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डबिंग और स्टेज आर्टिस्ट शारदा कैसे बनीं कविता कृष्णमूर्ति

कविता कृष्णमूर्ति के जन्मदिन पर खास

Updated On: Jan 25, 2019 08:18 AM IST

Shivendra Kumar Singh Shivendra Kumar Singh

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डबिंग और स्टेज आर्टिस्ट शारदा कैसे बनीं कविता कृष्णमूर्ति

फिल्म-1942 ए लव स्टोरी का गाना क्यों नए लग रहे हैं ये धरती गगन, फिल्म-खामोशी का आज मैं ऊपर, आसमान नीचे, फिल्म-हम दिल दे चुके सनम का टाइटल सॉन्ग और निंबूड़ा, फिल्म- याराना का मेरा पिया घर आया, फिल्म- देवदास का डोला रे डोला रे...इन सारे हिट गानों में और ऐसे दर्जनों और लोकप्रिय गानों में आवाज का जादू देने वाली कलाकार को हम कविता कृष्णमूर्ति के नाम से जानते हैं. लेकिन कम ही लोग जानते हैं कि ये नाम उन्हें उनके माता पिता से नहीं बल्कि मन्ना डे, हेमंत कुमार और संगीतकार लक्ष्मीकान्त जैसे दिग्गज कलाकारों की वजह से मिला.

इसमें सबसे बड़ा रोल हेमंत कुमार का था. दरअसल कविता कृष्णमूर्ति का असली नाम है शारदा कृष्णमूर्ति. वो शारदा के नाम से ही इन दिग्गज कलाकारों के साथ स्टेज शो किया करती थीं. उन दिनों शारदा नाम की एक और गायिका हुआ करती थीं. उनका नाम था शारदा राजन. उनका एक गाना अच्छा हिट हुआ था. जिसके बोल थे-तितली उड़ी.

शारदा कृष्णमूर्ति जब भी स्टेज शो करतीं उनसे इस गाने की फरमाइश होती. उन्हें बार-बार ये बताना पड़ता कि वो शारदा राजन नहीं बल्कि शारदा कृष्णमूर्ति हैं. आखिर में एक दिन हेमंत कुमार ने शारदा कृष्णमूर्ति को समझाया कि इस गफलत से बचने के लिए अब नाम बदलने में ही भलाई है. उसी समय झटपट शारदा की मां और इन लोगों ने नया नाम रखा- कविता. शारदा कृष्ममूर्ति कविता कृष्णमूर्ति बन गईं. आज उन्हीं कविता कृष्णमूर्ति का जन्मदिन है.

खैर, ये वो दौर था जब फिल्म इंडस्ट्री में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, हेमंत कुमार और मन्ना डे जैसे कलाकारों का जलवा था. सब के सब एक से बढ़कर एक काबिल कलाकार थे. ये सभी लोग कविता कृष्णमूर्ति को बेटी की तरह मानते भी थे. कविता कृष्णमूर्ति को वो दिन आज भी याद है जब उनके पास मन्ना डे के घर से फोन आया था. मन्ना डे के साथ ढोलक बजाने वाले कलाकार का नाम था- श्याम राव. कविता कृष्णमूर्ति को श्याम राव ने ही फोन किया था. उन्होंने कविता जी से कहा कि मन्ना दा का सूरत में एक शो है. उन्होंने कहा है कि कविता को ट्रेन का टिकट दो और बोलो कि वो सूरत आ जाए.

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कविता कृष्णमूर्ति सूरत पहुंचीं. कुछ खाने पीने के बाद जब वो मन्ना दा से मिलने गईं तो वो रियाज कर रहे थे. मन्ना दा का रियाज सुनकर कविता कृष्णमूर्ति के पैर ठिठक गए. वो मंत्रमुग्ध थीं. उन्हें इस बात का भी ख्याल नहीं था कि वो मन्ना दा का गाना सुनने नहीं बल्कि उनसे मिलने आई हैं. जब मन्ना दा ने उन्हें देखा तो अंदर बुलाया और सीधे पूछा-मेरे साथ ड्यूएट गाओगी. कविता कृष्णमूर्ति पहले से ही कुछ ड्यूएट गाने तैयार करके गई थीं. जिसमें ये रात भीगी भीगी और आजा सनम मधुर चांदनी में हम जैसे लोकप्रिय गाने शामिल थे.

