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आशा भोसले की जिंदगी से जुड़ी ऐसी बातें, यकीनन नहीं जानते होंगे आप

आशा भोसले ने कहा दीदी और मेरी शख्सियत अलग है लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आपस में बनती नहीं है, लता जी दिमाग से काम लेती हैं और वो दिल से

Updated On: Sep 08, 2018 10:09 AM IST

Shailesh Chaturvedi Shailesh Chaturvedi

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आशा भोसले की जिंदगी से जुड़ी ऐसी बातें, यकीनन नहीं जानते होंगे आप
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लता मंगेशकर और आशा भोसले के बीच प्रतिद्वंद्विता की तमाम कहानियां सुनी-सुनाई जाती हैं. लता जी तमाम इंटरव्यू में साफ कह चुकी हैं कि शादी के वक्त जरूर कुछ साल उनके बीच बातचीत नहीं हुई, वो भी आशा जी के पति की वजह से.

इसके अलावा, दोनों के बीच कभी कोई तनातनी नहीं हुई. आशा जी भी इसे मानती हैं. वो कहती हैं कि दोनों की शख्सियत बिल्कुल अलग हैं लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि आपस में बनती नहीं है. आशा जी के मुताबिक फर्क यही है कि लता जी दिमाग से काम लेती हैं और वो दिल से.

जो बोलना है, खुल कर बोलती हैं आशा जी

-आशा जी ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'दीदी हमेशा सोच-समझ कर फैसले लेती हैं. वो इमेज को लेकर बेहद सजग हैं. अगर वो नाखुश भी हों, तो सार्वजनिक जगहों पर उसे जाहिर नहीं करेंगी. मैं दिल से सोचती हूं. जो दिल में है, बोल देती हूं. एक बार हम डिनर कर रहे थे. किसी ने कुछ बोल दिया. दीदी टेबल पर थीं, इसलिए मैं अपनी जीभ दांत से काटकर खुद को चुप रखने की कोशिश कर रही थी. दीदी ने देखा और कहा कि आशा जाओ, जो भड़ास है, निकाल आओ. नहीं तो खाना नहीं पचेगा तुमसे. उसके बाद मुझे जो बोलना था, मैंने बोल दिया.'

इसके बाद आशा जी ने कहा, 'दीदी घर में बिल्कुल अलग हैं. वो मजे करती हैं. बहुत अच्छा डांस करती हैं. लेकिन आप उन्हें गाते हुए, डांस करते नहीं देख सकते. मैं बाहर भी पूरी तरह मजे करती हूं. मुझे लगता है कि जिंदगी को इतनी गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है.'

कहा जाता है कि जब आशा छोटी थीं तो लता जी उन्हें हमेशा अपने साथ रखती थीं, किसी गुड़िया की तरह. स्कूल जाती थीं, तो भी आशा जी को साथ ले जाती थीं. एक दिन अध्यापक ने डांटा तो लता जी ने कहा कि मैं अगर स्कूल आऊंगी तो आशा साथ आएगी, वरना मैं भी नहीं आऊंगी.

आशा जी के छोटे बेटे आनंद के मुताबिक लता जी अब भी आशा को चिढ़ाती हैं कि तेरी वजह से मैं अनपढ़ रह गई. यहां तक कि एक बार साथ रखने की जिद में सीढ़ियों से गिर गई थीं क्योंकि आशा उनकी गोद में थीं. आशा जी के माथे पर अब भी वो निशान है.

आशा जी और पंचम दा के बीच की कड़ी गुलजार

-आरडी बर्मन के साथ आशा भोसले ने एक के बाद एक कई अद्भुत गाने दिए. 'पिया तू... अब तो आजा, दम मारो दम, दुनिया में लोगों को, चुरा लिया है तुमने जो दिल को, जाने जां..' इन सबके बीच इजाजत जैसी फिल्म का मेरा कुछ सामान और खाली हाथ शाम आई है जैसे गाने भी थे. ओ मारिया जैसा गाना भी, जो दोनों की आवाज में था.

asha taai

आशा जी और पंचम का गुलजार साहब से करीबी रिश्ता था. आशा जी का कहना है कि गुलजार और आरडी बर्मन को साथ लाने में उनका बड़ा रोल रहा क्योंकि दोनों ही पहल नहीं करते थे. ऐसे में कोई तीसरा व्यक्ति चाहिए होता जो दोनों की ओर से पहल कर सके. आशा जी के मुताबिक, दोनों को खाने का बहुत शौक है. गुलजार साहब को आशा जी के बनाए करेला गोश्त और बंगाली खीर बहुत पसंद है.

-आशा जी के सबसे पसंदीदा संगीतकार सलिल चौधरी थे. उन्हें लगता है कि सलिल दा के गीतों को गाना बड़ी चुनौती होती थी. उसके अलावा उन्हें एसडी बर्मन बहुत पसंद हैं, भले ही आशा जी ने उनके लिए ज्यादा गाने नहीं गाए. फिर आरडी बर्मन तो हैं ही. आशा जी पहली बार आरडी से तब मिली थीं, तब वो दसवीं क्लास में पढ़ते थे. उसके बाद तो सबको पता है कि आरडी बर्मन और आशा भोसले की जोड़ी ने संगीत में क्या-क्या धमाल और किस तरह के प्रयोग किए.

तीसरी मंजिल का गाना था 'आजा-आजा, मैं हूं प्यार तेरा...' आशा भोसले थोड़ा घबराई हुई थीं. गाना वेस्टर्न किस्म का था. आशा भोसले ने लता जी से बात की. लता जी ने कहा कि तुम मंगेशकर हो, आराम से गा सकती हो. शम्मी कपूर को लग रहा था कि आशा जी वाकई बहुत अच्छा गाएंगी.

वो मजाक कर रहे थे कि रफी से अच्छा मत गाना, क्योंकि रफी मेरे लिए गाने वाले हैं. वो नहीं चाहते थे कि आशा पारिख उनसे बेहतर गाती हुई दिखें. दस दिन रिहर्सल चली. आरडी इतना खुश हुए कि उन्होंने आशा भोसले को 100 रुपए का इनाम दिया.

विदेशों में भी वही लोकप्रियता

-आशा भोसले को खाना बनाने का बहुत शौक है. उन्हें साड़ियों और गजरों का भी शौक है. दुबई और कुवैत में आशा’ज नाम से उनके रेस्त्रां भी हैं, जहां भारतीय खाना मिलता है. कुछ साल पहले उन्होंने एक मराठी फिल्म में काम किया था. फिल्म का नाम था 'माई'. उसमें उन्होंने मां का रोल निभाया था. साल 2000 में उन्हें दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिला और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया.

90 के दशक में कॉर्नरशॉप की तरफ से ब्रिमफुल ऑफ आशा नाम से म्यूजिक वीडियो आया था. एक तरह से यह आशा भोसले को ट्रिब्यूट की तरह था. आशा जी उसके कुछ समय बाद लंदन गईं. हीथ्रो एयरपोर्ट पर ऑफिसर ने उनका पासपोर्ट देखा, जिसमें प्रोफेशन के आगे सिंगर लिखा था. आशा जी ने उसको बताया कि वो ब्रिमफुल ऑफ आशा वाली आशा भोसले हैं. ऑफिसर इतना खुश हो गया कि उसने अपने सब साथियों को आशा जी से मिलने के लिए बुलाया.

asha lata

-खैयाम ने आशा जी की छवि को अलग तरीके से पेश किया. उन्होंने साथ में कई फिल्में कीं, लेकिन उमराव जान के वो गाने आशा भोसले के करियर में चार चांद लगाने वाले थे. संगीतकार रवि के लिए गाई लोरी– 'चंदामामा दूर के...' जबरदस्त हिट थी. रवि साहब ने भी उनके साथ काफी काम किया. सीएटी कैट कैट माने बिल्ली जैसे गाने भी आए. तोरा मन दर्पण कहलाए जैसे भजन भी.

सचिन देव बर्मन ने ज्यादातर लता मंगेशकर के साथ काम किया लेकिन पांच साल ऐसे रहे, जब दोनों ने एक-दूसरे के साथ काम नहीं किया. उस दौरान सचिन दा ने आशा जी से गाने गवाए. 1962 के बाद भी सचिन दा ने आशा जी से गाने गवाए. खासतौर पर बंदिनी का गीत– 'अबके बरस भेज भैया को बाबुल..' ऐसा है जो आंखें नम कर देता है.

आजकल के संगीतकारों में आशा जी एआर रहमान को बहुत मानती हैं. उन्होंने रंगीला फिल्म के लिए गाने गाए, जो उर्मिला पर पिक्चराइज हुआ. रहमान के साथ उन्होंने कई फिल्में कीं.

(ये लेख पूर्व में प्रकाशित हो चुका है, हम इसे दोबारा प्रकाशित कर रहे हैं)

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