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अपनी जीवनसंगिनी से पहली बार कैसे मिले थे पंडित शिवकुमार शर्मा

Valentine Day 2019: कम ही लोग जानते हैं कि पंडित शिवकुमार शर्मा की जिंदगी में उनकी पत्नी कैसे आईं, चलिए आज आपको ये दिलचस्प किस्सा सुनाते हैं

Updated On: Feb 14, 2019 08:16 AM IST

FP Staff

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अपनी जीवनसंगिनी से पहली बार कैसे मिले थे पंडित शिवकुमार शर्मा

पंडित शिवकुमार शर्मा पूरी दुनिया में बेशुमार इज्जत और प्यार पाने वाले कलाकारों में से एक हैं. बचपन में अपने पिता पंडित उमादत्त शर्मा से गायकी और तबले की तालीम लेने के बाद उन्होंने संतूर सीखना शुरू किया था. पंडित उमादत्त शर्मा चाहते थे कि उनका बेटा संतूर सीखे. ऐसा इसलिए क्योंकि संतूर को शास्त्रीय वाद्ययंत्र के तौर पर पहचान दिलाने में उनके पिता का बहुत बड़ा योगदान है. पंडित शिवकुमार शर्मा ने अपने पिता की इच्छा का सम्मान करते हुए संतूर सीखना शुरू किया. जल्दी ही इस वाद्ययंत्र पर उनकी साधना ने रंग दिखाया. अपेक्षाकृत नया वाद्ययंत्र होने के बाद भी पंडित शिवकुमार शर्मा ने उसे बखूबी साध लिया.

सिर्फ 17 साल के थे जब मुंबई में प्रतिष्ठित हरिदास संगीत सम्मेलन में उन्होंने पहले तबला बजाया और फिर संतूर. श्रोताओं के लिए ये अनोखा अनुभव था. अव्वल तो संतूर को उससे पहले किसी ने देखा तक नहीं था. दूसरे संभवत: ये पहला मौका था जब किसी कलाकार ने पहले एक वाद्ययंत्र बजाया और फिर दूसरा. जाहिर है उसी दिन पंडित शिवकुमार शर्मा को श्रोताओं का शानदार रिस्पॉन्स मिला, जो आज 6 दशक से ज्यादा का समय बीत जाने के बाद भी कायम है. ये अलग बात है कि उस कार्यक्रम में बारी-बारी तबला और संतूर बजाने की उनकी शर्त से आयोजक नाराज हो गए थे.

Pandit Shiv Kumar Sharma

(फोटो: फेसबुक से साभार)

पंडित शिवकुमार शर्मा के उस कार्यक्रम में उस दौर के एक से बढ़कर एक दिग्गज कलाकार भी शामिल थे. उस कार्यक्रम में महान फिल्मकार वी.शांताराम की बेटी मदुरा भी थीं. उन्होंने ही बाद में पंडित शिवकुमार शर्मा को बॉम्बे आने का न्यौता दिया था. संगीत में दिलचस्पी रखने वालों के लिए भले ही ये जानकारी नई नहीं है लेकिन बहुत लोग ऐसे भी हैं जो शायद ना जानते हों कि पंडित शिवकुमार शर्मा ने यश चोपड़ा की सुपरहिट फिल्मों में संगीत दिया है. डर, सिलसिला, चांदनी जैसी लाजवाब फिल्मों के संगीतकार शिव-हरि में पंडित हरिप्रसाद चौरसिया और पंडित शिवकुमार शर्मा की जोड़ी हुआ करती थी.

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इसके अलावा जिस जोड़ी के लिए पंडित शिवकुमार शर्मा भगवान को शुक्रिया अदा करते हैं वो है उनकी और मनोरमा जी की जोड़ी. मनोरमा पंडित शिवकुमार शर्मा की पत्नी हैं. पंडित शिवकुमार शर्मा कामयाबी और लोगों से मिलने वाली बेशुमार इज्जत का श्रेय हमेशा अपनी पत्नी को देते हैं. कम ही लोग जानते हैं कि पंडित शिवकुमार शर्मा की जिंदगी में उनकी पत्नी कैसे आईं, चलिए आज आपको ये दिलचस्प किस्सा सुनाते हैं.

