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बेमिसाल 'बेजुबान' जुड़वां भाई-बहन: मरने के बाद कब्र की उम्मीद नहीं, बटोर रहे हैं 'मेडल'

बाबे विस्फोटक खोजने की महारथी है और बाबू अपराधियों को पहचान कर उन्हें दबोचने की काबिलियत रखता है

Updated On: Mar 18, 2018 09:23 AM IST

Sanjeev Kumar Singh Chauhan Sanjeev Kumar Singh Chauhan

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बेमिसाल 'बेजुबान' जुड़वां भाई-बहन: मरने के बाद कब्र की उम्मीद नहीं, बटोर रहे हैं 'मेडल'

भाई-बहन की यह जोड़ी 'बेजुबान' है तो क्या हुआ..दिमाग, मेहनत-मशक्कत, काबिलियत और बहादुरी की 'नजीरें' पेश करने में ये इंसानों की तुलना में किसी भी नजरिए से कम नहीं हैं. इंसान के प्रति वफादारी की ड्यूटी निभाते-निभाते जान तक गंवा देने में इन्हें कभी कोई गुरेज नहीं.

यह अलग बात है कि नौकरी के काबिल शरीर में ताकत रहने तक इन्हें रहने को एयरकंडीशंड आलीशान इमारतें मुहैया कराई जाती हैं...मरने के बाद 'सुपुर्दे-खाक' होने के वास्ते एक अदद अपना कब्रिस्तान भी इन्हें नसीब हो पाएगा या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं. इसके बाद भी इन बेजुबान भाई-बहन की यह जोड़ी स्वर्ण और कांस्य पदक बटोरने में जुटे हैं. जी हां यही है हैरतअंगेज मगर अविश्वसनीय सच यही है.

जानिए आखिर हैं कौन ये बेजुबान बाबू और बाबे

अद्वितीय प्रतिभा के धनी बेजुबान भाई-बहन की यह जोड़ी दिल्ली पुलिस के डॉग स्क्वॉड (मॉडल टाउन स्थित दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के अधीन संचालित डॉग सेंटर मुख्यालय) सेंटर में तैनात डॉग्स हैं. दोनों का जन्म 24 अप्रैल 2014 को इंडियन आर्मी के मेरठ स्थित प्रजनन केंद्र में हुआ था. यह अलग बात है कि लेब्राडोर नस्ल की बहन बाबे ने एक साल पहले यानी 30 मार्च 2016 को और भाई बाबू ने ठीक एक साल बाद ट्रेनिंग पूरी होने पर 30 मार्च 2017 को दिल्ली पुलिस ज्वाइन की.

दोनों बेजुबान जुड़वां हैं. नस्ल एक ही है. जन्म स्थान भी एक ही (मेरठ स्थित भारतीय सेना का प्रजनन केंद्र) हैं. इसके बाद भी पुलिस महकमे में काम करने के लिए इन्हें ड्यूटी अलग-अलग मिली है. बाबे विस्फोटक खोजने की महारथी है और बाबू अपराधियों को पहचान कर उन्हें दबोचने की काबिलियत रखता है.

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पुलिस की ड्यूटी में भाई बहन ने रच दिया इतिहास

जब से दिल्ली पुलिस में डॉग स्क्वॉड (सन् 1960) सेंटर की स्थापना हुई है, तब से इस महकमे से हजारों कुत्ते नौकरी करके जा चुके हैं. इस भीड़ में मगर इस जुड़वां भाई-बहन ने अलग पहचान लिखवाकर खुद के लिए और पुलिस महकमे के लिए 'नजीर' कायम की है. दिल्ली पुलिस डॉग स्क्वॉड सेंटर का जो स्वर्णिम इतिहास बाबू ने लिखा है, दिल्ली पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक वो अब तक किसी भी डॉग ने नहीं लिखा था.

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बाबू ने चेन्नई (तमिलनाडु) में 25 फरवरी 2018 से 2 मार्च 2018 तक आयोजित ऑल इंडिया पुलिस मीट-2017 में 'ट्रैकिंग' कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता है. जबकि बाबू की बहन बाबे ने एक्सप्लोसिव कैटेगरी में कांस्य पदक हासिल किया.

बेजुबान भाई बहन की जोड़ी ने कुछ ऐसे कमाल किए

चेन्नई में आयोजित पुलिस मीट में देश भर की पुलिस और पैरा-मिलिट्री वर्ग से शामिल हजारों काबिल कुत्तों को पछाड़ते हुए बाबू ने एक किलोमीटर तक संदिग्ध अपराधी का पीछा किया और उसे दबोच लिया. जबकि विस्फोटक सूंघने में माहिर बहन बाबे ने छिपाकर रखे गए एक्सप्लोसिव तक पुलिस को पहुंचाकर हैरत में डाल दिया. बेजुबान भाई-बहन की काबिलियत यह रही कि इन्हें जो टास्क दिए गए, उन्हें बाकी तमाम डॉग्स की तुलना में कम समय में ही पूरे कर दिए.

