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बॉलीवुड का दीवाना मिस्र, जिसका कभी न हारने वाला शहर अल काहिरा जिंदा है

तारीफ के काबिल है वह मिस्र जिसने कट्टर ताकतों को नकारा. जहां फंडामेंटल ग्रुप हमेशा दबे छुपे रहने को मजबूर रहे हैं

Updated On: Oct 13, 2018 10:11 AM IST

Naghma Sahar Naghma Sahar

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बॉलीवुड का दीवाना मिस्र, जिसका कभी न हारने वाला शहर अल काहिरा जिंदा है

तुझे देखा तो ये जाना सनम, प्यार होता है दीवाना सनम...

ये गाना मेरे ज़ेहन में काजोल की नहीं बल्कि एक मासूम मिसरी लड़की की तस्वीर सामने लाता है और मिस्र की राजधानी काहिरा के एक दोपहर की याद दिलाता है. वो काहिरा का पुराना इलाका था, कॉप्टिक कायरो, जहां ईसाईयों की आबादी ज्यादा है और इसा मसीह से जुडी यादें मौजूद हैं.. हम चंद हिन्दुस्तानी पत्रकार मिस्र की सरकार के बुलावे पर बहार ए अरब के बाद फिर से खड़े होते मिस्र की सूरत को दुनिया के सामने रखने के मकसद से मिस्र गए थे.

उस दिन जब कॉप्टिक कायरो से कुछ दूरी पर काहिरा की गर्म दोपहर में हम अपनी कार में बैठने जा रहे थे, एक स्कूल जाती बच्ची अबाया भागती हुई हमारे पास आई और हमसे कुछ अरबी लहजे में अंग्रेजी बोलते हुए पुछा- इंडिया?.. मुझसे दोस्ती करोगे... हमारे हां कहते ही उसकी आंखें चमक उठीं. इंडिया उसके लिए वो देश था जहां का सिनेमा उसे परियों की दुनिया दिखाता था. जिसे देख कर उसने कुछ हिंदी सीखी थी. जहां के हीरो हिरोइन की वो दीवानी थी.... और गाने लगी, तुझे देखा तो ये जाना सनम... शाहरुख खान... मुझे लगा दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे वाकई हर पैमाने पर हिट थी.

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ये कमाल है बॉलीवुड का. यहां सलमान खान के फैंस का बनाया हुआ एक सलमानियाक ग्रुप भी है. इजिप्ट बॉलीवुड को बेइंतहा चाहता है. फिल्मों के पर्दे से जो रिश्ता जुड़ा है, जिससे इजिप्ट के लोग इतने मानूस हैं.

मिस्र में काहिरा की सड़कों पर हिंदुस्तान के लोगों के लिए, हिंदी फिल्मों के लिए और वहां के एक्टर्स के लिए जो दीवानगी मैंने देखी उसकी उम्मीद नहीं थी. काहिरा खुद आज और गुज़रे कल में लिपटा है. शीशे के धुंए में घुलता सा, जो मिस्र में सबसे आम मंजर है. मिस्र की राजधानी काहिरा का सबसे पुराना बाजार- खान ए खलीली... यह वह अकेली जगह होगी जो घटते टूरिज्म के दौर में भी खचाखच लोगों से भरी है.

एक शाम खान ए खलीली में...

हम मिस्र के आज के दौर के सबसे जाने माने लेखक नजीब महफूज की नॉवेल कायरो ट्रायलजी से मशहूर हुए कैफे अल फिशावी की तरफ बढ़ रहे हैं. अल फिशावी बहुत पुराना है. लोग यहां के माहौल और मूड के लिए आते हैं. रह रह कर इधर उधर से आवाज आती है, इंडिया.. इंडिया. जी हां हम इंडिया से हैं... ओ अमिताभ बच्चन... शाहरुख खान... मुझे इस बात का अंदाजा तो था कि अमिताभ बच्चन सदी के महानायक हैं. बेइंतहा मशहूर हैं. लेकिन यह अंदाजा नहीं था कि इजिप्ट में भी वे ही हमारी पहचान होंगे.

