S M L

नवाज़ शरीफ से पहले भी पाकिस्तान के एक PM को मिली थी सजा, आरोप हत्या के षड्यंत्र का था और सजा थी फांसी

पूर्व प्रधान मंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो को तो 4 अप्रैल 1979 को फांसी पर लटका दिया गया था. उन पर एक हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप था

Updated On: Jul 09, 2018 07:22 AM IST

Surendra Kishore Surendra Kishore
वरिष्ठ पत्रकार

0
नवाज़ शरीफ से पहले भी पाकिस्तान के एक PM को मिली थी सजा, आरोप हत्या के षड्यंत्र का था और सजा थी फांसी
Loading...

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को तो सिर्फ 10 साल की सजा हुई है. उन पर भ्रष्टाचार का आरोप है. लेकिन एक अन्य पूर्व प्रधान मंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो को तो 4 अप्रैल, 1979 को फांसी पर लटका दिया गया था. उन पर एक हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने का आरोप था. भुट्टों के आखिरी शब्द थे, ‘या खुदा, मुझे माफ करना मैं बेकसूर हूं.’

भुट्टो की गिरफ्तारी के समय न सिर्फ भुट्टो की पिटाई की गई थी, बल्कि फांसीघर तक उन्हें स्टेचर पर लाद कर जबरन ले जाया गया था. उससे पहले की रात में वो लगातार रोते रहे.

उससे पहले माफी की अनेक देशों की अपील को फौजी तानाशाह जिया उल हक ने ठुकरा दिया था. भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने पाकिस्तान का आंतरिक मामला कहकर माफी की अपील नहीं की. लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपील की थी.

बेनजीर भुट्टो ने किया है मार्मिक वर्णन

जिया-उल-हक की 1988 में जब विमान दुर्घटना में मौत हो गई तो भी यह आशंका जताई गई थी कि उसके पीछे कोई षड्यंत्र था. हालांकि कुछ साबित नहीं हुआ. अपने पिता की गिरफ्तारी के समय के दृश्य का वर्णन बेनजीर भुट्टो ने इन शब्दों में किया है. ‘जागो, जागो, कपड़े पहनो, जल्दी’ मेरी मां ने चीखकर कहा और भाग कर मेरे कमरे में आई कि मेरी बहन को जगा दें. फौज ने कब्जा कर लिया है. कुछ ही मिनटों में मैं अपनी मां के कमरे में आ गई, बिना यह समझे कि आखिर हुआ क्या है... हमला? यहां हमला कैसे हो सकता है? पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और विपक्ष के बीच एक समझौता हो चुका है. अभी कल ही की तो बात है. और अगर फौज ने तख्ता पलट दिया हो तो क्या फौजी अब तक ड्र्रामा कर रहे थे? जनरल जिया और फौज के दूसरे कमांडर अभी दो दिन पहले ही तो मेरे पिता के पास आकर अपनी वफादारी का वादा करके गए हैं.’

ये भी पढ़ें: 'लैटरल इंट्री' की जरूरत समझनी हो तो पीएस अप्पू की 1984 की टिप्पणियां जान लें

बेनजीर के अनुसार, 'मेरे पिता फोन पर फौज प्रमुख जनरल जिया और मंत्रियों से बात कर रहे हैं. तब तक फौज यहां पहुंच चुकी थी. सैनिक आए और मेरे पिता को पीटते हुए बाहर ले गए. मैंने देखा कि बाहर फौजियों के सिगार चमक रहे थे और उनके हंसी-ठट्ठे की आवाज अंदर तक आ रही थी. मैं अंदर अपनी बहन के साथ बातचीत कर रही थी. जब मेरे पिता की बात फ्रंटियर के गवर्नर से हो रही थी तभी फोन का कनेक्शन कट गया था.

'मेरी मां का चेहरा घबराहट से पीला पड़ गया. इससे पहले एक पुलिस वाले ने फौज को हमारे प्रधान मंत्री आवास को घेरते हुए देखा था. वह अपनी जान का जोखिम उठाते हुए किसी तरह छिपते-छिपाते हमारे दरवाजे तक आया और उसने हमारे नौकर उर्स से हड़बड़ाहट भरी आवाज में धीमे से कहा, भुट्टो साहब को खबर कर दो कि फौज उनको मार डालने के लिए बढ़ रही है. वह तुरंत कहीं हिफाजत से छिप जाएं.'

