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भारत की पहली महिला डॉक्टर न होकर भी महान हैं कादंबिनी गांगुली

कादंबिनी गांगुली को प्रैक्टिस करने के चलते वेश्या तक कहा गया

Updated On: Oct 03, 2017 07:39 PM IST

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee

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भारत की पहली महिला डॉक्टर न होकर भी महान हैं कादंबिनी गांगुली

साल 1886 में महात्मा गांधी काठियावाड़ में किशोरावस्था के दिन गुजार रहे थे. युवा नरेंद्र अपने गुरु रामकृष्ण परमहंस की मृत्यु से उबरने की कोशिश में थे. तब बिहार के भागलपुर की एक लड़की मेडिकल साइंस की तीन एडवांस डिग्री लेकर हिंदुस्तान के इतिहास में अपना नाम बनाने जा रही थी.

कादंबिनी गांगुली देश की पहली महिला ग्रेजुएट थीं. इससे पहले 1878 में कादंबिनी कलकत्ता यूनिवर्सिटी का एंट्रेस एग्जाम पास करने वाली पहली लड़की भी बन चुकी थीं. ज्यादातर लोग उन्हें देश की पहली महिला डॉक्टर भी मान लेते हैं. मगर इसमें एक छोटा सा पेंच है.

1986 में जब कादंबिनी गांगुली कोलकाता यूनिवर्सिटी से डॉक्टर बन कर पास हो रही थीं तो उससे कुछ ही पहले 1886 में ही आनंदीबेन जोशी अमेरिका के पेंसिलवेनिया जाकर डॉक्टर बन चुकी थीं. डिग्री लेने के छह महीने के बाद ही भारत की पहली महिला डॉ जोशी की मृत्यु हो गई. कादंबिनी का कद इस बात से कतई छोटा नहीं होता.

वो भले ही डिग्री लेने वाली भारत की पहली महिला डॉक्टर न हों. मगर वो पहली प्रैक्टिश्नर भी हैं, भारत की पहली वर्किंग मॉम भी हैं और कांग्रेस के पहले अधिवेशन में भाषण देने वाली महिला भी हैं.

डॉक्टर आनंदीबाई जोशी

डॉक्टर आनंदीबाई जोशी

ब्रम्ह समाज को मानने वाली कादंबिनी ने 21 साल की उम्र में 39 साल के विधुर द्वारिका नाथ गांगुली से शादी की. अपने तीन बच्चों के साथ-साथ 5 सौतेले बच्चों को भी संभाला. उनके खुशहाल दांपत्य जीवन का जिक्र कई जगह मिलता है. कादंबिनी जब यूरोप से मेडिकल साइंस की पढ़ाई कर रही थीं उस समय एक या दो बच्चों की मां बन चुकी थी. मशहूर फ्लोरेंस नाइटेंगल इस बात से बहुत आश्चर्यचकित थीं. उन्होंने अपनी एक दोस्त को खत लिख कर इस बात का जिक्र भी किया था.

मगर ऐसा भी नहीं है कि कादंबिनी की इस पढ़ाई लिखाई के सब कायल ही थे. उस दौर में समुद्र की यात्रा करने पर धर्म से बाहर मान लिया जाता था. ऊपर से ‘भले घरों’ की लड़िकयां स्कूल कॉलेज जाकर पढ़ती-लिखती नहीं थीं. ऐसे में कादंबिनी शादीशुदा बच्चों की मां होकर विदेश पढ़ने जा रही थीं. वो भी तब जब उनके पास पहले से दो कॉलेज डिग्रियां थीं.

कई पुराथनपंथी लोगों ने उन पर कीचड़ उछालना शुरू किया. कुछ पत्रिकाओं ने उनको वेश्या करार देते हुए लेख छापे. कादंबिनी ने कइयों के खिलाफ मुकदमा भी किया और जीता भी. वैसे 3 अक्टूबर 1923 को दुनिया से गईं कादंबिनी गांगुली को गुजरे हुए जल्द ही सौ साल हो जाएंगे, मगर इन सौ सालों में कामकाजी महिलाओं के प्रति हमारे समाज की सोच में कितना फर्क आया है, हम खुद देख सकते हैं.

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