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क्रिस्टोफर कोलंबस: नरसंहार का दोषी तानाशाह जिसे नायक बनाकर पेश किया जाता है

इतिहास की कसौटी पर कोलंबस नायक नहीं हैं. वो ऐसा क्रूर और सनकी इंसान था जिसने नस्लीय भेदभाव की सारी हदें पार की और जिसने मानवीय क्रूरता और धोखेबाजी की रूह कंपा देने वाली घटनाओं को अंजाम दिया

Updated On: May 21, 2018 02:53 PM IST

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee

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क्रिस्टोफर कोलंबस: नरसंहार का दोषी तानाशाह जिसे नायक बनाकर पेश किया जाता है

क्रिस्टोफर कोलंबस का नाम लेते ही एक खोजी नायक की छवि उभरती है. हमें बचपन से सिखाया गया है कि कोलंबस भारत का नया रास्ता तलाशने निकला और अमेरिका की खोज कर डाली. क्रिस्टोफर कोलंबस गोरे अमेरिकी समाज का नायक और प्रतीक है. जिनसे दुनिया के सबसे 'महान देश' का रास्ता निकाला. जिसके नाम पर क्रिस्टोफर कोलंबस डे मनाया जाता है. लेकिन इतिहास की कसौटी पर कोलंबस नायक नहीं हैं. एक ऐसा क्रूर और सनकी इंसान जिसने नस्लीय भेदभाव की सारी हदें पार की. जिसने मानवीय क्रूरता और धोखेबाजी की रूह कंपा देने वाली घटनाओं को अंजाम दिया. जिसकी सनक और अपराधों के चलते उसकी सारी उपलब्धियां और पद वापस ले लिए गए. यही कारण है कि अमेरिका के अलग-अलग समुदायों में कोलंबस को 'नायक' की तरह पेश करने का विरोध होने लगा है.

वो कभी अमेरिका पहुंचा ही नहीं

कोलंबस की यात्रा से पहले समुद्र के जरिए भारत आने का रास्ता काफी लंबा था. कोलंबस को लगा कि अगर दुनिया गोल है और वो पीछे की तरफ से जाए तो हिंदुस्तान के पिछले किनारे पर पहुंच जाएगा. कोलंबस ने यात्रा की भी मगर अमेरिकी महाद्वीप पर आ पहुंचा. यहां कैरेबियाई द्वीप समूह को उसने इंडिया कहा और लोगों को इंडियन. इसीलिए कैरेबियन देशों की टीम वेस्टइंडीज़ कहलाती है. लेकिन कोलंबस बहामास और आसपास के द्वीपों पर ही पहुंचा था. उसने कभी अमेरिका (यूनाएटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका) की धरती पर पैर भी नहीं रखा.

Christopher Columbus Ship

ऐसे ही किसी जहाज से सफर कर क्रिस्टोफर कोलंबस ने अमेरिका की खोज की थी (फोटो: रॉयटर्स)

खोजी से वहशी हत्यारे तक

कोलंबस जब बहामास पहुंचा तो वहां के लोगों ने उसका स्वागत किया. यह आदिवासी कबीले दुनियादारी से अनजान थे. इनके पास सोने के गहने थे. यह लोग बांस के बने छोटे-मोटे हथियारों के अलावा हिंसा के बारे में नहीं जानते थे. कोलंबस ने अपनी डायरी में लिखा, 'मैं 50 लोगों के साथ इन सबपर कब्जा कर सकता हूं.' कोलंबस ने ऐसा किया भी. सबसे पहले उसने उन सबको अपना गुलाम बनाया, जो उसका स्वागत करने आए थे. इन नेटिव अमेरिकन लोगों की औरतें बेहद कम कपड़ों या बिना कपड़ों के रहती थीं. कोलंबस और उसके साथियों के लिए यह बलात्कार करने का बुलावा था. इन लोगों ने न सिर्फ खुद बलात्कार किए बल्कि औरतों की खरीद-बिक्री शुरू हो गई.

कोलंबस की डायरी में विवरण मिलता है कि लोगों के बीच सबसे ज्यादा मांग 9-10 साल की बच्चियों की थी. नेटिव अमेरिकन लोगों में सिफिलिस जैसी बीमारी कोलंबस और उसके साथियों की ही देन हैं.

