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हसरत जयपुरी: 'हम ही जब न होंगे तो ऐ दिलरुबा, किसे देखकर हाय शर्माओगी'

बोल राधा बोल, संगम होगा की नहीं और, जाने कहां गए वो दिन जैसे कई गाने लिखने वाले हसरत जयपुरी ने राजकपूर के लिए कई खूबसूरत गाने लिखे हैं

Shivendra Kumar Singh Shivendra Kumar Singh Updated On: Apr 15, 2018 09:21 AM IST

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हसरत जयपुरी: 'हम ही जब न होंगे तो ऐ दिलरुबा, किसे देखकर हाय शर्माओगी'

मुंबई फिल्म इंडस्ट्री में ये किस्सा बहुत मशहूर है. अंदाजन पचपन-साठ साल पहले की बात है. हुआ यूं था कि ‘मदर इंडिया’ जैसी एतिहासिक फिल्म बनाने वाले डायरेक्टर महबूब खां एक दफा लॉस एंजिलिस गए थे. लॉस एंजिलिस में उन्हें हार्टअटैक आया. उन्हें फौरन अस्पताल ले जाया गया. वक्त से अस्पताल पहुंचे लिहाजा जल्दी ही उनकी सेहत में सुधार हुआ. बाद में डॉक्टरों ने उन्हें कुछ दिन आराम करने की सलाह दी. एक रोज जब वो लता मंगेशकर से फोन पर बात कर रहे थे तो उन्होंने लता जी से एक खास गाने को फोन पर ही सुनाने की फरमाइश की. वो गाना था 1956 में रिलीज हुई फिल्म चोरी-चोरी का रसिक बलमा.

इस गाने के बोल और गायकी में कुछ ऐसा खास था कि महबूब खां कहीं खो जाते थे. उन्हें आराम मिलता था. ऐसा एक बार नहीं बल्कि कई बार हुआ जब लता मंगेशकर ने ये गाना महबूब खां को फोन पर सुनाया. इस गाने का संगीत शंकर-जयकिशन ने तैयार किया था और बोल थे हसरत जयपुरी के. गाने के बोल याद कीजिए- रसिक बलमा, हाय दिल क्यों लगाया/तोसे दिल क्यों लगाया, जैसे रोग लगाया/ जब याद आये तिहारी, सूरत वो प्यारी प्यारी/ नेहा लगा के हारी, तङपूं मैं गम की मारी/रसिक बलमा.../ढूंढे हैं पागल नैना, पाए ना इक पल चैना/ डसती है उजली रैना, कासे कहूं मैं बैना/ रसिक बलमा... ऐसे शानदार रचना वाले गीतकार हसरज जयपुरी को आज हम उनके जन्मदिन पर याद कर रहे हैं.

बस कंडक्टर से गीतकार तक

फोटो सोर्स- ट्विटर

फोटो सोर्स- ट्विटर

हसरत जयपुरी का जन्म 15 अप्रैल, 1922 को जयपुर में हुआ था. बचपन में थोड़ी बहुत इंग्लिश पढ़ने के बाद उन्होंने उर्दू और फारसी की तालीम पर जोर दिया. इसके बाद लिखने-पढ़ने का चस्का लग गया. जो उन्हें करीब 20 साल की उम्र में मुंबई ले गया. कहते हैं हसरत जयपुरी ने कुछ समय तक मुंबई में बस कंडक्टरी भी की और साथ साथ मुशायरे भी पढ़े. ऐसे ही एक मुशायरे में पृथ्वीराज कपूर पर हसरत जयपुरी की कलम का जादू चढ़ गया. उन्होंने हसरत जयपुरी को अपने बेटे और शोमैन के नाम से मशहूर राज कपूर से मिलाया.

राज कपूर उस समय फिल्म-बरसात बनाने की तैयारी में थे. उन्होंने हसरत जयपुरी को गाना लिखने को कहा. इस तरह हसरत जयपुरी ने अपनी कलम से पहला हिंदी गाना जो रिकॉर्ड हुआ वो लिखा- जिया बेकरार है. इसके बाद अगले करीब करीब 3 दशक तक हसरत जयपुरी एक से बढ़कर एक नगमें हिंदी फिल्मी दुनिया को देते रहे. राज कपूर की फिल्मों के लिए हसरत जयपुरी, शैलेंद्र और संगीतकार शंकर जयकिशन का जादू सालों-साल तक दर्शकों के दिलो दिमाग पर छाया रहा. ये चौकड़ी राज कपूर की फिल्मों की कामयाबी का अहम हिस्सा बनती चली गई. चारों की दोस्ती भी कमाल की थी.