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गद्गद् हो गए दिल्ली पुलिस के आला-अफसरान

बेजुबान भाई-बहनों ने देश की तमाम फोर्सेज और बाकी राज्यों की पुलिस के सामने स्वर्णिम सफलता का जो सेहरा बंधवाया, उसे महसूस करके दिल्ली पुलिस महकमे के सिपाही-हवलदार से लेकर पुलिस आयुक्त भी फूले नहीं समा रहे हैं. दिल्ली पुलिस के इतिहास में यह शायद पहला मौका होगा, जब किन्हीं डॉग्स के 'गुडवर्क' के लिए पुलिस मुख्यालय को सजाया गया था. दिल्ली पुलिस आयुक्त अमूल्य पटनायक, दिल्ली पुलिस डॉग स्क्वॉड प्रभारी डीसीपी राजन भगत खुद इन जैसे बेजुवानों के सम्मान समारोह की तैयारियों में जुटे थे.

ऐसा इनाम-इकराम कभी किसी डॉग की झोली में नहीं

डॉग स्क्वॉड सेंटर इंचार्ज सब-इंस्पेक्टर धरमवीर सिंह के मुताबिक, वे 30-31 साल से सेंटर में तैनात हैं. जैसा सम्मान इन दोनों भाई-बहन ने दिलवाया, वैसा सम्मान दिल्ली पुलिस को कभी कोई और डॉग नहीं दिलवा पाया. गोल्ड मेडल जीतकर लाने वाले डॉग बाबू के हैंडलर कांस्टेबिल पवन कुमार भी खुश हैं. खुशी का यही आलम कमोबेश कांस्य पदक जीतने वाली बाबे के हैंडलर हेड-कांस्टेबिल नागेंद्र कुमार का है.

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पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने भी इन बेजुबानों की इस सफलता पर खुलकर सरकारी खजाना बांटा. बाबू को गोल्ड मेडल के बदले जहां 50 हजार नकद, वहीं उसकी बहन बाबे को 25 हजार नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र दिया गया.

ऐसे बंटेगी इनाम की धनराशि

दिल्ली पुलिस आयुक्त की ओर से मिली नकद इनामी राशि डॉग्स और उनके हेंडलर्स को मिलेगी. जबकि इस पुलिस मीट में गए टीम के बाकी सदस्यों को अलग से नकद राशि पुलिस आयुक्त द्वारा दी गई है. डॉग स्क्वॉड प्रभारी धरमबीर सिंह को 6 हजार के अलावा बाकी टीम मेंबर्स हवलदार दीवान सिंह, सरबजीत सिंह, सिपाही विशाल सिंह सहित सभी को 2500-2500 रुपए की नकद धनराशि बतौर ‘रिवार्ड-मनी’ दी गयी है.

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जो भी हो बेजुबानों ने जुबान वालों की भी जिंदगी बदल दी

अमूमन पुलिस महकमे में गुडवर्क का पूरा श्रेय इनाम-इकराम अब तक के इतिहास में पुलिसकर्मियों और आला-अफसरों को ही नसीब होता था. यह पहला मौका है जब बेजुबान डॉग्स की इस जोड़ी ने पुलिस कर्मियों की भी जिंदगी में चार-चामद लगा दिये हों. इन बेजुबानों की खातिर ही इनके साथ साथ पुलिसकर्मियों (हैंडलर, स्क्वॉड इंचार्ज आदि) को भी नकद धनराशि, नौकरी में अच्छी एसीआर और प्रशस्ति पत्र नसीब हो सके हैं.

अंत में अपनी कब्र को जगह नसीब होगी नहीं मालूम

गोल्ड मेडल, पुलिस मुख्यालय में कमिश्नर साहब द्वारा अकूत मान-सम्मान, आने वाली पीढ़ियों के लिए दिल्ली पुलिस के इतिहास में नए और स्वर्णिम अध्याय को लिखवा देने के बाद भी आज एयरकंडीशनर में रहने वाले इन बेजुबानों की एक चिंता आने वाले कल के लिए बदस्तूर बनी हुई है. और वह चिंता है कि, दिल्ली पुलिस के पास इन काबिल-ए-तारीफ डॉग्स की ड्यूटी के दौरान मरने पर उन्हें दफनाने के लिए कब्रिस्तान के वास्ते स्थान नहीं है. जबकि जब तक यह डॉग्स पुलिस की ड्यूटी करेंगे मतलब नौकरी में रहेंगे इन्हें करोड़ों रुपए की आलीशान एयरकंडीशंड इमारतों में महफूज रखा जाएगा.

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