S M L

लता दी, आशा ताई के समय फिल्मफेयर अवॉर्ड की हैट्रिक लगाने वाली अनुराधा पौडवाल को हैप्पी बर्थडे

आज आधुनिक संगीत के दौर में भी अनुराधा पौडवाल के गाए कई गाने रीमिक्स किए जा रहे हैं. जो उनके गाए गानों की लोकप्रियता पर एक बड़ी मोहर है

Updated On: Oct 27, 2018 09:07 AM IST

Shivendra Kumar Singh Shivendra Kumar Singh

0
लता दी, आशा ताई के समय फिल्मफेयर अवॉर्ड की हैट्रिक लगाने वाली अनुराधा पौडवाल को हैप्पी बर्थडे
Loading...

कामयाबी की बुलंदी तक कैसे पहुंचा एक श्लोक गाकर शुरू हुआ फिल्मी सफर.

फिल्म अभिमान का वो सीन याद कीजिए, जब अमिताभ बच्चन की मुलाकात जया बच्चन से होती है. फिल्म की कहानी के लिहाज से वो बड़ा जरूरी सीन था. फ्लाइट पकड़ने के लिए जा रहे अमिताभ बच्चन एक मंदिर में दर्शन के लिए जाते हैं. वहां उनके कान में एक आवाज पड़ती है.

दरअसल फिल्म की हीरोइन जया बच्चन ‘नदिया किनारे हेराय आई कंगना’ गा रही होती हैं. जया बच्चन के लिए वो गाना लता मंगेशकर ने गाया था. अब इस सीन से पहले के एक दूसरे सीन को याद कीजिए.

अमिताभ बच्चन जब अपनी मौसी से मिलने जा रहे होते हैं और वहां भी उनके कानों में एक श्लोक की आवाज आती है. वो उस आवाज से बहुत प्रभावित होते हैं. मौसी से पूछने पर पता चलता है कि वो आवाज गांव की ही एक लड़की की है जिसके पिता शास्त्रीय संगीत के जानकार हैं.

अमिताभ बच्चन खुद भी फिल्म अभिमान में एक गायक के किरदार में होते हैं. लिहाजा उन्हें वो आवाज बहुत लुभाती है. क्या आप जानते हैं कि फिल्म अभिमान में वो श्लोक किस गायिका ने गाया था?

वो आवाज थी 70 के दशक में प्लेबैक सिंगिग में कदम रखने वाली गायिका अनुराधा पौडवाल की. इस एक श्लोक से ही फिल्मी दुनिया में अनुराधा पौडवाल को बड़ी पहचान मिली थी.

इस श्लोक के पीछे की कहानी भी दिलचस्प है. 1973 में रिलीज फिल्म अभिमान का संगीत सचिन देव बर्मन का था. उन दिनों सचिन दा के असिस्टेंट थे- अरूण पौडवाल. अरूण पौडवाल बड़े काबिल व्यक्ति थे. उन्होंने दर्जनों फिल्मों में सहायक संगीतकार के तौर पर काम किया. वो अनुराधा पौडवाल के पति थे. उनके पास अनुराधा की आवाज में वो श्लोक रिकॉर्ड था. जो कभी एसडी बर्मन ने सुन लिया था.

फिल्म अभिमान का संगीत तैयार करने के दौरान सचिन दा को कहीं से वो श्लोक याद आ गया. उन्होंने अरूण पौडवाल से कहकर अनुराधा को स्टूडियो बुलाया. अनुराधा कोई बहुत ‘ट्रेंड सिंगर’ नहीं थी. बचपन में उन्होंने थोड़ा बहुत संगीत शौकिया सीखा था. खैर, बर्मन दा ने अनुराधा से वो श्लोक सुना. उसे एक टेप पर रिकॉर्ड किया. बाद में उन्होंने उस श्लोक को अपनी फिल्म में ऐसी जगह इस्तेमाल किया कि कोई भूल नहीं सकता.

देखा जाए तो अभिमान में अनुराधा पौडवाल की आवाज कुछ सेकेंड्स के लिए ही लोगों ने सुनी लेकिन वो आवाज नोटिस हुई. फिल्म के बाकि गाने किशोर कुमार, मोहम्मद रफी, मनहर उधास और लता मंगेशकर ने गाए थे लेकिन लोगों के जेहन में वो श्लोक की आवाज भी बैठ गई. इसका असर ये हुआ कि लक्ष्मीकांत प्यारेलाल, कल्याणजी आनंद जी जैसे दिग्गज संगीतकारों के यहां से अनुराधा पौडवाल को काम मिलना शुरू हो गया. दर्जनों फिल्मों में गाना गाते गाते एक दशक बीत गए. इस बीच में उनके कुछ गाने हिट भी हुए. मसलन- सुभाष घई की फिल्म कालीचरण का गाना एक बटा दो, दो बटे चार गाना लोगों ने पसंद किया.

