S M L

चूहे-गिलहरी के बाल और मल: क्या आप जानते हैं ये सब आपके खाने में है?

दालचीनी, लाल मिर्च, ओरेगैनो, अजवायन, तिल, सौंफ, अदरक और बाकी दूसरे मसालों में अक्सर कीड़ों या जानवर का मल भी पाया जाता है

Maneka Gandhi Maneka Gandhi Updated On: Jun 06, 2018 08:33 AM IST

0
चूहे-गिलहरी के बाल और मल: क्या आप जानते हैं ये सब आपके खाने में है?

मैं जब भी चॉकलेट खाती हूं तो सिर्फ उसकी कैलोरी के बारे में सोचती हूं. कभी उसमें रोडेंट (कृंतक कुल के चूहा, गिलहरी आदि) के बाल या मल की मौजूदगी के बारे में नहीं सोचा. लेकिन लगता है कि शायद मुझे सोचना चाहिए. यूनाइटेड स्टेट्स में खाने की चीजों के लिए पैमाना तय करने वाली अमेरिकन फूड एंड ड्रग अथॉरिटी (एफडीए) ने डिफेक्ट लेवल्स हैंडबुक नाम से एक पुस्तिका जारी की है. इसमें एक स्वीकार्य पैमाना तय किया गया है. इसके अनुसार 'खाने की चीजों में मौजूद प्राकृतिक और अपरिहार्य खामियों की सीमा तय की गई, जो इंसानों के लिए खतरनाक नहीं हैं.'

इस ‘प्राकृतिक और अपरिहार्य’ खामी से छूट के पीछे मकसद शायद निर्माताओं को मुकदमों से सुरक्षा प्रदान करना है. एफडीए हैंडबुक एक चॉकलेट बार (करीब 100 ग्राम की) में रोडेंट का एक बाल मिलने की मंजूरी देती है. इस 100 ग्राम में कीड़ों के 60 टुकड़े की भी मंजूरी है. कानूनन कीड़े-चाहे साबुत हों, उनके शरीर का कोई हिस्सा, लार्वा या जानवरों के शरीर पर पलने वाली कुटकी कुछ भी हो सकती है, 71 फूड्स में इनकी अनुमति दी गई है.

पीनट बटर, लाल मिर्च, ओरेगैनो, दालचीनी, तेज पत्ता और ऐसी कई अन्य खाने की चीजों में आप इन्हें पा सकते हैं. ओरेगैनो में कीड़ों के 300 टुकड़े हो सकते हैं, जबकि ग्राउंड ओरेगैनो में कीड़ों के 1250 टुकड़े की अनुमति है. टोमैटो जूस में प्रति 100 ग्राम 10 फ्रूट फ्लाई एग्स या एक कीड़ा हो सकता है. 15 ग्राम ड्राइ मशरूम में 20 कीड़े या 75 कुटकी हो सकते हैं. चेरी के एक डिब्बे में 5 फीसदी कीड़े हो सकते है.

यह भी पढ़ें: जानवरों पर शोध में हर किसी का फायदा है, सिर्फ जानवरों को छोड़कर

खाने से पहले यह जान लें

रोचक बात ये है कि एफडीए ने सिर्फ एक चीज में कीड़ों के सिर की मौजूदगी की अनुमति दी है. यह है अंजीर. 100 ग्राम के अंजीर के पेस्ट में 13 सिर की अनुमति है. लेकिन सिर्फ सिर ही क्यों? भगवान ही जाने (इसकी वजह शायद एफडीए को भी पता नहीं है). हालांकि जो बात एफडीए अच्छी तरह से जानता है वह यह है रोडेंट के कितने बाल फूड का आदर्श मिश्रण बनाते हैं.

peanut-butter

100 ग्राम पीनट बटर में कीड़े के शरीर के 30 टुकड़े और रोडेंट के एक बाल की अनुमति है, जिससे आदर्श सम्मिश्रण बनता है. 50 ग्राम दालचीनी में कीड़े के 400 टुकड़े और रोडेंट के 10 बाल डालने की अनुमति है. 25 ग्राम के लाल शिमला मिर्च में कीड़ों के शरीर के 75 टुकड़े और 11 रोडेंट हेयर की अनुमति है.

