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राजीव गांधी पुण्यतिथि विशेष: जिंदगी से ज्यादा जिनकी मौत विवादों में रही

राजीव गांधी की मौत एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी जिसपर आज भी विवाद खड़े होते रहे हैं

FP Staff Updated On: May 21, 2018 08:15 AM IST

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राजीव गांधी पुण्यतिथि विशेष: जिंदगी से ज्यादा जिनकी मौत विवादों में रही

देश के पूर्व प्रधानमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव गांधी की आज पुण्यतिथि है. राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ. 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरमबदूर में दिल दहला देने वाले एक बम विस्फोट में उनकी हत्या कर दी गई.

इंदिरा गांधी के बेटे रहे राजीव गांधी देश के छठवें और सबसे युवा प्रधानमंत्री थे. ऐसा कहा जाता है कि राजीव गांधी की मौत एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी जिसपर अभी भी विवाद होते रहे हैं. उस हत्याकांड में शामिल आरोपी फिलहाल जेलों में बंद हैं जिनकी रिहाई पर भी राजनीति होती रही है.

बेल्ट बम पर विवाद

राजीव गांधी हत्याकांड में एक आरोपी का नाम रविचंद्रन है जो श्रीलंका का नागरिक है. इसने अपनी किताब में एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए विवाद खड़ा कर दिया कि पूर्व प्रधानमंत्री की हत्या के लिए उपयोग में लाया गया ‘बेल्ट बम’ भारत में ही बनाया गया था.

रविचंद्रन राजीव गांधी हत्याकांड में आरोपी नंबर 16 है. इसपर आरोप हैं कि उसने हमलावरों को टेक्निकल मदद पहुंचाई थी. अपनी पुस्तक में रविचंद्रन ने खुलासा किया है कि श्रीपेरमबदूर में 21 मई 1991 को चुनावी जनसभा के दौरान राजीव गांधी की हत्या के लिए इस्तेमाल में लाए गए ‘बेल्ट बम’ का निर्माण भारत में किया गया था.

Rajiv Gandhi

रविचंद्रन ने यह भी बताया है कि बेल्ट बम बनाने में आरडीएक्स सहित चार और तरह के विस्फोटकों का इस्तेमाल हुआ. मदुरै जेल में बंद रविचंद्रन की मौत की सजा को सुप्रीम कोर्ट ने आजीवन कारावास में बदल दिया था.

रामचंद्रन के इस खुलासे के बाद अक्सर यह विवाद होते रहे हैं कि बेल्ट बम अगर भारत में बना तो इसके पीछे मुख्य साजिशकर्ता कौन लोग रहे. जैसाकि हम सभी जानते हैं, अभी हाल के वर्षों तक श्रीलंका में आतंकी हमले हो रहे थे जिसके पीछे लिट्टे का हाथ बताया जाता है. लिट्टे तमिल समर्थक आतंकी संगठन है जिसका अब लगभग खात्मा हो चुका है.

लिट्टे का मामला सुलझाने का खामियाजा?

अस्सी के दशक में श्रीलंका में हो रहे आतंकी हमले का मुद्दा सुलझाने के लिए राजीव गांधी ने अहम कदम उठाए जिसके चलते उनके कई लोग दोस्त और दुश्मन भी बन गए थे. कहा जाता है कि इसी साजिश में 21 मई 1991 को श्रीपेरमबदूर में उनपर मानव बम से हमला कर उनकी हत्या कर दी गई.

राजीव गांधी पर यह हमला तब हुआ जब वे तमिलनाडु में चुनाव प्रचार कर रहे थे. बेइंतहां दुख की ऐसी घटना गांधी परिवार में दूसरी थी क्योंकि इससे पहले उनकी मां इंदिरा गांधी की भी खालिस्तानी आतंकियों ने हत्या कर दी थी.

तमिल वोटबैंक के लिए दोषियों का इस्तेमाल?

घटना 2014 की है. लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तमिलनाडु में तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता ने राजीव गांधी हत्याकांड के दोषियों को रिहा करने का फैसला किया. कांग्रेस इसका मुखर विरोध इसलिए नहीं कर पाई क्योंकि मामला तमिल वोटबैंक का था.

उस वक्त तमिल राजनीति का ही तकाजा था कि एआईएडीएमके की धुर-विरोधी रही डीएमके को जयललिता के फैसले का सम्मान करते हुए केंद्र से दोषियों की रिहाई का रास्ता साफ करने की मांग करनी पड़ी. अकेली कांग्रेस फैसले को लोकलुभावन बताकर विरोध करती.

Workers of India's main opposition Congress party carry a poster of former prime minister Rajiv Gandhi and shout anti-government slogans during a protest rally in New Delhi on November 29. More than 10,000 Congress supporters were demonstrating againt the inclusion of Gandhi's name in a list of people charged with wrongdoing in a 1986 deal to purchase artillery made by Sweden's Bofors Group.

तब इस बात पर काफी विवाद हुआ कि क्या पार्टियों को वोटबैंक की चिंता इस गहरी लालच में धकेल सकती है जो किसी प्रधानमंत्री के हत्या के दोषियों को रिहा करा वोट पाने की मंशा पाली जाए?

आरोपमुक्ति और बरी होने पर विवाद

अगली घटना 11 मई 1999 की है. तब सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने नलिनी, संथम, मुरुगन, पेरीवलन को फांसी की सजा को बरकरार रखते हुए मामले के अन्य दोषी रॉबर्ट पायस, जयकुमार, रविचंद्रन की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया. कोर्ट ने इसकी वजह दया याचिका के निस्तारण में हुई देरी को बताया.

विवादों में यह बात रही कि तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सभी दोषियों की दया याचिका खारिज कर दी थी. इसके बावजूद इस जघन्य हत्याकांड के दोषियों को फांसी नहीं दी जा सकी.

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