लेकिन एक बड़ी कामयाबी उन्हें मिली 1983 में सुभाष घई की फिल्म हीरो से. हीरो में लक्ष्मीकांत प्यारेलाल ने अनुराधा पौंडवाला से दो गाने गवाए. पहला गाना था- डिंग डॉंग ओ बेबी सिंग ए सॉंग और दूसरा था- तू मेरा हीरो है. दोनों ही गाने कमाल के हिट हुए. डिंग डॉंग ओ बेबी सिंग ए सॉंग को अनुराधा पौडवाल अपने करियर का सबसे मुश्किल गाना भी मानती हैं.

खैर, इन दोनों गाने की कामयाबी ने अनुराधा को फिल्म इंडस्ट्री में अलग ही पहचान दिलाई. तू मेरा हीरो है के गाने के लिए अनुराधा पौडवाल को फिल्मफेयर अवॉर्ड्स के लिए नॉमिनेट किया गया.

इससे पहले भी एक बार वो फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट हुई थीं. नॉमिनेशन से विनर बनने में अनुराधा पौडवाल को ज्यादा वक्त नहीं लगा. 1986 में रिलीज फिल्म उत्सव के गाने 'मेरे मन बाजो मृदंग' के लिए उन्हे फिल्मफेयर अवॉर्ड से नवाजा गया. इसी के दो साल बाद 1989 में उन्हें एक मराठी फिल्मी गाने के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया. अगले करीब पांच साल तक फिल्म इंडस्ट्री में अनुराधा पौडवाल राज कर रही थीं.

1989 में फिल्म आई तेजाब. 'कह दो कि तुम हो मेरी वरना' गाने के लिए एक बार फिर उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड नॉमिनेशन मिला. 1990 में उन्हें राम लखन के लिए नॉमिनेशन मिला. 1991 में अनुराधा पौडवाल का इंतजार खत्म हुआ. महेश भट्ट की फिल्म आशिकी के लिए अनुराधा पौडवाल ने सर्वश्रेष्ठ प्लेबैक गायिका का फिल्मफेयर अवॉर्ड अपने नाम किया.

'नजर के सामने जिगर के पास' गाना लोकप्रियता की बुलंदी पर था. फिल्म का संगीत नदीम श्रवण का था. अगले साल फिर इसी टीम ने उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड दिलाया. इस बार फिल्म थी दिल है कि मानता नहीं. निर्देशक महेश भट्ट और संगीतकार नदीम श्रवण. इस बार उन्हें फिल्म के टाइटल ट्रैक के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला.

अगले साल उन्होंने ये कारनामा किया फिल्म बेटा के गाने से. इंद्रकुमार की फिल्म और आनंद मिलिंग के संगीत निर्देशन में उन्होंने 'धक धक करने लगा' गाने के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता.

ये वो दौर था जब अनुराधा पौडवाल, माधुरी दीक्षित की आवाज बन गई थीं.

माधुरी दीक्षित भी उस दौर में बड़ा नाम बन चुकी थीं और धक धक करने लगा गाने को काफी ‘बोल्ड’ गाना माना गया था. आने वाले सालों में साजन और सड़क जैसी फिल्मों में अनुराधा पौडवाल की आवाज ने जादू बिखेरा. गौर करने वाली बात ये भी है कि उस समय तक लता मंगेशकर और आशा भोंसले बतौर प्लेबैक सिंगर सक्रिय थीं. इनके रहते हुए म्यूजिक इंडस्ट्री में इतनी बड़ी पहचान बनाना और लोगों को प्यार हासिल करना कहीं से आसान नहीं था. हिंदी फिल्मों के अलावा उन्होंने दूसरी कई भाषाओं में भी प्लेबैक सिंगिग की.

90 के दशक के शुरूआती सालों में जब एक तरफ अनुराधा पौडवाल कामयाबी के शिखर पर थीं, उसी समय उन्हें व्यक्तिगत जिंदगी में बड़ा झटका लगा. उनके पति अरूण पौडवाल का एक दुर्घटना में निधन हो गया. अनुराधा पौडवाल ने किसी तरह परिवार को संभाला.

इसी समय के आस पास टी सीरीज कंपनी के मालिक गुलशन कुमार से उनकी नजदीकियां भी चर्चा में रहीं. ऐसी खबरें खूब इधर उधर हुईं कि गुलशन कुमार ने अनुराधा पौडवाल को दूसरी लता मंगेशकर बनाने की बात कही थी. इस बातों की सत्यता कभी सामने नहीं आई.

अलबत्ता ये जरूर हुआ कि अनुराधा पौडवाल ने तय किया कि वो सिर्फ गुलशन कुमार के लिए ही गाया करेंगी. वो 90 का दशक ही था जब उन्होंने फिल्मी गानों से किनारा कर भजन की रिकॉर्डिंग्स की. उनके साथ साथ उनकी बेटी कविता पौडवाल के एल्बम भी निकले.

बदलते समय और बदलते संगीतकारों के उस दौर में फिल्मी गानों से अनुराधा पौडवाल की दूरी ने कई नए कलाकारों को मौका दिया. हालांकि आज आधुनिक संगीत के दौर में भी अनुराधा पौडवाल के गाए कई गाने रीमिक्स किए जा रहे हैं. जो उनके गाए गानों की लोकप्रियता पर एक बड़ी मोहर है.

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi