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मेरिल स्ट्रीप ने साबित किया, औरतें आदमियों से बेहतर एक्टर हैं

बर्थडे स्पेशल: मेरिल स्ट्रीप अब तक सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में से एक रही हैं.

Tulika Kushwaha Tulika Kushwaha Updated On: Jun 22, 2017 03:08 PM IST

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मेरिल स्ट्रीप ने साबित किया, औरतें आदमियों से बेहतर एक्टर हैं

'औरतें आदमियों से बेहतर एक्टर होती हैं. क्यों? क्योंकि हमें होना पड़ता है. खुद से ऊंची या ताकतवर शख्सियत को कोई ऐसी बात बताना और कंन्विंस करना, जिसके बारे में वो नहीं जानता है, एक हुनर है. इसी हुनर के बल पर औरतें सदियों से इस दुनिया में संघर्ष करती और जीती आई हैं'.

अमेरिकन फिल्म क्रिटिक करीना लॉन्गवर्थ ने अपनी किताब ‘मेरिल स्ट्रीप- द एनॉटमी ऑफ एन एक्टर’ में हॉलीवुड एक्ट्रेस मेरिल स्ट्रीप की ये पंक्तियां जोड़ी हैं. अगर आप मेरिल स्ट्रीप को नहीं जानते, तो ये लाइनें पढ़कर आप कुछ अंदाजा लगा सकते हैं कि वो कैसी शख्सियत होंगी. मेरिल की शख्सियत इस बात जितनी ही गहरी है.

मेरिल ने औरतों की खूबी और अपने अद्भुत अभिनय क्षमता को बहुत ही आसान से शब्दों में बयां कर दिया है.

मेरिल एक्टिंग की दुनिया की अबतक की सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्रियों में से एक रही हैं. यहां तक कि वैनिटी फेयर ने कहा था कि ये कल्पना करना भी मुश्किल है कि मेरिल स्ट्रीप के पहले भी कोई वक्त था. इसके बाद उनके बारे में ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं रह जाती. लेकिन मेरिल के बारे में जानने-सुनने को इतना कुछ है कि आप उन्हें जानने और उनके बारे में बात करने से खुद को नहीं रोक सकते.

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उम्र से ज्यादा अवॉर्ड्स नॉमिनेशन्स

मेरी लुईस स्ट्रीप का जन्म 22 जून, 1949 को अमेरिका के न्यू जर्सी में हुआ था. मेरिल आज अपना 68वां जन्मदिन मना रही हैं और मैं खुद को ये कहने से नहीं रोक पा रही कि वो गिनती में अपनी उम्र से कहीं ज्यादा बार ऑस्कर, गोल्डन ग्लोब, बाफ्टा और क्रिटिक्स चॉइस अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट की जा चुकी हैं. उन्हें 20 बार ऑस्कर तो 30 बार गोल्डन ग्लोब के लिए ही नॉमिनेट किया जा चुका है. बड़े-बड़े अवॉर्ड्स तो हैं ही उनके झोले में. किसी भी कलाकार को इतनी बार ऑस्कर या गोल्डन ग्लोब के लिए नॉमिनेट नहीं किया गया है.

थिएटर बना एक्टिंग का पहला स्कूल

मेरिल ने एक्टिंग की शुरुआत स्कूल के ड्रामा से की थी लेकिन उन्होंने अबतक सीरियस थिएटर करने का नहीं सोचा था. लेकिन उन्होंने कॉलेज थिएटर के लिए बस एक रोल किया और फिर सब कुछ बदल गया. उन्होंने 1969 में वासार कॉलेज के लिए 'मिस जूली' प्ले में एक्टिंग की और उन्हें पूरे कैंपस में पहचान मिली. इसके बाद उन्होंने कभी थिएटर के लिए 80 साल की बूढ़ी औरत का रोल किया तो कभी 'अ मिडसमर नाइट्स ड्रीम' की हेलेना बनीं. उन्होंने येल स्कूल ऑफ ड्रामा से आर्ट्स में मास्टर्स किया. उनके पास आर्ट्स में डॉक्टरेट की उपाधि भी है. इस बीच उन्होंने खूब काम किया और तब तक काम किया जबतक उन्हें अल्सर नहीं हो गया. इन सब वजहों से उन्होंने एक्टिंग छोड़कर लॉ की पढ़ाई शुरू कर दी.

मेरिल की अद्भुत खूबियां

लॉन्गवर्थ की किताब में वासार कॉलेज के ड्रामा प्रोफेसर क्लिंटन जे. एटकिन्सन ने कहा है, ‘मुझे नहीं लगता कि मेरिल को कभी किसी ने एक्टिंग सिखाई है, उसने खुद को ये सिखाया है.’

मेरिल स्ट्रीप को याद रखने के लिए बहुत सी वजहें हैं, लेकिन उनकी दो खूबियां उन्हें सबसे अलग और खास बनाती हैं. पहला मेरिल अपने किसी भी किरदार में इतनी गहराई से ढल जाती हैं कि उनके साथ काम कर रहे कलाकार उन्हें उस किरदार के तौर पर ही देखने लगते हैं.

'पोस्टकार्ड्स फ्रॉम द एज' में स्ट्रीप के डायरेक्ट माइक निकोल्स कहते हैं, ‘हर रोल के लिए वो अलग ही इंसान बन जाती हैं. जब वो ऐसा करना शुरू करती हैं, तो उनके साथ काम कर रहे लोग बिल्कुल उनके हिसाब से ही रिएक्ट करने लगते हैं.’ साफ है कि डायरेक्टर्स के लिए मेरिल के साथ काम करना ज्यादा आसान हो जाता होगा.

