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जन्मदिन: जब किशोर दा ने इनकम टैक्स अफसरों पर छोड़ दिए थे कुत्ते

भारी सुरक्षा बंदोबस्त वाला जुहू का उनका बंगला कई बार इनकम टैक्स छापों का शिकार हुआ

Debobrat Ghose Debobrat Ghose Updated On: Aug 04, 2017 11:45 AM IST

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जन्मदिन: जब किशोर दा ने इनकम टैक्स अफसरों पर छोड़ दिए थे कुत्ते

महान भारतीय सिंगर किशोर कुमार की 88वीं जयंती है, लेकिन उन्हें एक शब्द में बयान कर पाना अभी भी एक मुश्किल काम है. मध्य प्रदेश के खंडवा में 4 अगस्त 1929 को पैदा हुए अभाष कुमार गांगुली को समझने के लिए कई विशेषण भी पर्याप्त नहीं होंगे. बाद में इन्हीं अभास कुमार को किशोर कुमार के नाम से दुनिया ने जाना.

हर क्षेत्र में पारंगत किशोर कुमार के बारे में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स ने एक बार कहा था कि वह सबसे विविधता भरे, बहुमुखी प्रतिभा के धनी कलाकार हैं, जो ना सिर्फ बेहतरीन सिंगर हैं, बल्कि बतौर एक्टर, म्यूजिक कंपोजर, गीतकार, स्क्रीनराइटर, फिल्म प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के रूप में भी उनकी क्षमता असाधारण है. अपने जीवनकाल में ही उन्हें कई उपाधियां मिलीं. उनके लिए कंजूस, घुम्मकड़, झक्की से लेकर असाधारण प्रतिभा के धनी जैसे शब्द इस्तेमाल किए जाते थे.

एक बेहतरीन गायक के तौर पर किसी के पास इमोशन, रोमांस, मधुरता, उल्लास, गहराई जैसे सभी तत्व पाए जा सकते हैं, उनके पास सुर, ताल भी हो सकते हैं, लेकिन उस दर्द को पाना मुश्किल है, जो सीधे आपके दिल से निकलता हो. इसी चीज में किशोर कुमार बाकियों से आगे नजर आते हैं. जो दर्द वह अपनी गायकी में लाए थे, चाहे वह 1970 की फिल्म सफर का गाना 'जिंदगी का सफर है ये कैसा सफर' हो या उनका ऑल-टाइम बांग्ला हिट गीत 'नयनो सरोशी केनो भोरेछे जे जॉले' हो. उनकी आवाज में दर्द महसूस किया जा सकता है.

वह ऐसे गैर-परंपरागत गायक थे जिन्होंने कभी गायन की पारंपरिक शिक्षा नहीं ली. किशोर दा ने प्रयोग करने से खुद को कभी दूर नहीं रखा. 1961 की झुमरू फिल्म की उनकी यॉडलिंग (मैं हूं झुमझुमझुम झुमरू...) या रविंद्र संगीत के क्लासिकल गीतों को देख लीजिए. वह प्रयोग करने में हमेशा आगे रहे. किशोर ने अपनी गायकी से लाखों-करोड़ों लोगों को अपना दीवाना बनाया. उनके मुरीदों की संख्या आज भी लाखों-करोड़ों में है.

Kishore kumar

लेकिन गायकी से इतर, किशोर के जीवन की कई दिलचस्प कहानियां हैं, जिनमें से कई ऐसी हैं जिसके बारे में ज्यादा लोगों को पता नहीं है. किशोर कुमार को याद करते हुए फ़र्स्टपोस्ट उनके जीवन के ऐसे ही कुछ पहलुओं का जिक्र कर रहा हैः

अपनी जड़ों से लगाव

स्टारडम के शिखर पर पहुंचने और दुनियाभर में लाखों फैंस के बावजूद किशोर दा को अपनी जड़ों पर हमेशा गर्व रहा. भले ही वह टोरंटो में या लॉस एंजिलिस में गा रहे हों, वह यह बताना नहीं भूलते थे कि वह खंडवा से हैं. वह खुद को 'किशोर कुमार खंडवा वाला' के रूप में पेश करते थे. 1985 में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि वह बॉम्बे छोड़कर अपने पैतृक स्थान खंडवा जाना चाहते हैं. हालांकि ऐसा कभी मुमकिन हो नहीं पाया. अपनी गहरी जड़ों के कारण ही वह एक बरगद के पेड़ की तरह फल-फूल पाए.

