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शादी नहीं करना चाहती थीं कविता कृष्णमूर्ति, किस बात ने बदल दी उनकी सोच

Valentine Day 2019: वैलेंटाइन डे पर खास डॉ. एल सुब्रमनियम के मुकाबले हिंदुस्तान में भले ही कविता कृष्णमूर्ति को ज्यादा लोग जानते हैं लेकिन भारत के बाहर कविता कृष्णमूर्ति की अलग पहचान है कि वो डॉ. एल सुब्रमनियम की पत्नी हैं.

Updated On: Feb 14, 2019 09:22 AM IST

FP Staff

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शादी नहीं करना चाहती थीं कविता कृष्णमूर्ति, किस बात ने बदल दी उनकी सोच

हिंदी सिनेमा इतिहास की लाजवाब फिल्म 1942- ए लव स्टोरी  याद कीजिए. खूबसूरत मनीषा कोइराला और यंग अनिल कपूर को याद कीजिए. साथ ही याद कीजिए उस फिल्म का लाजवाब संगीत. जिसे आरडी बर्मन ने तैयार किया था. फिल्म के संगीत की बात जैसे ही होगी आपको कानों में एक गाना खुद-ब-खुद बजने लगेगा. क्यों नए लग रहे हैं ये धरती गगन, मैंने पूछा तो बोली ये पहली पवन...प्यार हुआ चुपके से. इस गाने को गाया था कविता कृष्णमूर्ति ने.

कविता कृष्णमूर्ति पॉपुलर प्लेबैक गायिका के साथ-साथ एक मंझी हुई कलाकार भी हैं. उन्होंने बचपन से ही बाकायदा शास्त्रीय संगीत की तालीम ली है. फिल्मी गायकी में नाम कमाने से पहले वो मन्ना डे, हेमंत कुमार, मुकेश और किशोर कुमार जैसे दिग्गज कलाकारों के साथ स्टेज शो किया करती थीं.

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इसके अलावा वो महान गायिका लता मंगेशकर के गानों की डबिंग भी किया करती थीं. शूट के बाद फाइनल टेक के लिए लता जी की आवाज होती थी. खैर, आज आपको कविता कृष्णमूर्ति के प्यार की कहानी सुनाते हैं.

कविता कृष्णमूर्ति 90 के दशक की उन गायिकाओं में से हैं जिनकी बहुत डिमांड थी. कविता कृष्णमूर्ति की आवाज में ना सिर्फ एक ताजगी थी बल्कि उनका रियाज ऐसा था कि वो किसी भी तरह के गाने को गा सकती थीं. जाहिर है प्रोफेशनल व्यस्तता थी. इस बिजी शेड्यूल में कविता कृष्णमूर्ति के पास अपने आप के लिए समय नहीं था.

वो खुद ही बताती हैं, 'मैं अपनी गायकी में इस कदर खोती चली गई कि मुझे किसी चीज की कमी महसूस नहीं होती थी. मुझे कुत्तों से बहुत प्यार है. काम से लौटकर जब घर आती थी तो अपने कुत्तों के साथ खेलती थी. मैंने शादी की चिंता तक नहीं की थी. मैंने तय कर लिया था कि मुझे शादी नहीं करनी है. मैं सोचती थी कि ऐसे गाते-गाते ही मेरा जीवन निकल जाएगा.'

लेकिन तकदीर को कुछ और ही मंजूर था. भगवान ने कविता कृष्णमूर्ति के जीवन में किसी और के आने का रास्ता सोच रखा था. इसे भगवान की इच्छा ही कहा जा सकता है क्योंकि आने वाले दिनों में कविता कृष्णमूर्ति की जिंदगी में जो कुछ हुआ वो उन्होंने कभी सोचा तक नहीं था.

