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जूलियन असांज: दस्तावेजों के सौदागर की सक्रियता की आज बहुत जरूरत है

1995 में असांज और उनका दोस्त हैकिंग के करीब एक दर्जन मामलों में आरोपी बना और दोषी ठहराया गया

Piyush Pandey Updated On: Jul 03, 2017 01:02 PM IST

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जूलियन असांज: दस्तावेजों के सौदागर की सक्रियता की आज बहुत जरूरत है

सनसनीखेज पत्रकारिता को नई धार देने वाली वेबसाइट विकिलीक्स के संस्थापक जूलियन असांज का सोमवार को जन्मदिन है. उनका यह जन्मदिन भी ब्रिटेन में इक्वाडोर के दूतावास के भीतर ही मनेगा क्योंकि असांज वहीं राजनीतिक शरण लिए हुए हैं. हालांकि, स्वीडन में उनके खिलाफ जारी बलात्कार और यौन शोषण का मुकदमा एक पखवाड़े पहले ही वापस ले लिया गया है लेकिन ब्रिटेन की पुलिस अभी भी उनके पीछे है.

ब्रिटेन की पुलिस का कहना है कि असांज ने तय तारीख पर कोर्ट में न पहुंचकर कानून का उल्लंघन किया है, लिहाजा उस मामले में उनकी गिरफ्तारी हो सकती है.

असांज के विरोधी भी कम नहीं है

बीते 5 साल से जूलियन असांज अपनी व्यक्तिगत परेशानियों से जूझ रहे हैं, और जिस खोजी पत्रकारिता की मशाल उन्होंने जलाई थी- वो लगभग बुझ गई है. असांज ने ऐसे दस्तावजों में झांका कि पूरी दुनिया की सरकारों का काला चेहरा सामने आया. दुनिया भर की कई सरकारों को अपने खुलासों से मुंह छिपाने को मजबूर कर देने वाली उनकी साइट विकिलीक्स उनके सक्रिय रहते हुए भी आर्थिक तंगी से जूझ रही थी, लेकिन असांज के राजनीतिक शरण लेने के बाद तो विकिलीक्स ने प्रकाशन का काम लगभग रोक दिया है.

तो क्या अपने जन्मदिन पर असांज फिर प्रण लेंगे कि वो विकिलीक्स को नई धार देने की कोशिश करेंगे? इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है. लेकिन असांज के करोड़ों प्रशंसक ऐसा चाहते हैं. क्योंकि असांज का चरित्र ही ऐसा है.

WikiLeaks founder Julian Assange has a drink of water during a news conference at the Ecuadorian embassy in London

ऑस्ट्रेलिया में जन्मे असांज को उनके चाहने वाले सत्य का सबसे बड़ा समर्थक मानते हैं तो विरोधी सस्ती लोकप्रियता की चाह रखने वाला, जो संवेदनशील जानकारियां लीक कर हजारों लोगों की जिंदगी दांव पर लगाने से नहीं हिचकता. वैसे, देखा जाए तो असांज की जिंदगी ही खासी संघर्षशाली रही, और हर संघर्ष के बाद वो जीतकर आया.

महज 18 साल की उम्र में पिता बनने पर विवाद हुआ तो उससे उबरा. फिर हैंकिंग के मामले में कानूनी पचड़ों में फंसा. 1995 में असांज और उनका दोस्त हैकिंग के करीब एक दर्जन मामलों में आरोपी बना और दोषी ठहराया गया. असांज पर कई हजार डॉलर का जुर्माना लगा और जेल की सजा से इस शर्त पर माफी मिली कि वो दोबारा ऐसी हरकत नहीं करेगा.

फिर इंटरनेट के विध्वंसकारी पक्ष पर शोध करने वाली अकादमिक शख्स सुलेट ड्रेफस के साथ असांज ने तीन साल गुजारे. उनके साथ मिलकर एक किताब लिखी- जो उस वक्त बेस्टसैलर में शुमार हुई. ड्रेफस ने एक इंटरव्यू में कहा था- असांज बहुत जानकार रिसर्चर था, जो नैतिकता के सिद्धांत, न्याय के सिद्धांत और सरकार को क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए, के विषय में बहुत दिलचस्पी रखता था.

मेलबर्न यूनिवर्सिटी से गणित और फिजिक्स में कोर्स करने के दौरान ही विकिलीक्स का आइडिया पनपा और फिर कुछ समान विचारधारा वाले लोगों के साथ 2006 में विकिलीक्स की शुरुआत हुई.

आर्थिक हालत कमजोर होने से हिली विकिलीक्सी की नींव

विकिलीक्स आदर्श पत्रकारिता का विकल्प भले कभी न बनी हो, लेकिन इसने खोजी पत्रकारिता के महत्व को नए सिरे से गढ़ा. 2007 नवंबर में अमेरिका की कुख्यात गुआंतनामो जेल के अमानवीय हालात के बारे में एक आधिकारिक रिपोर्ट लीक करने से लेकर अफगानिस्तान और इराक युद्ध के बर्बर हालात से जुड़े हजारों गुप्त दस्तावेजों को सार्वजनिक करने तक कई कारनामे विकिलीक्स के नाम दर्ज हैं.

