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रंगमंच की कठपुतली नहीं असल जिंदगी के महानायक हैं अमिताभ बच्चन

मुश्किलें सिर्फ आम लोगों के जीवन में ही नहीं अमिताभ जैसी महान शख्सियतों की जिंदगी में भी आती हैं. नियति को उसी के खेल में चकमा देकर ही कोई महानायक बनता है

Vivek Anand Vivek Anand Updated On: Oct 11, 2017 10:33 AM IST

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रंगमंच की कठपुतली नहीं असल जिंदगी के महानायक हैं अमिताभ बच्चन

कौन बनेगा करोड़पति के सेट पर महानायक अमिताभ बच्चन के ठीक सामने हरियाणा के यमुनानगर से आईं आरती पंवार बैठी थीं. शो की भाषा में कहें तो आरती पंवार हॉट सीट पर विराजमान थीं. खेल अपने दिलचस्प मोड़ पर था. आरती पंवार शो के दूसरे पड़ाव यानी तीन लाख बीस हजार की रकम को पार करते हुए साढ़े बारह लाख रुपए जीत चुकी थीं. अब वो 25 लाख रुपए के लिए खेल रही थीं.

अमिताभ बच्चन- आरती जी 25 लाख रुपए के लिए अगला सवाल आपकी स्क्रीन पर ये रहा-

1 नवंबर 1858 को किस शहर में लॉर्ड कैनिंग ने रानी विक्टोरिया के उस घोषणा पत्र को पढ़ा, जिससे भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी से ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित किया गया ?

ऑप्शन हैं A. लखनऊ B. इलाहाबाद C. कलकत्ता या D.शिमला

आरती पंवार- सर C कलकत्ता

अमिताभ बच्चन- श्योर हैं, C कलकत्ता को लॉक किया जाए.

आरती पंवार- जी सर, C कलकत्ता को लॉक किया जाए.

अमिताभ बच्चन- कंप्यूटरजी C कलकत्ता को लॉक किया जाए.

अरे..रे..रे..ये गलत जवाब है. इसका सही जवाब है इलाहाबाद.

इसके साथ ही साढ़े बारह लाख रुपए जीत रही आरती पंवार एक गलती की वजह से सीधे तीन लाख बीस हजार रुपए पर पहुंच जाती हैं. आरती पंवार के साथ-साथ अमिताभ के चेहरे पर भी मायूसी की लहर दौड़ जाती है.

अपने कंटेस्टेंट के साथ अमिताभ बच्चन इतना जुड़ा हुआ प्रतीत होते हैं कि उनकी हार का शिकन अमिताभ के चेहरे पर दिखता है. इसे महानायक का जादू कहें या नियती की बाजी में हार-जीत को करीब से देखने का अमिताभ बच्चन का अनुभव कि ऐसे निराशा भरे पल से उबरकर वो खेल को अगले ही लम्हे में एकबार फिर से शुरू करने को तैयार हो जाते हैं.

Amitabh-Bachchan-in-KBC

बेजोड़ स्टारडम, चकाचौंध से भरी सिनेमाई जिंदगी, पर्दे पर करिश्माई शख्सियत से लेकर निजी जिंदगी में कामयाबी की लंबी इबारत लिखने वाला इंसान एक पल में नियती के हाथों कितना मजबूर हो उठता है, इसका अनुभव अपनी व्यक्तिगत जिंदगी में अमिताभ ने एक से ज्यादा मौकों पर महसूस किया है. और ऐसे हर मौके से उबरकर वो ज्यादा मजबूत, ज्यादा सक्षम होकर उठ खड़े हुए हैं.

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न हार में न जीत में, किंचित नहीं भयभीत मैं. ये पंक्तियां अमिताभ बच्चन पर बिल्कुल सटीक बैठती हैं. पर्दे पर एक बेमिसाल अभिनेता के मोहपाश में खुद को बंधा हुआ महसूस करने से अलग हम अमिताभ बच्चन की निजी जिंदगी के कई किस्सों से सबक ले सकते हैं.

