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Chocolate Day: कभी इसे सुअरों के पीने की चीज बताया गया था

चॉकलेट का इतिहास हजारों साल पुराना है और ये कई चरणों से होकर आज चॉकलेट बार, कैंडी, केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम और पिज्जा तक पहुंचा है

Updated On: Feb 10, 2018 02:03 PM IST

Tulika Kushwaha Tulika Kushwaha

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Chocolate Day: कभी इसे सुअरों के पीने की चीज बताया गया था
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वैलेंटाइंस वीक का तीसरा दिन है, यानी चॉकलेट डे. लेकिन हम बस चॉकलेट के बारे में बात करेंगे. क्या आपको पता है कि आपकी फेवरेट चीजों में से एक चॉकलेट कहां से आया? क्या आपको पता है आपके कैंडी, आइसक्रीम, केक, पिज्जा और न जाने कहां कहां तक पहुंचे हुए चॉकलेट का सबसे पहला स्वाद क्या था? या फिर आपको ये पता है कि चॉकलेट को फूड ऑफ द गॉड कहा जाता था? या फिर ये कि चॉकलेट कभी इतनी कीमती चीज मानी जाती थी कि इसे करेंसी की तरह इस्तेमाल किया जाता था?

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इसलिए आज चॉकलेट डे के बहाने जरा रोमांटिक साइड को पीछे छोड़ते हैं, और चॉकलेट की कहानी जानते हैं.

4000 साल पुराना है चॉकलेट का इतिहास

चॉकलेट का इतिहास 4000 साल पहले तक जाता है. इसकी पहली कड़ी 1900 ईसा पूर्व आज के मैक्सिको के आस-पास के इलाकों में रहने वाले प्री-ओल्मेक सभ्यता से जुड़ती है. सेंट्रल अमेरिका के मेसोअमेरिकन्स ने ककाउ पेड़ों को उगाया था, जिससे चॉकलेट बनाने की शुरुआत हुई. चॉकलेट कंज्यूम करने का सबसे पहला उल्लेख मेसोअमेरिकन्स में ही मिलता है. लेकिन वो चॉकलेट खाते नहीं, पीते थे.

आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ मीठा हो जाए के नाम पर याद आने वाला चॉकलेट अपने शुरुआती दौर में कड़वे और तीखे पेय पदार्थ के रूप में इस्तेमाल किया जाता था.

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14वीं शताब्दी में एज्टेक सभ्यता के लोग मेसोअमेरिकन सभ्यता पर हावी होने लगे. एज्टेक सभ्यता के लोग माया सभ्यता के लोगों से कोको बीन के लिए व्यापार करते थे. ये इतना कीमती था कि इसे करेंसी की तरह इस्तेमाल किया जाता था.

फूड ऑफ द गॉड्स

माया सभ्यता के लोग ककाउ को भगवान का वरदान मानते थे और ककाऊ के भगवान क्वेट्जलकोटल की पूजा करते थे. उस वक्त चॉकलेट को शासकों, योद्धाओं, पुजारियों और उच्चकुलीन लोगों के उपभोग की चीज समझा जाता था.

कड़वे पेय से कुछ मीठा हो जाए तक

शुरुआती दौर में चॉकलेट का टेस्ट कड़वा होता था. इसे कुछ इस तरह बनाया ही जाता था. ककाउ के बीजों को फर्मेन्ट करके रोस्ट करते थे. इसके बाद इसे पीसा जाता था. इसके बाद इसमें पानी, वनीला, शहद, मिर्च और दूसरे मसाले डालकर झागयुक्त पेय बना लिया जाता था. इसे मुख्यत: शाही पेय समझा जाता था और इसके दूसरे चिकित्सकीय महत्व थे.

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लेकिन चॉकलेट मीठा तब बना जब ये यूरोप आया. यूरोप में सबसे पहले चॉकलेट स्पेन पहुंचा था. स्पेन का खोजी हर्नेन्डो कोर्टेस एज्टेक के राजा मॉन्तेज़ुमा के दरबार में पहुंचा था, जहां उसने पहली बार चॉकलेट चखा. इसके कड़वे स्वाद की वजह से उसने इसे सुअरों के लिए पीने वाला कड़वा पेय कहा था. लेकिन ये स्वाद स्पेन पहुंचा और दशकों तक इसे रहस्य बनाकर रखा गया. लेकिन 17वीं शताब्दी में स्पेन की राजकुमारी की शादी फ्रांस के राजा से होने के बाद फ्रांस से होते हुए ये स्वाद पूरे यूरोप में फैल गया.