कोलंबस के अत्याचारों की कहानी यहीं खत्म नहीं होती. सही कहें तो यहां से शुरू होती है. अपने कारगुजारी को सही ठहराने के लिए कोलंबस ने लिखा कि यह लोग शैतान हैं, इंसानों को मारकर उनका खून पीते हैं. उन्हें जिंदा खा जाते हैं. कोलंबस ने इन लोगों को ईसाई बनाना शुरू करवाया. नस्लीय हिंसा और बलात्कार जैसे अपराधों को छिपाने के लिए धर्म हमेशा से एक कारगर औजार रहा है. कोलंबस के समय से लेकर आज तक इस फॉर्मूले का कोई तोड़ नहीं है.

कोलंबस ने स्पेन के राजघराने को ढेर सारा सोना देने का वायदा किया था. उसका अनुमान था कि वो 'इंडिया' पहुंचेगा और वहां से सोना लाएगा. नेटिव अमेरिकन्स के पास सोना तो था लेकिन राजपरिवार और कोलंबस को मालामाल करने जितना भी नहीं. सोने की खुदाई में हजारों नेटिव अमेरिकन मारे गए. लोग रात-दिन काम करते थे. इनकार करने की सजा बहुत भयानक थी. नेटिव अमेरिकन लोगों में खौफ पैदा करने के लिए उनके बच्चों को कुत्तों को खिला दिया जाता था. बेहद छोटे बच्चों को उनके मां-बाप के सामने शिकारी कुत्तों के बीच फेंक दिया जाता था. कोलंबस की यह क्रूरता सिर्फ नेटिव अमेरिकन लोगों के लिए नहीं थी. कोलंबस एक जुलाहे का बेटा था. किसी औरत ने उसके 'नीचे खानदान' में पैदा होने का ताना मारा, कोलंबस ने उसकी जुबान कटवा दी.

Christopher Columbus Statue

क्रिस्टोफर कोलंबस की मूर्ति (फोटो: रॉयटर्स)

क्यों नायक है कोलंबस

कोलंबस को पूरी दुनिया में नायक बनाकर पेश किया जाता है. बच्चों की कविताओं में कोलंबस का जिक्र मिलेगा. 'अपनी टीम के कोलंबस बनिए.' जैसे कॉर्पोरेट वन लाइनर और मोटिवेशन वाले लेख भी मिलेंगे. जबकि इतिहास इसके ठीक उलट है. इसके पीछे की सबसे बड़ी वजह यह कि कोलंबस ने यूरोपियन उपनिवेशवाद, श्वेत नस्लवाद और ईसाई धर्मांतरण के मुरीदों को सबसे बड़ा तोहफा दिया. अमेरिका लंबे समय तक इन सारी बुराइयों का अड्डा रहा. साथ ही साथ अमेरिका दुनिया का सबसे ताकतवर और उन्नत देश भी बना. इसलिए हैरानी की बात नहीं कि अमेरिका में कोलंबस डे मनाने की शुरुआत रोमन कैथोलिक समुदायों ने की.

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इन ग्रुप्स ने इतिहास में छेड़छाड़ भी की. अमेरिका में स्कूली बच्चों को विकृत इतिहास पढ़ाया जाता है. इसके साथ ही कोलंबस के नाम से कई ऐसे तथ्य जोड़ दिए जाते हैं जो गलत थे. मसलन कई अमेरिकी मानते हैं कि कोलंबस ने साबित किया कि धरती गोल है. जबकि सच यह है कि यह बात कोलंबस से लगभग 1500 साल पहले ही साबित हो चुकी थी. इसी तरह कोलंबस अमेरिकी महाद्वीप पर समुद्र के रास्ते पहुंचने वाला पहला इंसान नहीं था. वायकिंग्स और दूसरे कुछ कबीले ऐसा प्राचीन समय से करते आ रहे थे. इतिहास के अमेरिकी वर्जन में यह बात भी छिपा ली जाती है कि कोलंबस के अपराधों के चलते उसकी सारी उपाधियां छीन ली गईं थीं.

इतिहास की यह विकृत तस्वीर कोई नई बात नहीं. जीतने वाले एक जैसे अपराधों के लिए अपने खेमे वाले को नायक दूसरे खेमे को शैतान पेश करते हैं. कोलंबस हो, चर्चिल और हिटलर हों, राजपूत और मुगल हों या आज की राजनीति में नेहरू, पटेल, भगत सिंहऔर जिन्ना को तोड़-मरोड़कर शतरंज की बिसात पर खड़ा करना हो. नजरिया बदलने की कोशिशें कोई नई बात नहीं.

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