लेकिन, विकिलीक्स के लिए मुसीबतों का दौर नवंबर 2010 में आरंभ हुआ, जब साइट ने अमेरिकी कूटनीतिकों के दुनिया भर के अधिकारियों के साथ हुए पत्र व्यवहार और अन्य गोपनीय दस्तावेजों का प्रकाशन किया. लोकतांत्रिक मूल्यों की दुहाई देने वाली अमेरिकी सरकार गोपनीय दस्तावेजों से हुए खुलासों से इस कदर असहज हुई कि उसने विकिलीक्स के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

सबसे पहले 1 दिसंबर 2010 को राष्ट्रीय सुरक्षा पर अमेरिकी सीनेट कमेटी के चेयरमैन जो लिबरमैन के फोन के बाद अमेजन ने विकिलीक्स को अपने सर्वर से हटा दिया. यानी अमेरिका में साइट खुलना बंद हो गई. इसके बाद लिबरमैन ने विकिलीक्स से संबंध रखने वाली तमाम कंपनियों को संबंध स्थगित करने का आदेश जारी कर दिया.

3 दिसंबर 2010 को ऑनलाइन पेमेंट साइट पेपॉल ने विकिलीक्स के खाते सील कर दिए. फिर, मास्टर कार्ड, बैंक ऑफ अमेरिका और वेर्स्टन यूनियन ने भी विकिलीक्स से संबंध तोड़ लिए. अमेरिकी सरकार के दबाव का आलम यह था कि एप्पल ने विकिलीक्स के लीक केबल्स को मोबाइल फोन पर दिखाने वाली एप्लीकेशन को लॉन्च करने के चार दिन बाद ही अपने स्टोर से हटा लिया.इस एप्लीकेशन की कीमत1.99 डॉलर थी और महज तीन दिनों के भीतर 1000 डॉलर की एप्लीकेशन बिक चुकी थी.

इसी तरह यूरोप में वीजा और मास्टरकार्ड ने विकिलीक्स से अपने रिश्ते खत्म कर लिए. नतीजा विकिलीक्स की आर्थिक हालत जर्जर हो गई.

रही सही कसर असांज पर बलात्कार और यौन शौषण के आरोपों ने पूरी कर दी. असांज ने बहुत कहा कि आरोप लगाने वाली महिला से उनके सहमति से संबंध थे लेकिन पुलिस पर भारी दबाव था कि असांज को गिरफ्तार किया जाए. असांज को डर था कि स्वीडन पुलिस ने एक बार उन्हें गिरफ्तार कर लिया तो उन्हें अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया जाएगा, जहां उन पर सरकारी दस्तावेज लीक करने का मुकदमा चलेगा और सजा होगी. नतीजा असांज ने ब्रिटेन पहुंचकर इक्वाडोर दूतावास में राजनीतिक शरण ले ली.

Wikileaks founder Julian Assange leaves the Supreme Court in London

कोई भी गोपनीय दस्तावेज विकिलीक्स को भेज सकता था

असांज की निष्क्रियता अमेरिका समेत तमाम देशों के लिए राहत की खबर है, क्योंकि जिस तरह दुनिया के तमाम देशों के सरकारी दस्तावेजों में झांकते हुए असांज ने काली सच्चाई को बाहर लाया- उसने कई देशों की सरकारों को परेशान किया. लेकिन सवाल असांज की निष्क्रियता का नहीं, सवाल यह है कि किसी बिनी किसी सरकारी और कॉरपोरेट मदद के विकिलीक्स जैसी साइट नहीं चल सकती?

क्या विकिलीक्स जैसी साइट को खोजी पत्रकारिता के इतने समर्थक नहीं मिल सकते, जिनके दान के बूते साइट चल सके. या सच यह है कि दुनिया की सरकारें अपनी करतूतों का इतना गंदा खेल खेल रही हैं कि विकिलीक्स जैसी कोई साइट उन्हें मंजूर ही नहीं, जो सरकारों की पूरी पोल पट्टी खोलकर दुनिया के सामने रख दें.

याद कीजिए विकिलीक्स ने ही अमेरिका के प्रिज्म प्रोग्राम का खुलासा किया था. इस खुलासे के बाद जूलियन असांज ने रशियन टुडे को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि फेसबुक अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन जासूसी मशीन है.

असांज ने कहा था, 'सिर्फ फेसबुक ही नहीं, बल्कि गूगल और याहू जैसी तमाम बड़ी कंपनियों ने अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के लिए ‘बिल्ट-इन इंटरफेस’ निर्मित कर दिए हैं.'

साल 2011 में अमेरिकी कंज्यूमर वॉचडॉग ने लॉस्ट इन द क्लाउड: गूगल एंड द यूएस गवर्नमेंट नाम से एक रिपोर्ट जारी कर कहा था कि गूगल एनएसए के साथ 'अनुचित खुफिया रिश्ते' निभा रहा है और इसका लाभ उसे मिल रहा है.

गौरतलब है कि विकिलीक्स को कोई भी शख्स गोपनीय दस्तावेज भेज सकता था. गोपनीय दस्तावेज भेजने वालों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती थी.

विकिलीक्स उन महत्वपूर्ण दस्तावेजों को सामने लाने की कोशिश करती थी, जिन्हें दुनिया भर की सरकारें छिपाती फिरती हैं. लेकिन, असांज से गलती यही हो गई कि उसने संचालन का वैकल्पिक ढांचा खड़ा नहीं किया. जाहिर है विकिलीक्स की सक्रियता की कमी बहुत खल रही है.

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