हुआ यूं कि एक दिन कविता कृष्णमूर्ति के पास फोन आया कि जाने माने वायलिन प्लेयर डॉ. एल सुब्रमनियम एक फिल्म कर रहे हैं. वो चाहते हैं कि कविता कृष्णमूर्ति और हरिहरन साथ में एक गाना गाएं. कविता कृष्णमूर्ति ने तारीख नोट कर ली. इसके बाद की कहानी कविता खुद बताती हैं, 'ये उस समय की बात है जब डॉ. एल सुब्रमनियम की पत्नी का निधन हो गया था. मैं उनकी पत्नी विजी शंकर को भी जानती थी. वो लक्ष्मी शंकर जी की बेटी थीं. हम लोग एक ही कॉलेज में पढ़े भी थे. वो मुझसे सीनियर थीं. मुझे पता था कि विजी कैंसर से गुजर गई हैं. ये उनके जाने के करीब चार साल बाद की बात है. खैर, तय तारीख पर मैं स्टूडियो में डॉ. सुब्रमनियम से मिली. मैंने अपनी सांत्वना प्रकट की. उनके बच्चों के बारे में पूछा. डॉ. सुब्रमनियम मुझसे कहने लगे कि वो उनकी जिंदगी का एक दुखद पहलू है. इसी वजह से वो अमेरिका से भारत शिफ्ट हो गए हैं. बच्चों को भी लेकर बेंगलुरु आ गए हैं. मैंने पाया कि वो एक बेहद शांत इंसान हैं.'

ये एक शिष्टाचार भेंट भर थी. फिर गाना शुरू हुआ. उस गाने की एक लाइन पर बात फंस गई. डॉ. एल सुब्रमनियम ने उस एक लाइन को कविता कृष्णमूर्ति से 19 बार गंवाया. उस वक्त तक कविता कृष्णमूर्ति प्लेबैक सिंगिग में काफी ‘मेच्योर’ हो चुकी थीं. अमूमन वो एक या दो टेक में गाना ओके कर देती थीं. खैर, डॉ. एल सुब्रमनियम के कहने पर उन्होंने वो लाइन 19 बार गाई.

kavita krishnamurti

अपने परिवार के साथ कविता कृष्णमूर्ति ( तस्वीर फेसबुक से साभार )

इस रिकॉर्डिंग के बाद भी कविता कृष्णमूर्ति और डॉ. एल सुब्रमनियम की मुलाकात होती रही. कुछ दिनों बाद कविता डॉ. एल सुब्रमनियम के साथ एक और रिकॉर्डिंग के सिलसिले में बेंगलुरु भी गईं. ऐसा इसलिए क्योंकि डॉ. एल सुब्रमनियम का पूरा रिकॉर्डिंग सिस्टम वहीं पर था. कविता कृष्णमूर्ति उस दिन को याद करती हैं, 'वहां मेरी मुलाकात डॉ. एल सुब्रमनियम के बच्चों से हुई. छोटा बेटा अंबी तब 7 साल का था. बेटी 13 साल की थी. उसी दौरान हम लोगों ने 3-4 प्रोजेक्ट्स जल्दी जल्दी साथ में किए. इस वजह से डॉ. एल सुब्रमनियम से मुलाकात होती थी. उनके बच्चों से मुलाकात होती थी. पहली बार मुझे लगा कि वो मेरे लिए एक अच्छे इंसान हैं. उनके साथ जिंदगी बिताना अच्छा होगा. फिर एक रोज हमने शादी का फैसला किया.'

शादी के फैसले की बात तो ठीक थी. लेकिन जब ये फैसला घरवालों ने सुना तो सब डर गए. उन लोगों का डर ये था कि कविता एक सफल प्लबैक गायिका बन चुकी थीं. ऐसे में अगर वो एक ऐसे इंसान से शादी करेंगी जिसके पहले से तीन बच्चे हैं तो कविता का क्या होगा! उनका डर ये भी था कि कविता को मुंबई छोड़कर बेंगलुरु जाना पड़ेगा. फिर कविता ने ही उन्हें समझाया कि जब इतने साल तक उनका शादी का मन नहीं किया और अब किया है तो निश्चित तौर पर ये उनकी किस्मत में लिखा है.

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इसके बाद फटाफट दोनों की शादी हो गई. कविता कृष्णमूर्ति कहती हैं, 'इसके बाद मेरा संगीत बदल गया. मेरा नजरिया बदल गया. उन्होंने जो भी संगीत किया है, वो अपने लिए किया है पैसे और शोहरत के लिए नहीं. उन्हें मेरा गाना निंबूडा- निंबूडा बहुत पसंद है. उनके बच्चे शादी के तुरंत बाद मुझे मां बुलाने लगे. जो प्यार मुझे बच्चों से मिला वो अद्भुत है. मुझे रेडीमेड फैमिली मिल गई.'

डॉ. एल सुब्रमनियम के मुकाबले हिंदुस्तान में भले ही कविता कृष्णमूर्ति को ज्यादा लोग जानते हैं लेकिन भारत के बाहर कविता कृष्णमूर्ति की अलग पहचान है कि वो डॉ. एल सुब्रमनियम की पत्नी हैं.

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