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हसरत जयपुरी: जिन्होंने अपने प्रेमपत्र कालजयी गानों में बदल दिए

'बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं' लिखने वाले हसरत की पत्नी का नाम राधा था

Updated On: Sep 17, 2017 02:30 PM IST

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee

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हसरत जयपुरी: जिन्होंने अपने प्रेमपत्र कालजयी गानों में बदल दिए

हिंदी सिनेमा में जब भी सदाबहार गानों की बात आती है राजकपूर का जिक्र होता है. हम सबके लिए राजकपूर की फिल्मों के संगीत का मतलब है शंकर-जयकिशन, मुकेश और शैलेंद्र की जुगलबंदी. मगर एक नाम और है जिसका जिक्र इन सबके बीच अक्सर सबसे बाद में आता है. बात कर रहे हैं 17 सितंबर 1999 को दुनिया से गए हसरत जयपुरी की.

बतौर बस कंडक्टर अपने करियर की शुरुआत करने वाले हसरते जयपुरी ने हिंदी सिनेमा को कई ऐसे गाने दिए हैं जो हर हिंदुस्तानी की जुबान पर चढ़े हुए हैं. सबसे खास बात ये है कि जब गीतकार शैलेंद्र ने अपनी फिल्म तीसरी कसम बनाई तो हसरत साहब से ही लिखवाया, 'दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई, तूने काहे को दुनिया बनाई,' शुरुआत की ये दो लाइन हसरत साहब की हैं आगे का गाना शैलेंद्र की कलम से निकला है.

हसरत जयपुरी ने अपनी कमाई को बहुत कायदे से इनवेस्ट किया जिसके चलते उन्होंने अपनी शर्तों पर गिनी-चुनी फिल्में ही कीं. उनको याद करने का सबसे अच्छा तरीका उनकी कलम से निकले गानों को एक बार फिर से दोहराना है.

जिया बेकरार है छाई बहार है.

बरसात फिल्म का ये गाना हसरत साहब का पहला गाना है.

ज़िंदगी एक सफर है सुहाना

राजेश खन्ना के सुपर स्टारडम की बानगी इस गाने में भरपूर दिखती है.

बदन पे सितारे लपेटे हुए

प्रिंस फिल्म का ये गाना अपनी लिरिक्स के चलते आज भी कॉलेज टाइम रोमांस करने वालों की पसंद बना हुआ है. 'हम हीं जब न होंगे तो ऐ दिलरुबा, किसे देखकर हाय शर्माओगी.'

ये मेरा प्रेमपत्र पढ़कर कि तुम नाराज न होना

हसरत जयपुरी जैसे शायर को जब प्रेम होता है तो उसका किया इजहार भी कालजयी बन जाता है. ये गाना हसरत जयपुरी ने 20 साल की उम्र में अपनी प्रेमिका से इजहार-ए-इश्क करने के लिए लिया था. बाद में वो उनकी पत्नी भी बनीं.

बोल राधा बोल संगम होगा कि नहीं

संगम फिल्म के इस गाने से जुड़ा वैजंतीमाला और राजकपूर का किस्सा तो सबको पता है. जहां राज कपूर ने फोन पर वैजंतीमाला से पूछा कि संगम होगा कि नहीं. मगर कम लोग जानते हैं कि इस गाने को लिखने वाले हसरत जयपुरी की पत्नी का नाम राधा था. जिनका जिक्र हम ऊपर वाले गाने में भी कर चुके हैं.

सुन साहिबा सुन

इस गाने के बिना शायद ही कोई अंताक्षरी पूरी होती हो. वैसे इस गाने के चलते उनका संगीतकार रवींद्र जैन से विवाद भी हुआ था.

सायोनारा सायोनारा

इस गाने ने न जाने कितने हिंदुस्तानियों को एक शब्द की जापानी का माहिर बना दिया है. ये बात तो आप भी मानते होंगे.

बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है

ये गाना कभी न कभी मन ही मन हम सभी ने कभी न कभी गुनगुनाया होगा.

झनक-झनक तोरी बाजे पायलिया

मन्ना डे की गाई हुई इस बंदिश के बोल हसरत जयपुरी के बाकी गानों से काफी जुदा हैं.

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