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क्या आज के दौर में पूरी तरह से शाकाहारी होना मुमकिन है?

कई लोग उन रेस्टोरेंट तक में नहीं खाते, जहां मांसाहारी खाना परोसा जाता है. लेकिन हम अक्सर अनजाने में मांसाहारी चीजों का इस्तेमाल करते रहते हैं.

Updated On: Mar 13, 2018 04:11 PM IST

Maneka Gandhi Maneka Gandhi

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क्या आज के दौर में पूरी तरह से शाकाहारी होना मुमकिन है?

क्या आज के दौर में पूरी तरह से शाकाहारी होना मुमकिन है? ये सवाल मैंने खुद से पूछा था, जब मैंने एक एयरलाइन के खाने में से टूथपिक उठाई थी. सवाल इसलिए क्योंकि आज पूरी दुनिया ऐसे मांसाहारी खान-पान पर निर्भर हो चुकी है, जिन्हें खाने का कोई फायदा ही नहीं. जिंदगी से लबरेज, सांस लेता हुआ, हजारों दूसरे जीवों का घर बने पेड़ को मेरे दांत साफ करने लिए काट डाला गया. ये सोचकर ही घिन आती है.

हर शाकाहारी इंसान खाना खाने से पहले ये चेक करता है कि कहीं उसके खाने में कुछ मांसाहारी तो नहीं. कई लोग तो उन रेस्टोरेंट तक में नहीं खाते, जहां मांसाहारी खाना परोसा जाता है. लेकिन हम अक्सर अनजाने में मांसाहारी चीजों का इस्तेमाल करते रहते हैं. हमें पता ही नहीं होता कि हम ऐसा कर रहे हैं. मसलन वनरस नाम की एक कंपनी अपनी सभी तश्तरियों के नीचे की तरफ शुद्ध शाकाहारी लिखती है. वहीं बोन चाइना की प्लेट में ऐसा कुछ नहीं लिखा होता (जबकि वो हड्डियों से बनी होती हैं!) कभी आपने सोचा कि आप को अपनी शैंपू की बोतल में भी चेक करनी चाहिए कि वो 100 प्रतिशत शुद्ध शाकाहारी हैं कि नहीं?

हमारी रोजमर्रा के इस्तेमाल की चीजों में अक्सर जानवरों के अंगों और ग्रंथियां मिलते हैं. इनमें एंडोक्राइन ग्रंथि, भेजा, जिगर, फेफड़े, पीयूष ग्रंथि, अग्नाशय , गुर्दे, अंडाशय, आंतें शामिल हैं. जानवरों के भेजे, तंत्रिका तंत्र और रीढ़ की तंत्रिका से कोलेस्ट्रॉल मिलता है. इन्हें कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को गाढ़ा करने के काम में लाया जाता है. साथ ही कोलेस्ट्रॉल से विटामिन D3 को भी निकाला जाता है.

गायों और सुअर के पाचन तंत्र से निकाला गया ड्यूोडिनम नाम का तत्व विटामिन की गोलियों और कई दूसरी दवाओं में भी मिलाया जाता है. गर्भवती सुअरों के अंडाशय से प्रोजेस्टेरॉन और एस्ट्रोजेन नाम के हारमोन निकालकर महिलाओं की गर्भ धारण की बीमारियों का इलाज किया जाता है.

फोटो. विकीमीडिया

सर्जरी के दौरान खून पतला करने और उसे जमने से रोकने में इस्तेमाल होने वाला हिपैरिन सुअरों और दूसरे जानवरों के जिगर, आंतों और फेफड़ों की अंदरूनी परत से निकाला जाता है. डायबिटीज के इंजेक्शन के लिए इस्तेमाल होने वाला इंसुलिन, सुअरों और जानवरों के अग्न्याशय से निकाला जाता है.

डायबिटीज फोरकास्ट पत्रिका के मुताबिक 8 आउंस इंसुलिन निकालने के लिए सुअरों के दो टन अग्न्याशय की जरूरत होती है. प्रेड्निसोन और कॉर्टिसोन नाम के केमिकल जानवरो के पित्त से निकाले जाते हैं. गायों और सुअरों के जिगर को काटकर उसे एसिड वाले गर्म पानी में खौलाया जाता है.

इससे निकलने वाले तत्व को विटामिन B12 और दूसरे सप्लीमेंट बनाने में दवा कंपनियां इस्तेमाल करती हैं. अग्न्याशय से निकलने वाले ग्लूकोजेन का इस्तेमाल शराब पीने वालों के खून में शुगर की मात्रा बढ़ाने के लिए होता है.

नींद न आने की समस्या दूर करने में इस्तेमाल होने वाला मेलाटोनिन भी जानवरों के शरीर से ही निकाला जाता है. गाय-भैंसों और सुअर से मिला पित्त को या तो सुखाकर या लिक्विड रूप में ही बेचा जाता है. इसका इस्तेमाल अपच, कब्ज और जिगर की बीमारियों के इलाज में होता है.

एनिमल प्रोडक्ट की फेहरिस्त बहुत लंबी है. एड्रीनेलिन नाम का हारमोन, सुअरों, जानवरों और भेड़ों की एड्रिनल ग्रंथि से निकाला जाता है. हायल्यूरोनिक एसिड का इस्तेमाल कॉस्मेटिक बनाने में होता है. ये जानवरों की हड्डियों के जोड़ों को मुलायम रखने वाले द्रव से निकाला जाता है.