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इस दौरे में मैंने महसूस किया भारत का सॉफ्ट पॉवर... उसकी संस्कृति, कला, योग सब लोगों पर हावी था... हिन्दुस्तानियों के लिए एक ख़ास मोहब्बत थी.

hotel

मिस्र अरब का सबसे ज्यादा आबादी वाला मुल्क है. जहां निवेशक और बैंक भी अब पैसे लगा रहे हैं. खुशहाली लौट रही है और कई सामाजिक बदलाव भी हुए हैं. नए संविधान में औरत और मर्द को तलाक के मामले में बराबरी का हक दिया है.

मुल्क उम्मीदों से भरा है. चरमराई अर्थव्यवस्था के बीच उम्मीद की खुशबू है. विदेशी मुद्रा की कमी है. इकानॉमी की बुरी हालत की एक बड़ी वजह टूरिज्म में कमी है. गीजा के पिरामिड छुट्टियों के दिन भी खाली पड़े हैं. दुकानों के सामने गर्द ओ गुबार से भरे बेली डांस के कॉस्ट्यूम और इजिप्ट का परंपरागत पहनावा गलआबेया टंगा है. दुकानें टूरिस्टों के लिए सजी हैं, जो इक्के-दुक्के ही नजर आते हैं. तभी कायरो के नेशनल म्युजियम में बादशाह तुतनखामन के साथ हम जितना चाहें उतना वक्त गुजार सकते हैं.

नई उम्मीदों का देश है मिस्र:

सियासत की उठापटक देखने के बाद मिस्र में नयी सरकार बनी, जिसमें 89 औरतें हैं और मिस्र नए लोकतंत्र की आदत डाल रहा है. मिस्र को अपनी पुरानी उदार तारीख पर फख्र है. उस तहजीब उस सभ्यता पर फख्र है जहां फराओन हुए तुतनखमन जैसे, नेफरतीती और क्लियोपैट्रा ने जहां राज किया, वह तहजीब जिसने दुनिया को लिखने की कला दी.

tahrir square

मिस्र की राजधानी काहिरा की कई यादें हैं जो बदलते मिस्र की तस्वीर भी हैं और इस बदलाव के दौर में बहार ए अरब के दौर की घबराहट सरकार में अब भी है. मिसाल के तौर पर एक बग़ावत का दूसरा नाम बन चुके तहरीर स्क्वायर की एक घटना.

हम चंद भारतीय पत्रकार एक खुशगवार शाम तहरीर स्कवायर गए. बिल्कुल वैसी शाम थी जैसी इंडिया गेट पर होती है. औरतें, बच्चे, गुब्बारे वाले, कहवा पीते लोग... लेकिन हम शूट करते और लोगों से बातें करते देख लिए गए थे. अचानक सादा कपड़ों में आकर कुछ लोग सवाल जवाब करने लगे कि हम क्यों लोगों से बात कर रहे हैं. पुलिस वाले आ गए और हमें सीनियर अफसरों के पास ले जाया गया. सरकारी बुलावे का कार्ड दिखाने के बाद हमें जाने दिया गया हालांकि उस पूरी शाम पुलिस की परछाई हमारे पीछे रही.

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हमें हसनैन महमूद मिले जो इतिहास के छात्र और गाइड हैं. उन्होंने बताया कि मिस्र के लोग एक ऐसी सरकार चाहते हैं जो हमारी आज की जरूरतें पूरी करे. हसनैन कहते हैं कि मजहब हमारे और खुदा के बीच की बात है. सरकार को फैक्ट्री, नौकरियों की फिक्र होनी चाहिए. मजहब की नहीं. यह आवाज उस इजिप्ट में आज भी आबाद है जहां बड़ी तादाद में सलाफी हैं. जहां 1928 में मुस्लिम ब्रदरहुड पैदा हुआ. जिसने कई और कट्टर मुस्लिम संगठनों को जन्म दिया. तारीफ के काबिल है वह मिस्र जिसने कट्टर ताकतों को नकारा. जहां फंडामेंटल ग्रुप हमेशा दबे छुपे रहने को मजबूर रहे हैं.

आज के मिस्र में लड़कियां जीन्स पहने नजर आती हैं. नील के किनारे नौजवान जोड़ों का रोमांस भी नजर आता है जैसे टेम्स या सीन का किनारा हो. और देर रात तक भीड़ भाड़ वाले कॉफी हाउस में शीशा पीते, हर फिक्र को धुएं में उड़ाते, औरत और मर्द नजर आते हैं.

अल काहिरा... वह कभी न हारने वाला शहर जिंदा है.

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