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Exclusive: कब तक अश्लील साहित्य को छुपाकर पढ़ते रहेंगे ? – श्रद्धा सिंह

श्रद्धा सिंह की किताब ‘द गिल्ट पास’ इन दिनों जमकर वायरल हो रही है, जो पति-पत्नी के विवाहेत्तर संबंधों का खुलासा करती है

Hemant R Sharma Hemant R Sharma Updated On: Nov 29, 2017 03:28 PM IST

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Exclusive: कब तक अश्लील साहित्य को छुपाकर पढ़ते रहेंगे ? – श्रद्धा सिंह

हम तुम

तुम हम

हमारी

आधी टूटी

पूरी टूटी

बातों के बीच

छुपा छुप्पी खेले

या साजिश साजिश?

ये चंद लाइनें उतनी तीखी तो नहीं, फिर भी इन्हें पढ़कर ये सवाल तो उठता ही है कि जीवन पर पल-पल एक दूसरे के साथ रहने वाले पति-पत्नी क्या जीवन भर अपने साथी के प्रति वफादार होते हैं? कुछ लोग इस सवाल का जवाब हां में जरूर दे सकते हैं लेकिन उनके दिल में फिर भी झूठ बोलने का गिल्ट यानी अपराधबोध जरूर रह जाएगा. फिर इस अपराधबोध को दबाकर वो जीवन भर खुशी की जिंदगी कैसे जी सकेंगे?  विवाहेत्तर संबंधों पर लेखक श्रद्दा सिंह की किताब ‘द गिल्ट पास’ कुछ ऐसे ही गंभीर सवालों का जवाब है.

The Guilt Pass (1)

ये किताब इन दिनों मोबाइल ऐप juggernaut पर इतनी तेजी से वायरल हो चुकी है कि रीडर्स श्रद्धा से इसके अगले संस्करण की भी खूब मांग कर रहे हैं. पेशे से मुंबई के एक रेडियो स्टेशन  ‘इश्क’ की प्रोग्रामिंग हेड श्रद्धा शहरी जीवन और उसके चैलैंजेस को लेकर बड़ी बेबाक राय रखती हैं. उनका साफ कहना है कि शहरों में ऐसे शादीशुदा जोड़ों की संख्या न के बराबर होती है जो जीवनभर एक ही साथी के साथ सेक्सुअल रिलेशनशिप में रहते हैं. हां, समाज के डर से वो इन कामों को चोरी छुपे करते रहते हैं, और जीवन भर उनका खुलासा ना करने की टीस उनके मन को हमेशा कचोटती रहती हैं.

श्रद्धा दावा करती हैं कि हर शादीशुदा जिंदगी की एक अनकही कहानी होती है. जो बहुत मुश्किल से लोगों के सामने आ पाती है. काफी बार इसका पता करीबी लोगों को होता है लेकिन वो समाज के डर से सीमित लोगों के बीच ही इस तरह की बातें करते हैं.  कुछ ऐसा ही हाल इरॉटिका का भी है. अश्लील साहित्य इस समाज का हिस्सा सैंकड़ों सालों से है और आगे भी हमेशा रहेगा फिर भी इसे हमेशा से ही बुरा माना गया है. सबसे ज्यादा रस लोगों को अश्लील साहित्य पढ़ने में आता है, इसे वो अपने दोस्तों के बीच मानते भी हैं. फिर भी वो ही लोग एक तबके से डरकर इसे खुलकर स्वीकार करने से हिचकिचाते हैं.

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श्रद्धा मानती हैं कि अब वक्त बदल रहा है. लोग खुलकर इस साहित्य को अपनाने लगे हैं और स्वीकार भी करने लगे हैं. डिजिटल प्लेटफॉर्म ने इसे आकर काफी कुछ बदल दिया है. श्रद्धा कहती हैं कि वो अपने कॉलेज के दिनों से ही इन किताबों को पढ़ती थीं लेकिन तब वक्त ऐसा था कि इसे फिजिक्स की किताब के बीच में छुपाकर पढ़ना पड़ता था. इसी मिथक को तोड़ने के लिए श्रद्धा ने फैसला किया कि वो इसका खुलकर प्रचार भी करेंगी और खुद अपने विचारों को अपनी कल्पनाओं को कलम के सहारे पन्नों पर जरूर उतारेंगी.

श्रद्धा मानती हैं कि इरॉटिका अब तक वर्जनाओं की वजह से पुरुष लेखकों की मुट्ठी में रहा है, लेकिन अब महिलाएं भी खुलकर इसमें अपनी हिस्सादारी चाहती हैं ताकि उनके रचनात्मकता को भी लोगों के पास पहुंचे और जैसे बॉलीवुड को महिला डायरेक्टर्स-राइटर्स ने नए पंख दिए हैं कुछ वैसा ही यहां भी होने जा रहा है.

जगरनॉट ने उन्हें मौका दिया ऐसा ही कुछ लिखने का जो उन्होंने द गिल्ट पास के रूप में निखारा. अक्टूबर में डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई उनकी ये बुक काफी वायरल हो चुकी है और इसके अगले संस्करण के लिए उनके पास संदेश आने भी शुरू हो चुके हैं. जल्दी है श्रद्धा उस पर काम शुरू करने जा रही हैं.

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