यहां तक कि इत्र उद्योग में भी जानवरों के अंगो का इस्तेमाल होता है. महंगे परफ्यूम बनाने में इस्तेमाल होने वाला मस्क या कस्तूरी, हिमालय में रहने वाले कस्तूरी हिरन की ग्रंथि से निकाला जाता है. इसके लिए हिरन को मारा जाता है. फिर सूखी हुई ग्रंथि को काटकर उसे अल्कोहल में भिगोया जाता है. कास्टोरियम नाम का एक पेस्ट ऊदबिलाव की पूंछ और कमर के बीच पायी जाने वाली ग्रंथि से निकाला जाता है. इत्र उद्योग में कास्टोरियम का इस्तेमाल चमड़े में खुशबू लाने के लिए किया जाता है. या फिर लेदर की थीम वाले परफ्यूम में इसका इस्तेमाल होता है. तो, जब आपकी मर्सिडीज कार की अंदरूनी सजावट खुशबूदार हो, तो ये जान लीजिए कि उस खुशबू के लिए ऊदबिलाव को मारा गया है.

अफ्रीकी सिवेट बिल्ली की गुदा के पास पाई जाने वाली ग्रंथि से खुशबूदार केमिकल निकलता है. बिल्ली ये केमिकल तब छोड़ती है, जब उसे बुरी तरह पीटा जाता है. इस केमिकल को निकालने के लिए बिल्लियों को पिंजरों में कैद करके उन पर जुल्म ढाए जाते हैं. आज कल सिवेट पेस्ट यूरोप और अमेरिका में बहुत डिमांड में है.

इसे इथियोपिया में पाये जाने वाले जेबू नाम के जानवरों की सींगों से निकाला जाता है. हर सूखे सींग से आधा किलो तक पेस्ट निकलता है. बिल्ली से इतना ही सिवेट निकालने के लिए चार बरस का इंतजार करना पड़ेगा.

भारत में मैंने तिरुपति के पुजारियों को सिवेट बिल्लियों को कैद करके रखे हुए पकड़ा था. इन्हें पीट-पीटकर सिवेट पेस्ट निकाला जाता था. जिसे फिर 500 रुपए या उससे भी ज्यादा कीमत पर बेचा जाता था, ताकि वो उसे देवी को चढ़ा सकें.

परफ्यूम में इस्तेमाल होने वाला एंबरग्रिस स्पर्म व्हेल की आंतों से निकाला जाता है. हालांकि ये गैरकानूनी है. फिर भी बहुत सी व्हेलों को इसे निकालने के लिए मारा जाता है. कई मॉस्चराइजरों में सेरेब्रोसाइड और अराकिडोनिक एसिड होता है. सेरेब्रोसाइड जानवरों के दिमाग और तंत्रिका तंत्र में पाया जाने वाला एसिड होता है. इसी तरह अराकिडोनिक एसिड जानवरो के लिवर, भेजे और ग्रंथियों में पाया जाता है. इसका इस्तेमाल स्किन क्रीम बनाने में होता है. जानवरो की पेशियों से निकाला जाने वाला लेसिथिन लिपस्टिक, आई क्रीम, हैंड क्रीम, लोशन, साबुन, शैम्पू और दूसरे कॉस्मेटिक बनाने में इस्तेमाल होता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

इसी तरह, जानवरों के फैट से निकलने वाला ओलेइक एसिड, नेल पॉलिश, साबुन, क्रीम, लिपस्टिक, हेयर रिमूवर और दूसरे स्किन कॉस्मेटिक बनाने में प्रयोग होता है. आपने विज्ञापनों में सुना होगा कि बहुत से शैम्पू में केरेटिन और प्रोविटामिन B-5 होते हैं. ये दोनों ही चीजें जानवरों से मिलती हैं. केरेटिन को जानवरों की सींग, पंख, कलम और बालों से निकाला जाता है. ओलिल एल्कोहल को मछली से निकाला जाता है. इसका इस्तेमाल डिटर्जेंट बनाने में होता है और कपड़ों को मुलायम करने के लिए भी होता है.

स्क्वालीन के नाम से जाना जाने वाला शार्क लिवर ऑयल लुब्रिकेटिंग क्रीम, लोशन, लिप बाम, सनस्क्रीन और हेयर डाई बनाने में काम आता है. इसी तरहा मछलियों से निकाला जाने वाला कोलाजेन एंटी-एजिंग क्रीम और मास्क बनाने में काम आता है. जानवरों के बच्चे गर्भ में जिस झिल्ली में लिपटे रहते हैं, उससे भी स्किन क्रीम, शैम्पू और फेस मास्क बनाए जाते हैं.

केकड़ों से निकाला जाने वाला चिटोसान कॉस्मेटिक और दवा उद्योगों में संरक्षक के तौर पर इस्तेमाल होता है. भेंड़, बकरी या बछड़े के पेट से निकाला जाने वाला रेनेट, चीज बनाने के काम आता है. बछड़ों और भेड़ों की जीभ से निकाला जाने वाला लाइपेज भी इसी तरह कई कॉस्मेटिक बनाने में काम आता है. सुअर के पेट से निकाले जाने वाले पेप्सिन का भी यही इस्तेमाल होता है.

हम इस धरती पर जानवरों के शिकारी न बन जाएं इसके लिए जानकारी होनी बेहद जरूरी है. आम तौर पर जब किसी प्रोडक्ट के बारे में ये कहा जाता है कि वो कुदरती सोर्स से बना है, तो इसका मतलब ये होता है कि इसके कई केमिकल जानवरों से निकाले गए हैं.

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