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जानें आज का दिन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के तौर पर क्यों मनाया जाता है

मानवाधिकार वे मूलभूत नैसर्गिक अधिकार हैं जिनसे मनुष्य को नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता, धर्म, लिंग आदि के आधार पर वंचित या प्रताड़ित नहीं किया जा सकता

Updated On: Dec 10, 2018 02:34 PM IST

FP Staff

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जानें आज का दिन अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस के तौर पर क्यों मनाया जाता है

साल के हर दिन की तरह 10 दिसंबर का दिन भी कई घटनाओं के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज है. मानवाधिकारों की दृष्टि से इस तारीख का खास महत्व है क्योंकि 10 दिसंबर के दिन को ‘अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है.

संयुक्त राष्ट्र ने साल 1948 में इस दिन को मानवाधिकार दिवस घोषित किया था जिसका उद्देश्य विश्वभर के लोगों का ध्यान मानवाधिकारों की ओर आकर्षित करना था. भारत में 28 सितंबर 1993 को मानवाधिकार कानून बनाया गया. इसके बाद भारत सरकार ने 12 अक्टूबर 1993 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का गठन किया.

मानवाधिकार वे मूलभूत नैसर्गिक अधिकार हैं जिनसे मनुष्य को नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता, धर्म, लिंग आदि के आधार पर वंचित या प्रताड़ित नहीं किया जा सकता. इसके अनुसार सभी को स्वतंत्रता और समानता का अधिकार जन्मजात ही प्राप्त है और उसे छीनना या बाधा पहुंचाना मानवाधिकारों का हनन होता है.

जाति, लिंग, भाषा, रंग, राष्ट्रीयता भी मानवाधिकारों में बाधा नहीं पहुंचा सकते

मानवाधिकार में स्वास्थ्य, आर्थिक सामाजिक, और शिक्षा का अधिकार भी शामिल है. यह अधिकार मनुष्य को जन्मजात ही प्राप्त हैं इसके लिए जाति, लिंग, भाषा, रंग और राष्ट्रीयता भी बाधक नहीं हो सकते. मानवाधिकार की कोई आधिकारिक परिभाषा तो नहीं है. लेकिन तमाम राष्ट्र इसे अपने आधार पर परिभाषित करते है.

भारत में इसमें बाल मजदूरी, स्वास्थ्य, भोजन, बाल विवाह, महिला अधिकार अल्पसंख्यकों और अनुसुचित जाति-जनजाति के अधिकारों को भी शामिल किया गया है. इस बार का मानवाधिकार दिवस अपने सात दशक पूरे कर लेने के लिए भी बेहद खास है.

विश्वभर में लोगों पर हो रहे अत्याचार और उनके बुनियादी हकों को उन तक पहुंचने में बाधा पहुंचाने वालों के खिलाफ मानवाधिकारों और मानवाधिकारियों का विरोध काफी अहम रहा है. इससे उन पीड़ितों और शोषितों को उनके बुनियादी अधिकार मुहैय्या कराने में मदद पहुंचाई जाती है.

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