हुआ यूं कि उस समय पंडित शिवकुमार शर्मा के जम्मू के घर में फोन तक नहीं था. चिट्ठी लिखकर काम चलता था. पंडित जी बताते हैं, 'उस समय ये तो कोई सोच भी नहीं सकता था कि आने वाले समय में मोबाइल फोन भी होंगे. मैं बॉम्बे में था. एक दिन मुझे पिताजी की चिट्ठी आई कि बेटा मैंने तुम्हारे लिए एक लड़की देख ली है. जम्मू आकर उसे देख लो. तुम्हारी शादी तय करनी है. मैं जम्मू पहुंचा. मुझे लगा था कि मैं उस लड़की से मिलूंगा. कुछ बातचीत होगी. एक-दूसरे से जान-पहचान होगी.'

यहां तक की कहानी तो ठीक है लेकिन असली ट्विस्ट यहीं से शुरू होता है. पंडित जी जब लड़की को देखने जम्मू पहुंचे तो उन्हें लड़की के साथ फिल्म देखने के लिए भेज दिया गया. पंडित शिवकुमार शर्मा और वो लड़की सिनेमाहॉल में पहुंच गए. ये मजेदार संयोग ही था कि दोनों को घरवालों ने अपना जीवनसाथी चुनने के लिए भेजा था लेकिन फिल्म थी-महाभारत. यानी शादी के पहले ही पंडित शिवकुमार शर्मा और उनकी होने वाली संभावित पत्नी महाभारत देख रहे थे.

इस दिलचस्प किस्से के बारे में पंडित शिवकुमार शर्मा बताते हैं, 'उस रोज वो एक तरफ अपने घरवालों के साथ बैठी हुई थीं और मैं दूसरी तरफ बैठा था. जब फिल्म में इंटरवल हुआ तो हम लोगों ने एक दूसरे को दूर से देखा. बस... घर आए तो पिताजी ने कहा- लड़की बहुत अच्छी है शादी तय.' इसके बाद दोनों का पारंपरिक तरीके से विवाह हुआ. शादी के बाद मनोरमा जी पंडित शिवकुमार शर्मा के साथ बॉम्बे गईं. उनका संगीत से कोई लेना-देना नहीं था. जाहिर है उनके लिए बॉम्बे का माहौल बिल्कुल नया और अलग था. बावजूद इसके उन्होंने पंडित शिवकुमार शर्मा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उतार चढ़ाव का सामना किया.

एक कार्यक्रम में पत्नी मनोरमा के साथ पंडित शिव कुमार शर्मा. साथ में अभिनेत्री ऐश्वर्य राय बच्चन ( फाइल फोटो )

एक कार्यक्रम में पत्नी मनोरमा के साथ पंडित शिव कुमार शर्मा. साथ में अभिनेत्री ऐश्वर्य राय बच्चन ( फाइल फोटो )

पंडित जी खुद भी कहते हैं, 'ये ठीक है कि वो संगीत के माहौल से नहीं आई थीं. जब वो जम्मू से बॉम्बे आईं तो उन्हें लगा कि ये तो कोई दूसरा ही माहौल है. जल्दी ही वो इस माहौल में पूरी तरह ढल गईं. बाद के सालों में मैं तो ज्यादातर वक्त संगीत में ही रहा. म्यूजिक कॉन्सर्ट के लिए दो-दो महीने का विदेश दौरा होता था. ट्रैवल बहुत ज्यादा होता था. बॉम्बे में हैं भी तो ज्यादातर वक्त स्टूडियो में रिकॉर्डिंग में बीतता था. लेकिन मेरी पत्नी मनोरमा ने मेरे बच्चे रोहित और राहुल को जिस तरह पाल पोस कर बड़ा किया. उनकी पढ़ाई-लिखाई का ख्याल रखा उससे समझ आता है कि उन्होंने कितनी खूबसूरती से अपनी जिम्मेदारियों को पूरा किया. समय की जरूरत को समझते हुए उन्होंने जितना ‘सैक्रिफाइज़’ किया उसके लिए मैं उन्हें पूरा क्रेडिट देता हूं.'

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