एक वाकया 1982 का है जब कुली फिल्म की शूटिंग में गंभीर तौर पर जख्मी होने के बाद भी उन्होंने करोड़ों दर्शकों की दुआओं और अपने हौसले के बूते दोबारा से कामयाबी की नई बुलंदियां छुईं. और दूसरी नब्बे के दशक में एक कामयाब पारी के बाद दिवालिया होने तक की नौबत आने के बाद भी खुद को टूटने नहीं दिया. एक बार अपनेआप को फिर से समेटकर उठ खड़े हुए.

अमिताभ बच्चन ने उस बुरे दौर को याद करते हुए एक बार कहा था, ‘साल 2000 में जहां पूरी दुनिया नई शताब्दी के जश्न में डूबी थी, मैं अपने दुर्भाग्य में फंसा था. मेरे पास फिल्म नहीं थी, पैसे नहीं थे, कोई दोस्त नहीं था, मैं कानूनी मामलों से घिरा था और टैक्स डिपार्टमेंट वाले मेरे घर की नीलामी के कागजात लेकर दरवाजे पर खड़े थे.’

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फिल्म मोहब्बतें में अमिताभ बच्चन

साल 2000 में अमिताभ बच्चन की उम्र 57 साल की थी. इस उम्र में आमतौर पर लोग अपना रिटायरमेंट प्लान कर रहे होते हैं. लेकिन अमिताभ जिंदगी के इस नाजुक मोड़ पर खुद को दोबारा खड़ा करने की कोशिश में लगे थे. वो अपनी फायनेंसियल स्थिति को मजबूत करने में लगे थे, अपने ऊपर पड़े करोड़ों के कर्ज को निपटाने में लगे थे.

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फिल्म इंडस्ट्री में तीन दशक की कामयाब पारी के बाद 1995 में बिगबी ने अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी एबीसीएल नाम से फिल्म प्रोडक्शन और इवेंट मैनेजमेंट की कंपनी बनाई थी. पहले साल इसने 65 करोड़ का करोबार किया, जिसमें कंपनी को 15 करोड़ का शुद्ध मुनाफा हुआ. लेकिन दूसरे ही साल से कंपनी की वित्तीय स्थिति बिगड़ती गई.

1996 में एबीसीएल ने बेंगलुरु में मिस वर्ल्ड प्रतियोगिता का आयोजन करवाया. इसके आयोजन में कंपनी को जबरदस्त घाटा हुआ. इसके बाद फिल्म निर्माण से लेकर उसकी मार्केटिंग, संगीत के राइट्स जैसे हर धंधे में कंपनी को नुकसान उठाना पड़ा. 1999 आते-आते कंपनी बुरी तरह से वित्तीय संकट में फंस गई. अमिताभ बच्चन की कंपनी के पास अपने कर्मचारियों की सैलरी तक देने के पैसे नहीं थे.

कंपनी को कर्ज मुहैया करवाने वाली केनरा बैंक और पब्लिक ब्रॉडकास्ट की कंपनी दूरदर्शन ने अपने बकाये पैसे की लेनदारी के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में एबीसीएल के खिलाफ केस डाल दिया. बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंपनी के खिलाफ फैसला दिया और अमिताभ बच्चन को निर्देश दिया कि वो अपने बंगले प्रतीक्षा और दो दूसरे फ्लैट्स को बेचकर अपना कर्ज चुकाएं.

अमिताभ बच्चन ने उस बुरे दौर को याद करते हुए एक बार कहा था, ‘उस वक्त मेरा विवेक ही मुझे ऐसे बुरे वक्त में भी आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहा था. कई फायनेंसियल एडवाइजर और उद्योगपतियों ने सुझाव दिया कि मैं एबीसीएल को उसके हालात पर छोड़कर बाहर निकल जाऊं और नई जिंदगी की शुरुआत करूं. लेकिन कहीं न कहीं मुझे ये एहसास था कि मैंने लोगों से रुपए ले रखे हैं. लोगों ने एबीसीएल में सिर्फ मेरे नाम की वजह से भरोसा जताया था. इसलिए मुझे इतनी जल्दी हार नहीं माननी चाहिए.’