1685 में फ्रांस में उच्चकुलीन वर्ग के लोग चॉकलेट का उपभोग करते हुए. दूसरी तस्वीर में आप माया सभ्यता की एक महिला को चॉकलेट का झागयुक्त पेय बनाते हुए देख सकते हैं. (इमेज- विकीपीडिया)

1685 में फ्रांस में उच्चकुलीन वर्ग के लोग चॉकलेट का उपभोग करते हुए. दूसरी तस्वीर में आप माया सभ्यता की एक महिला को चॉकलेट का झागयुक्त पेय बनाते हुए देख सकते हैं. (इमेज- विकीपीडिया)

1828 में डच केमिस्ट कॉनराड जोहान्स वान हॉट्न ने कोको प्रेस का आविष्कार किया, जिसने चॉकलेट का इतिहास बदल दिया. इस मशीन के मदद से ही कोको बीन्स से कोको बटर को अलग करना मुमकिन हो पाया. इससे बनने वाले पाउडर ने ही चॉकलेट का रूप लिया. इस आविष्कार ने ही चॉकलेट के प्रोडक्शन को बढ़ाया और इसे आम लोगों के दायरे में लाया. कॉनराड ने अपनी इस मशीन के जरिए चॉकलेट एल्केलाइन सॉल्ट मिलाकर कड़वे स्वाद को कम करने की कोशिश की.

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कहा जाता है कि 1848 में ब्रिटिश चॉकलेट कंपनी जे.एस. फ्राई एंड संस ने पहली बार कोको लिकर में कोको बटर और चीनी मिलाकर पहली बार खाने वाला चॉकलेट बनाया.

1867 में स्विट्जरलैंड के हेनरी नेस्ले ने मिल्क पाउडर का आइडिया ईजाद किया और 1875 डेनियल पीटर ने चॉकलेट में मिल्क मिलाकर मिल्क चॉकलेट बनाया.

1879 में रूडॉल्फ लिंडट् ने कॉन्चिंग मशीन का आविष्कार किया, जिसने चॉकलेट को आज की तरह का वेलवेटी टेक्स्चर दिया. इस मशीन से चॉकलेट का स्वाद बदलने में भी मदद मिली.

इसके बाद चॉकलेट धीरे-धीरे दुनिया भर में फैला और आज कैडबरी, हर्शी, नेस्ले इस इंडस्ट्री का बड़ा नाम हैं. आज चॉकलेट की इंडस्ट्री 7500 करोड़ से भी ज्यादा बड़ा इंडस्ट्री है.

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गुलामी का काला अध्याय

लेकिन आपके चॉकलेट की कहानी बस मीठी-मीठी नहीं है. इसमें गुलामी का काला अध्याय भी जुड़ा हुआ है. उपनिवेशवाद बढ़ने पर यूरोपियनों ने स्थानीय लोगों को गुलामी करवानी शुरू की लेकिन यूरोपियन अपने साथ कुछ बीमारी भी ले आए थे, जिसके स्थानीय लोग शिकार हो गए. इसके बाद भी प्रोडक्शन को बनाए रखने के लिए यूरोपियनों ने अफ्रीकी महाद्वीप से गुलाम लाने शुरू कर दिए.

कह सकते हैं कि कोको की खेती ने गुलामी को बढ़ावा दिया, जिसके बाद गुलामी का काला इतिहास लिखा गया.

खैर, चॉकलेट का इतिहास हजारों साल पुराना है और ये कई चरणों से होकर आज चॉकलेट बार, कैंडी, कुकीज, केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम और पिज्जा तक पहुंचा है, इसलिए अगली बार चॉकलेट खाते वक्त इसके इतिहास को भी याद कर लीजिएगा. और आज के लिए हैप्पी चॉकलेट डे.

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चॉकलेट की हिस्ट्री आप यहां एक बेहतरीन वीडियो में भी देख सकते हैं-

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