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हिंदी स्पेशल: क्या हिंदी लिख कर पैसा कमाया जा सकता है?

सिर्फ हिंदी लिखकर लोग पैसा कमा रहे हैं मगर इसमें कई किंतु परंतु जुड़े हुए हैं

Updated On: Sep 10, 2017 09:30 AM IST

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee

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हिंदी स्पेशल: क्या हिंदी लिख कर पैसा कमाया जा सकता है?

हिंदी सप्ताह चल रहा है. पिछले कुछ सालों में जब से इंटरनेट की दुनिया में हिंदी का चलन बढ़ा है, या कहें कि यूनिकोड के चलते हिंदी टाइपिंग वगैरह आसान हुई है, एक सवाल अक्सर लोग पूछते हैं कि क्या हिंदी लिख पढ़कर पैसा कमाया जा सकता है? अगर हां तो कैसे और कितना? चलिए इस सवाल की संभावनाओं को थोड़ा तलाशते हैं.

बीआर चोपड़ा की महाभारत में एक जगह भीष्म पितामह कहते हैं, ‘ये किंतु और परंतु ही तो हस्तिनापुर के दुर्भाग्य का कारण है वत्स.’ हिंदी में लिखने-पढ़ने से पैसा कमाया जा सकता है मगर इसके साथ ही उसमें कई किंतु और परंतु जुड़े हुए हैं.

हिंदी की वेबसाइट्स

पिछले कुछ समय में देश के लगभग सभी मीडिया हाउस अपनी हिंदी की वेबसाइट्स लेकर आए हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है कि इस लेख के लेखक जैसे तमाम लोग इनके ज़रिए पैसा कमा रहे हैं. कुछ साल पहले तक लंबे ओपिनियन आर्टिकल सिर्फ अंग्रेज़ी में ही पढ़ने को मिलते थे. अब ये स्थिति काफी हद तक बदल गई है. इस तरह की वेबसाइट्स ने हिंदी जानने वालों के लिए अच्छे मौके पैदा किए हैं.

लेकिन इस तरह के लेखन के इच्छुक लोगों को दो बातें याद रखनी चाहिए. ये सेक्टर नया है तो इसमें अभी गिनती के मौके हैं. आगे इस क्षेत्र में जब संभावनाएं बढ़ेंगी तब बढ़ेंगी लेकिन फिलहाल ये कुछ हज़ार लोगों को मौका देने वाली इंडस्ट्री ही है.

दूसरी बात ये कि इस सेक्टर में तरक्की के लिए हिंदी लिखना आना दूसरी शर्त है. पहली शर्त है अपने विषय पर पकड़ होना. आपने जिन भी लोगों इस तरह की किसी भी वेबसाइट पर लिखते देखा होगा, वे सब अपने-अपने क्षेत्र की अच्छी समझ रखते हैं. अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे, राजनीति, खेल, सिनेमा और फेमिनिज़्म जैसे मुद्दों पर रोज बात करने के लिए कई सालों की तैयारी अनुभव या लगातार पढ़ते या बात करते रहने की ज़रूरत पड़ती है.

जो नए लोग भी इसमें आने के इच्छुक हों उन्हें भी इन सारी बातों के लिए तैयार रहना चाहिए, ये याद रखते हुए कि किसी वेबसाइट के लिए ओपिनियन आर्टिकल लिखना फेसबुक पर पोस्ट करने से बिलकुल अलग है.

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अनुवाद और टाइपिंग

हिंदी में बाज़ार के बढ़ने के साथ-साथ अनुवाद का बाजार खूब बढ़ा है. बिना किसी खास एकैडमिक डिग्री के लोग अनुवाद से अच्छा पैसा कमा रहे हैं. अनुवाद के काम में एक ही बात याद रखने वाली है. आपकी हिंदी के साथ-साथ किसी और भाषा पर भी पकड़ होनी चाहिए. जबकि टाइपिंग के लिए अभ्यास की ज़रूरत है. एक और याद रखने लायक ये है कि अनुवाद और टायपिंग दोनों ही हद दर्जे तक उबाऊ काम हैं.

किताब लिखना

पिछले कुछ समय में हिंदी की किताबों की दुनिया काफी बदली है. सोशल मीडिया के ज़रिए आए लेखकों ने बाज़ार के गणित को बदला है. फेसबुक पर ऐसे लोगों को देखकर एक बड़ा वर्ग लेखक बनने के सपने देखने लगा है.

किताब लेखन को करियर समझने वालों को कुछ बातें समझनी चाहिए. हिंदी में जो किताबें हाल-फिलहाल में बेस्ट सेलर घोषित हुई हैं उनकी बिक्री फिलहाल 20,000-25,000 तक पहुंची है. ये आंकड़ा हिंदी के लिहाज से बड़ा हो सकता है, इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए नहीं.

हिंदी की नई पीढ़ी के लेखक फिलहाल अलग-अलग नौकरियों से पैसा कमा रहे हैं. हो सकता है कि दस साल बाद इस स्थिति में बदलाव आए मगर तो भी जीवन भर पूरी तरह से रॉयल्टी पर निर्भर रहने वाले लेखकों की संख्या देश भर में 20-25 से ज़्यादा नहीं होगी.

कविता

हिंदी की दुनिया में कविता दो प्रकार की है. साहित्यिक कविताएं और मंच की कविताएं. साहित्यिक कविता की किताबों से जीवनयापन की आशा रखना बेमानी है. मंच की कविता से लोग पैसा कमा रहे हैं और बहुत अच्छे से कमा रहे हैं. कुमार विश्वास जैसे कवि तो एक शो के लिए लाखों में पेमेंट लेते हैं. ठीक-ठाक स्तर के मंचीय कवि को एक कवि सम्मेलन में कविता पढ़ने के 15,000-20,000 तक आराम से मिल जाते हैं.

ये कमाई आकर्षित करती है मगर यहां भी दो बातें याद रखने लायक हैं. पहली कि मंच पर सिर्फ अच्छा लिखने से काम नहीं चलता. आपको पर्फॉमर बनना पड़ता है. कपिल शर्मा की तरह चुटकुले सुनाकर, वंदे मातरम् के नारों से राष्ट्रवाद जगाकर तालियां बटोरने की कला सीखनी पड़ती है. इसके साथ ही मंच भी एक तरह का शो बिज़नेस है. जब तक आपकी बातों पर तालियां बज रही हैं आपको बुलाया जा रहा है.

ये हैं हिंदी में लिख-पढ़ कर पैसा कमाने के कुछ तरीके. इनके अलावा हिंदी पढ़ाना एक और ऑप्शन है. हिंदी सिनेमा में स्क्रिप्ट लिखने में अभी भी इतनी परेशानियां हैं कि उसे करियर कहना गलत होगा. हां टीवी सीरियल और विज्ञापनों के लिए कॉपी राइटिंग एक विकल्प हो सकता है.

कुल मिलाकर पैसा कमाने के लिए बाज़ार की ज़रूरत है और हिंदी की दुनिया में अभी इसकी शुरुआत हुई है. आने वाले समय में सुधार हो हम इसी की उम्मीद कर सकते हैं.

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