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पार्ट 2: अब तक 8 बार मर चुका है बगदादी लेकिन असली मौत आज भी पहेली

साल 2003 में बगदादी इराक के समारा की एक मस्जिद में मौलवी था लेकिन अमेरिकी हमले के बाद बगदादी के भीतर बगवात सांस भर रही थी.

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Dec 13, 2017 10:00 PM IST

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पार्ट 2: अब तक 8 बार मर चुका है बगदादी लेकिन असली मौत आज भी पहेली

अबू बक्र अल बगदादी के कई नाम थे जैसे इब्राहिम अव्वाद इब्राहिम अली बद्री उर्फ अबू बकर अल बगदादी उर्फ इनविजिबल शेख उर्फ डॉ इब्राहिम. लेकिन पहचान सिर्फ एक थी. वो पहचान थी दुनिया के सबसे दुर्दांत आतंकी संगठन के सरगना की. तभी अमेरिका ने बगदादी के सिर पर करीब 164 करोड़ रुपये का ईनाम रखा है. लेकिन बगदादी का आजतक पता नहीं चल सका है.

उसकी मौत की खबरें आठ बार आ चुकी हैं. लेकिन एक भी खबर की पुष्टि कभी नहीं हो सकी. आज भी अमेरिका ये मानता है कि बगदादी जिंदा है और वो किसी न किसी रूप में इस्लामिक स्टेट के लिए किसी नए प्लान पर काम कर रहा है.

इसकी बड़ी वजह ये है कि बगदादी ने न सिर्फ इराक, सीरिया, साइप्रस, जॉर्डन, लेबनान, फिलिस्तीन और टर्की मिलाकर इस्लामिक अमीरात बनाने का सपना देखा बल्कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान पर कब्जा कर ‘द इस्लामिक स्टेट ऑफ खोरासान’ भी बनाना चाहता था. ऐसे मास्टरमाइंड के चुपचाप छिपे रहने पर कोई भरोसा नहीं कर सकता है. क्योंकि बगदादी ने जिस तरह से इस्लामिक स्टेट के साम्राज्य को खड़ा किया वो किसी के लिए भी समझ पाना इतना आसान नहीं है.

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इस्लामिक स्टेट को बगदादी किसी सीईओ की तरह चलाता था. किसी प्रोफेशनल कंपनी की तरह ही सारे कायदे कानून थे. बगावत करने वाले लड़ाकों या फिर जंग के मैदान से भागने वाले आतंकियों को बगदादी ऐसी मौत देता था जिससे किसी की भी रूह कांप जाए. बगदादी के अपने कानून इतने सख्त थे कि उनका पालन न करने वाले सैकड़ों सिर हर रोज ही कलम कर दिए जाते थे.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

बगदादी की एक दूसरी खासियत भी थी. उसकी सिर्फ एक ही तस्वीर दुनिया के सामने थी. वो कभी खुल कर सामने नहीं आता था. बस एक बार वो खुद को खलीफा घोषित करने के लिये सामने आया था. उसके बाद उसकी दहशत सिर्फ उसकी आवाज से महसूस की जाती थी और क्रूरता से भरे फैसलों लोगों की हत्याओं में दिखाई देते थे. किसी वक्त का एक मौलवी दुनिया के सबसे बड़े आतंकी संगठन का सरगना बन चुका था.

मौलवी से आईएस का सरगना कैसे बना बगदादी?

साल 2003 में बगदादी इराक के समारा की एक मस्जिद में मौलवी था लेकिन अमेरिकी हमले के बाद बगदादी के भीतर बगवात सांस भर रही थी. बगदादी को विद्रोह भड़काने के आरोप में दक्षिणी इराक के बक्का कैंप में चार साल तक जेल में रखा गया था. बक्का की बदनाम जेल में अलकायदा के कुख्यात आतंकवादी भी बंद थे. बगदादी की धार्मिक बातों और विद्रोहियों तेवरों के विरोधाभास ने जेल के आतंकियों का ध्यान अपनी तरफ खींचा.

अलकायदा के कई कमांडरों से बगदादी की नजदीकी बढ़ने लगी और इसी जेल से बगदादी उस इस्लामिक राज्य का ब्लू प्रिंट अपने जेहन में तैयार कर चुका था जिसे अंजाम देने के लिये वो जेल से छूटने के इंतजार में बेकरार था. साल 2010 में बगदादी की रिहाई की हुई. 16 मई 2010 को बगदादी ने आईएस की बतौर मुखिया कमान संभाली. इराक और सीरिया के शहरों पर कब्जों के बाद उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा.

बगदादी की धमकियां इराक और सीरिया से बाहर निकलने लगीं. बगदादी दुनिया पर हमलों की धमकी देने लगा. उसकी ताकत ही उसका गुरूर बन चुकी थी. लेकिन जब धीरे धीरे इस्लामिक स्टेट का खात्मा होना शुरू हुआ तो बगदादी की मौत की खबरों ने भी जोर पकड़ा.

बगदादी की मौत बनी पहेली

बीच में बगदादी की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी सामने आई लेकिन बगदादी का फिर कोई दूसरा वीडियो नहीं दिखाई दिया. पिछले काफी समय से बगदादी की मौत को लेकर तमाम अफवाहें और कयास लगाए गए. यहां तक कि रूसी सेना ने भी इसी साल जून में सीरिया के रक्का के पास बगदादी को मार गिराने का दावा किया था. उससे पहले सीरिया की सेना ने रक्का में बगदादी की मौत की खबर दी थी. जिस तरह उसकी जिंदगी रहस्यों से भरी हुई है उसी तरह उसकी मौत भी पहेली बन चुकी है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर

बगदादी से जुड़ी एक कहानी भी सामने आई थी. बताया जाता है कि बक्का की जेल से रिहाई के वक्त बगदादी ने अमेरिकी सैनिकों की आंखों में आंखें डाल कर कहा था – सी यू इन न्यूयॉर्क. बगदादी की इस धमकी पर अमेरिकी सैनिक हंस पड़े थे. लेकिन अब वो ही धमकी कभी फ्रांस और ब्रिटेन में आतंकी हमलों के रूप में दिखाई देती है तो टाइम्स स्क्वॉयर में हुए धमाके में बगदादी की याद दिलाता है. किसी फिल्म की तरह बगदादी की कहानी का ‘दी एंड’ अभी तक नहीं हुआ है और इस्लामिक स्टेट किसी सीक्वल की तरह अभी भी चल रहा है. वो लोगों की दहशत में है. लोगों की सोच में है.

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जो लोग इस्लामिक स्टेट के कहर से किसी तरह बचे हैं वो ये जानते हैं कि इसके आतंकियों ने रहम करना कभी नहीं सिखा है. अब फिलहाल इराक में बस ये राहत की बात होगी कि फिर से वो ही काले लिबास और नकाब वाले मौत के सौदागर जबरन किसी को घर से निकाल कर चौराहे पर सिर्फ वीडियो बनाने के लिये सिर नहीं कलम करेंगे. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि आखिर बगदादी है कहां?

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