और एक्सेंट

मेरिल स्ट्रीप 10 से ज्यादा एक्सेंट में बात कर सकती हैं. ये गुण उनमें बिल्कुल अलग-अलग रोल करके आया है लेकिन ये बात भी कही जा सकती है कि मेरिल के पास इतनी वेराइटी के किरदार इसलिए आए क्योंकि उनके पास एक्सेंट, रोल पोर्ट्रेएल जैसा हुनर है और वो उन किरदारों को जीवंत कर सकती थीं.

उन्होंने डैनिश, ब्रिटिश, इटैलियन, दक्षिणी अमेरिकी, आइरिश-अमेरिकन, पोलिश एक्सेंट में ब्रिटिश और जर्मन बोलने के साथ अपनी आवाज के पिच, डिलिवरी और उच्चारण पर भी काम किया है. वो किरदार के हिसाब से तो एक्सेंट तय करती ही हैं, उस किरदार के व्यक्तित्व के हिसाब से ही डायलॉग डिलिवरी और पिच निर्धारित करती हैं.

एक उदाहरण है 2010 में आई फिल्म 'आइरन लेडी'. ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्ग्रेट थैचर पर बनी इस फिल्म में एक पूरा हिस्सा ही है, जहां थैचर अपनी आवाज पर मेहनत करती दिखती हैं क्योंकि उन्हें पुरुष प्रधान राजनीति में अपनी मौजूदगी दर्ज करानी होती है, क्योंकि वो पीएम पद के लिए बतौर कैंडिडेट सामने आती हैं. पीएम बनने से पहले और बाद में थैचर ने अपनी आवाज पर कितनी मेहनत की होगी, इसे मेरिल बखूबी दिखाती हैं.

उनके समर्पण का एक और उदाहरण है. मेरिल एक बार बेलफास्ट गई हुई थीं. वहां उनसे पूछा गया कि वो इतने सारे एक्सेंट में कैसे बात कर लेती हैं, तो उन्होंने परफेक्ट बेलफास्ट एक्सेंट में जवाब दिया, ‘क्योंकि मैं सुनती हूं’.

मेरिल और फेमिनिज्म

कुछ क्रिटिक्स मेरिल को फेमिनिस्ट बताते हैं. करीना लॉन्गवर्थ लिखती हैं कि स्ट्रीप ने अपने लगभग हर किरदारों में फेमेनिस्ट दृष्टिकोण डाला है. लेकिन फिल्म क्रिटिक मौली हस्केल इसे सिरे से नकार देती हैं, ‘मेरिल की कोई भी हीरोइन फेमिनिस्ट नहीं है. हां, पिछले सालों में औरतों की जिंदगी और दृष्टिकोण में जितने भी बदलाव आए हैं, मेरिल ने उनका प्रयोग जरुर किया है.’

मेरिल से जब टाइम आउट मैगजीन ने एक इंटरव्यू में कहा था, 'मैं फेमिनिस्ट नहीं ह्यूमनिस्ट हूं. मैं एक अच्छा आसान संतुलन बनाने के लिए हूं.'

मेरिल की फिल्में

मेरिल को उनके किसी एक किरदार के लिए याद नहीं किया जा सकता. द गार्डियन की कॉलमिस्ट एमा ब्रोक्स ने अपने एक कॉलम में लिखा था, 'वैसे तो स्ट्रीप ने बहुत से किरदार निभाए हैं,  लेकिन उनपर किसी एक टाइप के किरदार या इमेज का ठप्पा लगाना बहुत मुश्किल है.'

मेरिल स्ट्रीप के अगर कुछ किरदारों का नाम लिया भी जाए, तो उनमें सबसे आगे होगी फिल्म 'सोफी'ज चॉइस'. इस फिल्म में स्ट्रीप ने दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान कन्संट्रेशन कैंप से भागी हुई पोलिश इम्मिग्रेंट का रोल किया है. इस फिल्म में मेरिल को खुशी, दुख, दर्द हर भाव में पीक पर देखा जा सकता है. उन्होंने पोलिश एक्सेंट पर जैसे महारत हासिल कर ली है इस फिल्म में. इस फिल्म के लिए उन्हें ऑस्कर मिला.

द ऑर्स, क्रेमर वर्सेस क्रेमर, ब्रिजेस ऑफ मैडिसन काउंटी, जूली एंड जूलिया, डेविल वियर्स प्राडा फिल्मों को मेरिल के लिए ही याद किया जाएगा.

द ऑर्स में मेरिल जिस तरह खुशियां ढूंढने और उन्हें पहचानने की कोशिश करती हैं, वो उन्हें फिल्म की सेंटर अट्रैक्शन वर्जीनिया वुल्फ बनीं निकोल किडमैन के किरदार के आगे कहीं कमतर नहीं करता.

मेरिल ने फिल्मी दुनिया के साथ-साथ हर उस शख्स को कुछ न कुछ दिया है, जिसने उनकी फिल्में देखी हैं. आप जब उन्हें पर्दे पर देखते हैं तो आप मेरिल स्ट्रीप को देखते हुए भी नहीं देखते साथ ही आप मेरिल स्ट्रीप के जादू से बाहर भी निकल पाते. उन्हें देखना एक अद्भुत अनुभव है.

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