हैं. उन्हें पटना बुलाओ या रांची या दिल्ली. सब बराबर है. वो आरोपों को बीजेपी और आरएसए की साजिश बताकर  राजनीति का 'चारा' ही बना डालते हैं.

सही भी है. जो होगा देखा जाएगा. वैसे भी तो जो नहीं देखा और सोचा वो देखना पड़ रहा है. एक वक्त था जब लालू जी के पीएम बनने तक की बातें होने लगी थीं. लेकिन अब सीएम भी नहीं रहे. क्या करें जब साल ही अपना न रहा. वैसे भी जब साले भी अपने न रहे तो साल कब किसका हुआ है? वो साल दूसरा था और ये साल दूसरा है. लालू जी नया साल मुबारक हो.

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