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अमिताभ बच्चन अर्श का सफर तय करके दोबारा फर्श पर आ चुके थे. लेकिन उनमें नियती से लड़ने का हौसला बरकरार था. इंडियन बोर्ड ऑफ इंड्रस्ट्रियल फायनेंसियल रिकंस्ट्र्क्शन ने अमिताभ की कंपनी एबीसीएल को दिवालिया करार दे दिया. इस बुरे वक्त में सहारा इंडिया के मुखिया सुब्रतो राय और उस वक्त समाजवादी नेता रहे अमर सिंह ने उनकी मदद को आगे आए. अमिताभ बच्चन ने सहारा इंडिया फायनेंस को अपना बंगला गिरवी रखकर कर्ज की रकम का इंतजाम किया.

AmarSingh

अमिताभ बच्चन के पास फिल्में नहीं थी. कोई उन्हें नई फिल्म देने को तैयार नहीं था. स्टारडम एक झटके में खत्म हो चुका था. ऐसे मौके पर यश चोपड़ा ने उन पर भरोसा जताया और अपनी फिल्म मोहब्बतें में उन्हें रोल ऑफर किया.

अमिताभ बच्चन ने कभी कहा था, ‘उन दिनों हर वक्त मेरे सिर पर तलवार झूलती रहती थी. मैंने कई रातें जागकर बिताईं. एक सुबह मैं उठा और सीधे यश चोपड़ा के पास चला गया. मैंने उनसे कहा कि मैं दिवालिया हो चुका हूं. मेरे पास फिल्म नहीं है. मेरा घर और दिल्ली की कुछ प्रॉपर्टीज अटैच हो चुकी है. यशजी ने मेरी पूरी बात शांत होकर सुनी और अपनी फिल्म मोहब्बतें में एक रोल ऑफर किया. इसके बाद मैंने कुछ कर्मशियल एड, टेलीविजन शो और फिल्में करनी शुरू की. मैंने 90 करोड़ रुपए के कुल कर्ज को चुकता किया और एक बार फिर से नई शुरुआत की.’

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2000 में वो एकबार फिर से एक्शन में दिखने लगे. स्टार प्लस के शो कौन बनेगा करोड़पति से उन्होंने बड़े पर्दे का मोह छोड़कर टेलीविजन पर अवतरित हुए. इसके पहले सीजन के 85 एपिसोड से अमिताभ बच्चन को 15 करोड़ की कमाई हुई. उसी वक्त पर उन्होंने आईसीआईसीईआई बैंक जैसे कुछ ब्रांड्स का एंडोर्समेंट कर अच्छी खासी कमाई की और कर्ज चुकता किया.

इसके बाद एक बातचीत में अमिताभ बच्चन ने कहा था, ‘मैं ये नहीं कहूंगा कि ये मेरी सेकेंड इनिंग्स है. मैं कहूंगा कि मुझे एक मौका मिला है खुद को दोबारा साबित करने का. हमलोग अब छाछ भी फूंक-फूंक कर पिएंगे. मैंने अपनी गलतियों से सबक लेना सीखा है. हम बुरे वक्त से गुजरे और अपनी असफलता को स्वीकार किया है. अब हम नई शुरुआत करना चाहते हैं.’

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अमिताभ बच्चन कारोबारी नहीं रहे लेकिन उस बुरे दौर ने उन्हें पैसों के मामले में व्यवस्थित होना सिखा गया. 2012 में जया बच्चन के राज्यसभा की सदस्यता में दिए एफिडिवेट के मुताबिक जया के पास 100 करोड़ रुपए की चल अचल संपत्ति थी और अमिताभ बच्चन के पास करीब 500 करोड़ की संपत्ति. आज इसमें कई गुना का इजाफा हुआ होगा.

मुश्किलें सिर्फ आम लोगों के जीवन में नहीं आती ये अमिताभ जैसी महान शख्सियतों की जिंदगी में भी आती हैं. नियति को उसी के खेल में चकमा देकर भी कोई महानायक बनता है. अमिताभ बच्चन इसके उदाहरण हैं.

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