दालचीनी, लाल मिर्च, ओरेगैनो, अजवायन, तिल, सौंफ, अदरक और बाकी दूसरे मसालों में अक्सर कीड़ों या जानवर का मल भी पाया जाता है. एफडीए 1 किलोग्राम कोको बींस में इसकी 20 मिलीग्राम की मंजूरी देता है. हर एक किलो गेहूं में 9 लेड़ी की अनुमति है. यहां तक कि पॉपकार्न के एक केन के सब-सैंपल में एक लेड़ी की अनुमति है. हालांकि एफडीए की बुकलेट में सब-सैंपल के आकार को परिभाषित नहीं किया गया है.

जाने-अनजाने कितनी फफूंद खाते हैं आप

फफूंदी भी ज्यादातर फलों, सब्जियों, बटर और जैम में स्वीकृत खामी है. लाल मिर्च में करीब 20 फीसद तक फफूंदी मान्य है. तेज पत्ता के पैकेट में 5 फीसदी और फ्रोजेन आड़ू के केन में 3 फीसद तक फफूंदी की अनुमति है.

74 फीसद फफूंदी की अनुमति के साथ ब्लैककरंट जैम इस लिस्ट में सबसे ऊपर है. टोमैटो कैचप, टोमैटो जू और केन्ड टोमैटो में भी कम स्तर की फफूंदी स्वीकृत है.

यह भी पढ़ें: देश में सुधार के लिए लचर कमेटी नहीं कैलिफोर्निया जैसा मॉडल चाहिए: मेनका गांधी का कॉलम

अगर यह सब पर्याप्त नहीं है, तो एफडीए हैंडबुक में कुछ चुनिंदा फूड्स में ‘फॉरेन मैटर’ की मौजूदगी को मंजूरी दी गई है. इसमें पत्थर, तीलियां, जूट के रेशे और सिगरेट को भी शामिल कर दिया गया! यह 'फूड में प्राकृतिक या अपरिहार्य खामियों शुमार होती हैं, जिनसे इंसानी सेहत के लिए कोई खतरा नहीं है.'

अगर आप घटिया क्वालिटी के अमेरिकी पैकेज्ड फूड की कम मांग से अचंभित हैं तो अपने खुद के देश पर ध्यान दीजिए. एफडीए का भारतीय अवतार एफएसएसएआई (फू़ड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया) है. यह भी ऐसे ही मानकों का पालन करता है, लेकिन वो इतने भ्रामक होते हैं कि कोई भी इन्हें पढ़ने की जहमत नहीं उठाता. इन्हें एक साथ हैंडबुक में प्रकाशित करने के बजाय यह इन्हें अलग फूड्स के लिए अलग नियमों में की आड़ में छिपा देते हैं.

जब अनुमन्य फूड खराबियों की बात आती है, एफएसएसएआई एक शब्दावली का इस्तेमाल करता है, जिसे ‘बाह्य तत्व’ कहते हैं. इसे परिभाषित करते हुए कहा गया है, 'किसी खाद्य पदार्थ में शामिल कोई तत्व, जो कच्चे माल, पैकेजिंग मटीरियल या इसे तैयार करने में इस्तेमाल प्रोसेसिंग सिस्टम से आया या शामिल हुआ हो लेकिन ये फूड को हानिकारक नहीं बनाता है.'

FSSAI किसी जहरीले तत्व को परिभाषित नहीं करता

एफएसएसएआई किसी हैंडबुक या दस्तावेज में साफ तौर पर जहरीले तत्वों को परिभाषित नहीं करता है. हालांकि यह इसके विभिन्न नियमों में साफ तौर पर जाहिर होता है.