इनकम टैक्स और किशोर कुमार

घुम्मकड़ सिंगर किशोर कुमार को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से हमेशा दिक्कत रही. भारी सुरक्षा बंदोबस्त वाला जुहू का उनका बंगला कई बार इनकम टैक्स छापों का शिकार हुआ. बताया जाता है कि कई बार किशोर दा ने अपने कुत्ते टैक्स अफसरों पर छोड़ दिए. वह कहते थे कि इनकम टैक्स अधिकारियों ने उन्हें गरीब बना दिया है और उन्हें अपने बकाया निपटाने के लिए एक और जन्म लेना पड़ेगा. अपने बकाया चुकाने के लिए उन्होंने स्टेज शो भी किए.

kishore kumar

फिल्म डायरेक्टर को अलमारी में बंद कर दिया

फिल्म 'हॉफ टिकट' के बनने के दौरान फिल्म के डायरेक्टर को यह शिकायत थी कि किशोर कुमार उनके साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं. बेहद दुखी होकर डायरेक्टर ने उनके पीछे इनकम टैक्स अधिकारी लगा दिए. अधिकारियों ने उनके घर पर छापे मारे. जब किशोर कुमार को इस बात का पता चला तो उन्हें गुस्सा तो आया, लेकिन वह शांत रहे. एक दिन उन्होंने डायरेक्टर को अपने घर चाय पर बुलाया और उन्हें अलमारी में बंद कर दिया. उन्होंने डायरेक्टर को सबक सिखाने के लिए उसे दो घंटे तक अलमारी में बंद रखा. बाद में डायरेक्टर को छोड़ते हुए किशोर ने उनसे कहा कि वह दोबारा कभी उनके घर न आएं.

इमरजेंसी के दौरान बैन हुए किशोर के गाने

इमरजेंसी के दौरान (1975-77), संजय गांधी ने किशोर कुमार से कहा कि वह इंदिरा गांधी के 20-प्वाइंट प्रोग्राम पर आधारित कांग्रेस रैली में गाएं, लेकिन किशोर ने साफतौर पर उनसे मना कर दिया. इसके चलते उस वक्त के इंफॉर्मेशन और ब्रॉडकास्टिंग मिनिस्टर विद्याचरण शुक्ला ने ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर उनके गानों पर अनाधिकारिक तौर पर बैन लगा दिया. यह बैन तब हटा जब इमर्जेंसी खत्म हुई और कांग्रेस पार्टी चुनाव में हार गई.

झक्की किशोर

किशोर कुमार को उनके झक्कीपने के लिए जाना जाता है. किशोर न तो शराब पीते थे, न ही वह स्मोक करते थे. ऐसे में फिल्मी दुनिया में उनके दोस्त न के बराबर थे. वह सोशल होने से दूर रहते थे. अपने बड़े बंगले में उन्होंने पेड़ों और पौधों को नाम दिए थे. वह उनसे बात किया करते थे. लोगों को खुद से दूर रखने के लिए कहा जाता है कि किशोर ने अपने गेट पर लिखा दिया था कि किशोर कुमार से बचकर. जैसा कि लोग अपने गेट पर लिखा लेते हैं कि कुत्तों से सावधान.

इसके बावजूद किशोर कुमार के फैंस पूरी दुनिया में हैं और वह बेहद लोकप्रिय हुए. 1987 में उनका निधन हो गया और इसके बाद उनकी लोकप्रियता और बढ़ी. जैसा उनका एक और हिट गाना है- चलते-चलते मेरे ये गीत याद रखना, कभी अलविदा ना कहना...

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