हसरत जयपुरी ने बतौर गीतकार एक से बढ़कर एक फिल्मी नगमे लिखे. जिसमें जिंदगी एक सफर है सुहाना, पंख होते तो उड़ आती रे, एहसान तेरा होगा मुझ पर, दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई, उनके ख्याल आए तो, तुम मुझे यूं भूला ना पाओगे, बदन पे सितारे लपेते हुए ओ जाने तमन्ना कहां जा रही हो, जैसे दर्जनों गाने हैं जो आज भी हसरत जयपुरी की यादों को ताजा रखते हैं. 1966 में उन्हें फिल्म सूरज के गीत बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला. 1972 में उन्हें जिंदगी एक सफर है सुहाना के लिए एक बार फिर सर्वश्रेष्ठ गीतकार का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया. इसके अलावा भी उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा गया था.

लता मंगेशकर और हसरत जयपुरी की जोड़ी के एक और गाने की कहानी दिलचस्प है. बंगाली फिल्म निर्देशक अमीय चक्रवर्ती की फिल्म थी-सीमा. इस फिल्म में नूतन और बलराज साहनी जैसे कलाकार अभिनय कर रहे थे. इस फिल्म में हसरत जयपुरी का लिखा गाना सुनो छोटी सी गुड़िया की लंबी कहानी लता मंगेशकर के पसंदीदा गानों में से एक है. इस गाने की सबसे बड़ी खासितय थी कि इसमें उस्ताद अली अकबर खां ने सरोद बजाया था. लता जी ने बाद में इस गाने की कामयाबी के लिए सुंदर बोल के साथ साथ उस्ताद अली अकबर खां को श्रेय दिया था.

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हसरत जयपुरी की कलम और लता मंगेशकर की आवाज के जादू का एक राज भी था. लता मंगेशकर बताती हैं कि हसरत जयपुरी गाने की धुन बनने के बाद कई बार उनसे पूछ लिया करते थे कि अगर गाने के बोल में कहीं कोई बदलाव करना है तो वो कर देंगे लेकिन उनका लेखन इतना दुरूस्त होता था कि उसमें बदलाव करने या कराने की कभी नौबत ही नहीं आई. हसरत जयपुरी जितने सक्रिय फिल्मी दुनिया में थे उतनी ही सक्रियता से उन्होंने उर्दू में गजलें भी कहीं. जो बड़ी मशहूर हुईं. पाकिस्तान जाकर उन्होंने मुशायरा पढ़ा.

शंकर जयकिशन का जाना

shankar jai kishan raj kapoor

हसरत जयपुरी के लिखे गानों की खासियत थी आसान बोलों के साथ वो ‘कनेक्ट’ जो वो सीधा सिनेमा प्रेमियों से बनाते थे. उनके गीतों के बोल ऐसे थे कि हर किसी को लगता था कि अगर वो लिखता तो शायद उसके भी शब्द वही होते तो हसरत जयपुरी साहब के होते थे. मसलन कहते हैं जब वो जयपुर में थे तो उन्हें एक लड़की से इश्क हुआ. उस वक्त उनकी कलम से निकला- ये मेरा प्रेमपत्र पढ़कर तुम नाराज ना होना. अपने बेटे के जन्म पर उन्होंने लिखा- तेरी प्यारी प्यारी सूरत को किसी की नजर ना लगे.

बदन पे सितारे लपेटे हुए गाने का किस्सा भी बड़ा मशहूर है कि एक दफा हसरत, शैलेंद्र, शंकर और जयकिशन कहीं घूमने गए थे जहां किसी लड़की ने बड़ी चमकती हुई पोशाक पहनी थी, जिसे देखकर हसरत जयपुरी ने ये लाइन कही जिसे शंकर जयकिशन ने हिंदी फिल्म के इतिहास के एक सुपरहिट गीत में तब्दील कर दिया. 1971 में जयकिशन की मौत के बाद हालात तेजी से बदले. इसी दौरान राज कपूर का सपना फिल्म मेरा नाम जोकर फ्लॉप हो गई. यहीं से जोड़ी टूट गई. लंबे समय बाद राज कपूर की एकाध फिल्मों में हसरत जयपुरी ने लिखा लेकिन तब तक वो आपसी समझ का रिश्ता कमजोर पड़ चुका था. 17 सितंबर, 1999 को हसरत जयपुरी अपने तमाम खूबसूरत नगमों को अपने चाहने वालों के लिए छोड़कर दुनिया से चले गए.

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