उदाहरण के लिए एफएसएसएआई की शर्त बस इतनी है कि छिली हुई मूंगफली में सिर्फ ‘व्यावहारिक रूप’ से कंकड़, धूल, मिट्टी आदि ना हो. इसके अलावा कुलपैकेट का 5 फीसद हिस्सा टूटा हो सकता है. अधिकांश सूखे मेवों और बीजों के मामले में 2 फीसदी ‘बदरंग और टूटे’ हो सकते हैं, जिसमें कीड़ों द्वारा खराब किया जाना भी शामिल है.

सूखी खुबानी के मामले में एफएसएसएआई का कहना है कि इसमें जीवित कीड़े नहीं होने चाहिए, लेकिन ‘तार्किक’ मात्रा में कीड़ों का ढेर, वनस्पतियों के हिस्से और अन्य आपत्तिजनक चीजें हो सकती हैं. 3 फीसद तक सुपारी फफूंदी और कीड़ों से खराब हो सकती है.

आटा के पैकेट में 2 फीसदी तक राख हो सकती है. पौष्टिक आटा, जिसका अर्थ स्वास्थ्यवर्धक या पोषक तत्वों से भरपूर है, में थोड़ी ज्यादा 2.75 फीसद राख हो सकती है. सभी तरह के अनाज, जिसमें गेहूं, मक्का, जवार, बाजरा, चावल और अधिकांश दलहन चना, राजमा, मूंग, मसूर, उड़द आदि शामिल हैं, उनमें 1 फीसद बाह्य तत्वों कीअनुमति है. इसमें जानवरों से पैदा होने वाले 0.1 फीसदी अशुद्धता भी शामिल है. वो अनिवार्य चीजें, जिन्हें हमारे देश में हर घर में रोज खाया जाता है, उनमें कुछ धातुओं के टुकड़े, बालू, धूल, कंकड़-पत्थर, बालू, धेला और जानवरों का मल और बाल शामिल होते हैं.

क्या आप जानते हैं कि आप क्या खा रहे हैं?

शुगर, रिफाइंड शुगर और बुर्रा में 0.1 फीसद बाह्य तत्व शमिल हो सकते हैं, लेकिन गुड़ के मामल में यह 2 फीसद तक हो सकता है. अगर आप इस सटीक आकलन से प्रभावित हैं, तो दूसरी तरफ सहर के मामले में सिर्फ नजरों से देख लेने की जरूरत है कि इसमें फफूंदी, धूल, कूड़ा, मक्खियों के टुकड़े और कोई कीड़ा तो नहीं है.

sugar

इसी तरह भारत का फेवरेट पेय- चाय- के मामले में एफएसएसआई सिर्फ इतना चाहता है कि इसमें जीवित कीड़े, मरे कीड़े, कीड़ों के टुकड़े, नमी या 'नंगी आंखों से दिखने वाले रोडेंड के अवशेष' ना रहें. एफएसएसआई कई तरह के नमक और मसालों जैसे कि जीरा, इलायची, लौंग, दालचीनी और लाल मिर्ची, हल्दी, काली मिर्च, धनिया, मेथी आदि में 1-2 फीसद बाह्य तत्वों की इजाजत देता है. इसमें धूल, गंदगी, पत्थर, और जमीन के हिस्से, धेला शामिल हैं.

एक अफसर ने मुझे बताया कि कुछ साल पहले जब भारत को दाल की फौरन जरूरत थी, तो इसका बर्मा से आयात किया गया था. दाल में बहुत ज्यादा पत्थर मिले हुए थे. तब एफएसएसआई ने यह मुद्दा उठाने के बजाय अपने मंत्रालय से बात की और ज्यादा पत्थरों की अनुमति देने के लिए नियम ही बदल दिए. इस तरह फूड की गुणवत्ता कॉरपोरेशनों और विनियामक निकायों से तय होती है, जिनका गठन उनकी सुरक्षा करने के लिए किया जाता है. तो फिर उपभोक्ताओं की सुरक्षा कौन करेगा?

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
DRONACHARYA: योगेश्वर दत्त से सीखिए फितले दांव

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi