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'मर्दानगी' के लिए नुकसानदेह है गाय का दूध

जिस तरीके से दूध और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट निकाले जा रहे हैं वो पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर बुरा असर डाल रहा है

Updated On: Jan 25, 2018 02:17 PM IST

Maneka Gandhi Maneka Gandhi

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'मर्दानगी' के लिए नुकसानदेह है गाय का दूध

मैंने अखबारों में पढ़ा कि अमेरिका के डॉक्टरो ने लोगों को अजब सलाह दी है. डॉक्टरों ने कहा है कि जो भी मर्द पिता बनना चाहते हैं, वो 25 बरस की उम्र से पहले अपने स्पर्म सुरक्षित रखवा दें. क्योंकि हर छठवां पुरुष आगे चलकर बच्चे पैदा करने के काबिल नहीं रह जाता.

मैंने अपने पिछले लेखों में इस बात का जिक्र किया था कि एनिमल फैट से पुरुषों के स्पर्म पर बुरा असर पड़ता है. वैसे तो यही बात जानकर पुरुषों को एनिमल फैट और डेयरी उत्पादों के इस्तेमाल से दूरी बना लेनी चाहिए थी. लेकिन अगर वो फिर भी ऐसा नहीं करना चाह रहे हैं, तो मैं उन्हें कुछ और वजहें बता देना चाहती हूं.

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ओस्ट्रोजेन, महिलाओं का प्रमुख सेक्स हारमोन है. इसकी बड़ी तादाद अंडों और डेयरी उत्पादों में मिलती है. जिन्हें अलग से ये हारमोन लेने की जरूरत होती है, उनके लिए अंडों और डेयरी उत्पादों से निकालकर ही एस्ट्रोजन को खाने के लिए तैयार किया जाता है. इसकी वजह से ही उन पुरुषों में भी महिलाओं वाले इस हारमोन की बहुतायत हो जाती है, जो बहुत ज्यादा अंडे या डेयरी उत्पाद खाते हैं. मर्दों के शरीर में ओस्ट्रोजेन की मात्रा बढ़ने की वजह से उनके शरीर में महिलाओं वाले लक्षण पैदा होने लगते हैं. जैसे कि आवाज पतली होने लगती है. स्तनों का आकार बढ़ने लगता है. सेक्स संबंधी कई और बीमारियां भी होने लगती हैं.

दूध निकालने का तरीका गलत

आज के दौर में जिस तरह से डेयरी उद्योग चल रहे हैं, वो तो पुरुषों के लिए और भी नुकसानदेह हैं. आज 75 फीसद दूध गर्भवती गायों से निकाला जाता है. इस दौरान उनके दूध में ओस्ट्रोजेन की तादाद बढ़ी हुई होती है. जेनेटिक इंजीनियरिंग की वजह से अब गायें और भैंसें गर्भकाल में भी दूध देती रहती हैं. ज्यादातर डेयरी उत्पादक अपनी गायों-भैंसों को बच्चा पैदा होने के कुछ दिनों बाद ही फिर से गर्भवती कर देते हैं, ताकि दूध और जानवरों का ज्यादा से ज्यादा उत्पादन हो. एक दौर था जब किसी गाय का एक दिन में तीन लीटर दूध देना अच्छी बात मानी जाती थी. अब तो गाय-भैंसों से एक दिन में 15 लीटर तक दूध निकालने की कोशिश होती है. विदेश में तो ये तादाद 24 लीटर प्रतिदिन तक पहुंच गई है. जाहिर है, जानवर इतना दूध कुदरती तरीके से तो नहीं ही दे रहे हैं.

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जो गाय गर्भवती नहीं होती हैं, उनके दूध से बने छाछ में एस्ट्रोन सल्फेट नाम का केमिकल 30 pg/ml की तादाद में मिलता है. ये एक कुदरती एस्टेरॉयड होता है. गायों के गर्भकाल में ये तादाद 151 pg/ml तक बढ़ जाती है. कई बार तो ये 1000 pg/ml तक पहुंच जाती है. दूध में ओस्ट्रोजेन की वजह से ये एस्टेरॉयड और भी ज्यादा होता है. यानी गर्भवती गायों के दूध में एस्टेरॉयड बहुत ज्यादा होता है. कहने का मतलब ये कि गर्भवती गायों का दूध उनके मांस से भी ज्यादा नुकसानदेह होता है. पुरुषों में महिलाओं के सेक्स हारमोन का ही एक रूप यानी एस्ट्राडियॉल पाया जाता है. आम तौर पर इसकी तादाद 10 से 40 pg/ml होती है. महिलाओं में इस हारमोन की कमी से कई बीमारियां होती हैं, तो उन्हें एस्ट्राडियॉल दिया जाता है.

गर्भवती गायों में ओस्ट्रोजेन की मात्रा इसलिए बढ़ जाती है ताकि पेट मे पल रहे बच्चे का ठीक से विकास हो सके. लेकिन बच्चा पैदा होते ही गाय और बछड़ों को अलग कर दिया जाता है. बछड़ों को बोतल में पाउडर वाला दूध भरकर पिलाया जाता है. ये दूध इंसानों के लिए खराब होता है. इसमें ओस्ट्रोजेन की मात्रा भी ज्यादा होती है. वहीं गाय का जो दूध उसके बच्चे के काम आना चाहिए, वो बाजार में बेच दिया जाता है.

दूध ही नहीं मांस, पनीर भी नुकसानदेह

milking cow

हमारे खाने मे ओस्ट्रोजेन का दूसरा बड़ा सोर्स मांस होता है. आज की तारीख में बड़ी तादाद में लोग मांस खाते हैं. इसके लिए जिस तरह से जानवरों का रख-रखाव होता है. क्योंकि जानवरों को ऐसा खाना दिया जाता है, जिसमें ओस्ट्रोजेन की तादाद ज्यादा होती है. उन्हें इंजेक्शन भी दिये जाते हैं. जिसमें ओस्ट्रोजेन भी होता है और दूसरे हारमोन भी. इससे जानवर ज्यादा तेजी से बढ़ते हैं. उनका मांस बढ़ जाता है. इससे कसाईघरों को ऐसे जानवरों पर मुनाफा ज्यादा होता है.

एनिमल फैट में जीनोएस्ट्रोजेन नाम का हारमोन भी पाया जाता है. इससे जनाना असर होते हैं. इस हारमोन को मांस धोने और पकाने के दौरान साफ करके अलग किया जा सकता है. ज्यादा मांस खाने से ये हारमोन इंसानों के शरीर में जमा होता जाता है.

2010 में मारुयामा और उनके साथियों ने एक रिसर्च की थी. इसके मुताबिक डेयरी उत्पादों के ज्यादा इस्तेमाल से पुरुषों में LH, FSH और टेस्टोस्टेरॉन नाम के हारमोन का रिसाव कम हो जाता है. हमारे शरीर में LH और FSH मिलकर पुरुषों के सेक्स अंगों और स्पर्म के विकास का काम करते हैं. इनकी मदद से ही टेस्टोस्टेरान नाम के हारमोन का रिसाव मर्दों के शरीर में होता है. एक रिसर्च के मुताबिक गाय का दूध ज्यादा मात्रा में पीने से किशोरों के शरीर में ओस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन नाम के हारमोन का रिसाव ज्यादा होने लगता है. इससे उनके दिमाग से GnRH नाम के केमिकल का रिसाव कम हो जाता है. नतीजा ये कि इन किशोरों के शरीर से टेस्टोस्टेरोन नाम के हारमोन का रिसाव भी कम हो जाता है. यही हारमोन मर्दों का सेक्स हारमोन होता है. यानी ये हारमोन महिलाओं से पुरुषों को अलग बनाता है.

गाय का दूध ज्यादा पीने से लड़को में एस्ट्रोन, एस्ट्रियॉल और प्रेगानानेडियॉल नाम के हारमोन का रिसाव ज्यादा होने लगता है. शरीर में ज्यादा मात्रा में ओस्ट्रोजेन होने की वजह से लड़कियों में जल्द ही मासिक धर्म होने लगता है. इनके मुकाबले किशोर लड़कों में युवा होने के लक्षण धीमे हो जाते हैं.

2013 में अमेरिका की रोचेस्टर यूनिवर्सिटी ने युवाओं पर एक रिसर्च की थी. इसके मुताबिक जो युवा बड़ी तादाद में डेयरी उत्पाद जैसे दूध, पनीर वगैरह खाते थे, तो उनके वीर्य में शुक्राणुओं की संख्या कम हो रही थी. शुक्राणुओं की रफ़्तार भी कम हो रही थी. 2014 में शिस्टरमैन और उनके साथियों के रिसर्च से भी यही बात सामने आई थी.

जैसे-जैसे पुरुषों की उम्र बढ़ती है, उनके शरीर में मर्दों वाला हारमोन यानी टेस्टोस्टेरोन कम होता जाता है. जबकि एस्ट्राडियॉल नाम का एस्टेरॉयड बढ़ जाता है. हालांकि एस्ट्राडियॉल हमारे शरीर के लिए जरूरी होता है. लेकिन इसकी ज्यादा मात्रा हमारी सेहत के लिए नुकसानदेह होती है. इसी तरह ओस्ट्रोजेन की ज्यादा मात्रा से पुरुषों के शरीर में महिलाओ जैसे लक्षण आने लगते हैं. साथ ही उन्हें थकान और पेशियां कमजोर होने की शिकायत भी होने लगती है.

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अमेरिका में करीब 40 हजार पुरुषों के स्पर्म का लैब में परीक्षण किया गया था. इससे पता चला कि जिनके शुक्राणु सेहतमंद थे, उनकी उम्र भी ज्यादा होती थी. साफ है कि स्पर्म का अच्छा होना सीधे-सीधे मर्दों की सेहत और लंबी उम्र से जुड़ा मामला है. इसे हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए. डेयरी उत्पाद, मर्दों को महिलाओ जैसा बना रहे हैं. मांस से भी पुरुषों को नुकसान होता है. इससे कई तरह के कैंसर और दूसरी बीमारियां होने का भी डर होता है.

कई रिसर्च से पता चला है कि पुरुषों में ओस्ट्रोजेन की ज्यादा मात्रा दिल के दौरे की आशंका बढ़ा देता है. इसके मुकाबले मर्दों मे टेस्टोस्टेरोन की ज्यादा मात्रा से ये आशंका कम हो जाती है.

क्या हैं दूध के विकल्प

mushrooms broccoli green tea

अगर आपको लगता है कि दूध का इस्तेमाल कम करने से आपके अंदर कैल्शियम की कमी हो जाएगी. तो इसके कई विकल्प हैं. हरी, पत्तेदार सब्जियों में भी बहुत कैल्शियम होता है, बल्कि इनमें दूध से ज्यादा कैल्शियम होता है. ये आसानी से हमारे खून में मिल भी जाता है.

तो, अगर आपको लगता है कि आपका बदन पुरुषों जैसा नहीं दिखता, तो आप अपने खान-पान पर ध्यान दीजिए. ऐसा आपके शरीर में महिलाओ वाले हारमोन ओस्ट्रोजेन की बढ़ी हुई मात्रा की वजह से हो सकता है. साफ है कि इसके लिए आपको मांस और डेयरी उत्पादों का सेवन कम करना होगा. अंडा खाना कम करना होगा. हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे गोभी, पत्तागोभी और ब्रॉक्कली में 3-कार्बिनोल नाम का केमिकल होता है. ये शरीर में ओस्ट्रोजेन की तादाद नियंत्रित करने का काम करता है. इसके अलावा मशरूम, अनार, लाल अंगूर, तिल और अलसी के बीज, गेहूं, जई, बाजरा, जौ और ग्रीन टी भी आपके लिए मददगार हो सकते हैं. आपकी सेहत के लिए जरूरी है कि आप अपने खान-पान को बदलें.

प्रोसीडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस के वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया है कि एट्राजाइन जैसे कीटनाशक नर मेंढक को मादा में तब्दील कर सकते हैं. ये तजुर्बा कुदरती माहौल में किया गया था. जहां कीटनाशक, इन मेंढको के फूड साइकिल में अपने-आप मिल जा रहे थे. मेंढकों में ये कीटनाशक उस पानी के जरिए जा रहे थे, जिसे हम इंसानों के पीने लायक समझते हैं. वैज्ञानिकों ने इन मेंढकों की तुलना उन मेंढकों से की जो एट्राज़ाइन मुक्त पानी पी रहे थे. उन्होंने देखा कि एट्राजाइन से ग्रस्त पानी पीने वाले दस फीसद नर मेंढक मादा में तब्दील हो गए. उनके अंदर अंडाशय विकसित हो गए थे. उनके अंदर टेस्टोस्टेरोन हारमोन की तादाद भी न के बराबर रह गई थी. उनकी सेक्स में दिलचस्पी कम हो गई थी.

भारत में एट्राजाइन का बहुत इस्तेमाल होता है. खास तौर से भुट्टों में. यूरोप में इस पर पाबंदी लगी है. इसकी वजह से जीवों में ओस्ट्रोजेन सेक्स हारमोन के उत्पादन पर असर पड़ता है. ये हारमोन मेंढकों में भी मिलता है और इंसानों में भी. ऐसे में अमेरिका में हुई ये स्टडी हमारे लिए खतरनाक चेतावनी है.

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