मन्ना दा के साथ शाम तो कविता कृष्णमूर्ति का शो हुआ. मन्ना डे ने पहला ही गाना गाया- ये रात भीगी भीगी. गायकी के लिहाज से ये एक मुश्किल गाना था. कविता कृष्णमूर्ति ने डरते डरते मन्ना दा के साथ वो गाना निभाया. उस कार्यक्रम में कविता कृष्णमूर्ति ने लता और आशा जी के गाए गाने भी सुनाए. उस रोज के कार्यक्रम का नतीजा ये था कि फिर कविता कृष्णमूर्ति ने 18 साल तक मन्ना डे के साथ स्टेज शो किया.

मन्ना डे के साथ सिलसिला शुरू हुआ तो बस बढ़ता ही चला गया. स्वर्गीय गायक मुकेश के बेटे नितिन मुकेश कॉलेज में कविता कृष्णमूर्ति के सीनियर थे. उन्होंने कविता की मुलाकात मुकेश से कराई. लिहाजा जल्दी ही कविता कृष्णमूर्ति मुकेश के साथ भी स्टेज शो करने लगीं. उन्होंने तलत महमूद और महेंद्र कपूर के साथ भी कुछ शो किए. बाद में कविता कृष्णमूर्ति ने प्लेबैक गायकी में बहुत इज्जत कमाई है. उनकी गायकी में वो परिपक्वता और साधना दिखाई देती है जो एक मंझे हुए कलाकार में होनी चाहिए. जिसके पीछे है उनकी बचपन की मेहनत.

आज भले ही कविता कृष्णमूर्ति प्लेबैक गायकी से लगभग दूर हो चुकी हैं लेकिन वो दौर भी था जब उन्होंने कामयाबी के नए मुकाम हासिल किए. जिसकी शुरुआत 70 के दशक के आखिरी सालों में हुई थी. तब तक कविता कृष्णमूर्ति को फिल्म इंडस्ट्री में काम मिलना तो शुरू हो गया था लेकिन डबिंग आर्टिस्ट्स का. मशहूर अभिनेत्री हेमा मालिनी की मां ने कविता कृष्णमूर्ति को कई बड़े संगीतकारों से मिलवाया था.

डबिंग के काम का मिलना इसी पहचान का नतीजा था. वो काफी समय तक लता मंगेशकर के गाए गानों की डबिंग करती थीं. यानि होता ये था कि हीरोइन को शूटिंग के समय गाने के वक्त एक आवाज की जरूरत होती थी वो आवाज कविता कृष्णमूर्ति की होती थी. बाद में वो गाना लता मंगेशकर की आवाज में रिकॉर्ड किया जाता था. बाद में एक स्वतंत्र गायक के तौर पर भी कविता कृष्णमूर्ति ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बनाई.

डबिंग के काम की शुरुआत का किस्सा दिलचस्प है. हुआ यूं कि एक रोज लक्ष्मीकांत जी ने कविता कृष्णमूर्ति को अपने स्टूडियो मे बुलाया था. उन्होंने कविता कृष्णमूर्ति को बुलाने की वजह भी खुलकर बताई. साथ ही कविता कृष्णमूर्ति से पूछा भी कि उन्हें लता जी के गाने डब करने में कोई ऐतराज तो नहीं है. दरअसल कलाकारों को हमेशा इस बात का डर रहता है कि जरूरत से ज्यादा डबिंग करने पर कहीं उनकी अपनी पहचान बन ही ना पाए. हालांकि कविता कृष्णमूर्ति के साथ दिलचस्प बात ये थी कि वो इससे पहले लता जी के साथ एक गाने का कुछ हिस्सा रिकॉर्ड कर चुकी थीं.

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लता मंगेशकर उनके लिए भगवान जैसी थीं. लिहाजा उन्होंने तुरंत इस बात के लिए हामी भर दी. धीरे-धीरे जब डबिंग के लिए उनकी आवाज का इस्तेमाल ज्यादा होने लगा तो उन्होंने एक बार आरडी बर्मन से कहा भी कि अगर वो हमेशा डबिंग की करती रहेंगी तो उनकी अपनी पहचान कैसे बनेगी? इस पर पंचम दा ने उनसे कहा कि वो बेफिक्र रहें जल्दी ही वो उन्हें एक बड़ी फिल्म का गाना देंगे. वो बड़ी फिल्म थी 1942 ए लव स्टोरी. अफसोस, इस फिल्म के संगीत की कामयाबी को देखने के लिए पंचम दा तो नहीं रहे लेकिन फिल्म इंडस्ट्री को एक शानदार गायिका जरूर मिल गईं.

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