भुट्टो ने कहा था- उन्हें आने दो

'मेरे पिता ने यह खबर पूरे धीरज से सुनी और कहा कि मेरी जिंदगी खुदा के हाथ में है. उन्होंने उर्स से कहा कि फौज मेरी जान लेने आ रही है तो आए मेरे छिपने का कोई सवाल नहीं है. इसकी भी कोई जरूरत नहीं है कि तुम लोग उन्हें रोको. उन्हें आने दो.'

प्रधानमंत्री मुख्य सेनापति से बात करना चाहते हैं. मेरे पिता ने सनम का फोन इस्तेमाल करते हुए कहा. जिया तुरंत फोन सुनते हैं. जिया मेरे पिता से कहते हैं, ‘सर,मुझे अफसोस है, लेकिन यह मुझे करना पड़ा. मुझे आपको अभी बस कुछ समय के लिए हिरासत में लेना पड़ रहा है. लेकिन तीन महीने में मैं दोबारा चुनाव करवाऊंगा और आप फिर प्रधानमंत्री बनेंगे और मैं आपको सलाम करूंगा . अब मेरे पिता समझ गए कि इस फसाद के पीछे कौन है.'

ये भी पढ़ें: सुरक्षा नियमों की अवहेलना से जा चुकी हैं कई महत्वपूर्ण हस्तियों की जानें

'मेरे पिता का चेहरा फोन रखते समय कठोर हो गया. मेरे भाई मीर और शाहनवाज तेजी से कमरे में आते हैं. मीर कहता है कि हम मुकाबला करेंगे. पिता जवाब देते हैं कि नहीं, फौज से कभी मत उलझना. जनरल हमें मार डालना चाहता है. हमें उन्हें कोई बहाना नहीं देना चाहिए. मुझे दो साल पहले हुई मुजीब की हत्या याद आती है.'

'मां ने कुछ पैसे देकर मेरे भाइयों से कहा कि तुम लोगों को सुबह कराची निकल जाना है. अगर हम शाम तक नहीं पहुंचे तो तुम लोग पाकिस्तान से बाहर चले जाना.'

आखिरकार जुल्फिकार भुट्टो गिरफ्तार कर लिए गए. जाने से पहले बेनजीर ने चिल्लाकर हाथ हिलाते हुए बदहवासी में कहा, ‘अलविदा पापा’, कार में सवार भुट्टो पीछे मुड़कर देखते हैं और मुस्कराते हैं.

'जीने के लिए इंसाफ के लिए चाहिए जिंदगी'

अक्टूबर, 1977 में जुल्फिकार अली भुट्टो के खिलाफ हत्या का मुकदमा शुरू किया गया. मुकदमा लोअर कोर्ट में नहीं सीधे हाईकोर्ट में शुरू हुआ. उन्हें फांसी की सजा मिली. सुप्रीम कोर्ट ने भी बहुमत निर्णय में फांसी की सजा बहाल रखी. अप्रैल, 1979 में रावलपिंडी जेल में उन्हें फांसी से लटका दिया गया. इससे पहले बेनजीर ने जेल में अपने पिता से मिलकर उन्हें बताया था कि कितने देशों ने दया की अपील पाकिस्तानी हुक्मरानों से की है.

ये भी पढ़ें: आपसी मतभेद से कांग्रेस का विकल्प नहीं बन सकी सोशलिस्ट पार्टी

अनेक देशों ने भुट्टो के प्रति नरमी बरतने के लिए जिया से अपील की. लेकिन जिया ने दया नहीं दिखाई. भुट्टो ने अपने बचाव में अदालत में कहा था कि ‘मुझे अपनी पैरवी जुल्फिकार अली भुट्टो को बेकसूर साबित करने के लिए नहीं करनी है. मैं यह बात गहराई से सोचने के लिए सामने लाना चाहता हूं कि यह मुकदमा एक भोड़ी बदशक्ल नाइंसाफी का उदाहरण बन गया है. हर कोई जो हाड़-मांस का पुतला है, उसे एक दिन जरूर दुनिया से जाना है. मैं जीने के लिए जिंदगी नहीं चाह रहा हूं.मैं इंसाफ मांग रहा हूं.’

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

0
Loading...

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
फिल्म Bazaar और Kaashi का Filmy Postmortem

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi