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मार्टिन स्कॉरसेसी: ये सिर्फ फिल्में नहीं बनाते... परिभाषाएं गढ़ते हैं

मार्टिन स्कॉरसेसी बीते करीब 50 सालों से फिल्में ही नहीं बना रहे हैं बल्कि वो दुनियाभर के फिल्म निर्देशकों के लिए मिसाल भी कायम कर रहे हैं

Arun Tiwari Arun Tiwari Updated On: Nov 17, 2017 10:56 AM IST

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मार्टिन स्कॉरसेसी: ये सिर्फ फिल्में नहीं बनाते... परिभाषाएं गढ़ते हैं

साल 2012 में वेबसाइट न्यूज लॉन्ड्री को दिए एक साक्षात्कार में मशहूर फिल्म निर्देशक शेखर कपूर ने कहा था कि हॉलीवुड में आखिरी बार बेहतर सिनेमा 70 के दशक में बन रहा था जब मार्टिन स्कॉरसेसी जैसे डायरेक्टरों ने फिल्में बनाने की शुरुआत की थी. उनका मानना था कि मार्टिन स्कॉरसेसी और उनके कई निर्देशक साथी वैश्विक सिनेमा को एक नए तरह के उठान पर लेकर गए थे.

शेखर कपूर जैसे बेहतरीन फिल्म निर्देशक जब किसी विदेशी डायरेक्टर के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करते हैं तो इसके मायने उस कलाकार की कृतियों से जुड़े विविधताभरे पक्षों को लेकर होता है. जैसे भारतीय संगीत हम किशोर कुमार की प्रशंसा उनकी रेंज और वरायटी के लिए करते हैं. कैसे उन्होंने बेहद गमगीन गीतों से लेकर नसों में रवानी भर देने वाले गाने बेहद सहजता के साथ गाए.

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कुछ उसी तरह मार्टिन स्कॉरसेसी ने अपनी फिल्मों के संदर्भ में हर बार नए प्रयोग किए. हर बार नए विषय को छुआ. हर बार एक नए तरीके से अपने दर्शकों तक पहुंचने की कोशिश की. एक सामान्य आदमी से लेकर धर्म, संगठित अपराध, साइकॉलोजिक थ्रिलर जैसे हर नए-नए विषयों पर काम किया और बार उन्हें अलग ढंग से परिभाषित किया.

एक कपड़े प्रेस करने वाले पिता चार्ल्स स्कॉरसेसी और सिलाई करके जीवनयापन करने वाली मां कैथरीन के घर न्यूयॉर्क में जन्में मार्टिन को बचपन में अस्थमे की वजह से खेलकूद से दूर रखा जाता था. लेकिन दिलचस्प बात ये थी कि उनके माता-पिता दोनों ही कलाकार भी थे. दोनों अपने काम निपटाने के बाद अदाकारी की ट्रेनिंग भी लेते थे. और हुआ वही जो मार्टिन को बिल्कुल सटीक राह पर लेकर जाने वाला था. मार्टिन खेलकूद नहीं सकते थे तो उनके माता-पिता ने मनोरंजन के लिए उन्हें फिल्में देखने की सलाह दी और सिनेमा बिल्कुल उनके अंदर उतरते चला गया.

पढ़ाई के बाद जब सिनेमा को करियर के तौर पर अपनाने का समय आया तो साथ मिला उस समय के चार बेहतरीन निर्देशकों के ग्रुप 'ब्रैट' के साथ दोस्ती का जिन्होंने सिनेमाई इतिहास में हर फिल्म के साथ कीर्तिमान गढ़े. इन चार दोस्तों में हॉलीवुड के सर्वकालिक महान डायरेक्टरों में शुमार किए जाने वाले स्टीव स्पीलबर्ग भी शामिल थे.

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1975 तक मार्टिन कुछ फिल्मों में सह निर्देशन और थोड़े बहुत कुछ और भी काम कर चुके थे लेकिन उनकी जिंदगी की मायने बदलने वाली फिल्म आई साल 1976 में. टैक्सी ड्राइवर नाम की इस वैश्विक ख्यातिनाम फिल्म ने सिनेमाई संसार को एक ऐसा कलाकार दिया जिसे हम आज रॉबर्ट डी निरो के नाम से जानते हैं. यह फिल्म वियतनाम युद्ध से लौटे एक पूर्व नौसैनिक की कहानी है जो मानसिक बीमारी से जूझ रहा है. वो टैक्सी ड्राइवर बन जाता है. अपनी मानसिक बीमारी से लड़ते हुए कैसे फिल्म के आखिरी वो हीरो बन जाता है, ये रॉबर्ट डी नीरो द्वारा जीवंत किए गए रोल ने परिभाषित किया था.

इस फिल्म को लेकर वैश्विक स्तर पर और भी ज्यादा चर्चा तब हुई थी जब जॉन हिन्कले ने स्वीकार किया था कि फिल्म में अदाकारा जूडी फोस्टर की भूमिका ने उसे 1981 में रोनाल्ड रीगन की ह्त्या करने की कोशिश के लिए उकसाया था.

टैक्सी ड्राइवर से मिली प्रसिद्धी के बाद मार्टिन स्कॉरसेसी की हर फिल्म उन्हें अलग तरह से स्थापित किया. वो विधाओं को के जरिए फिल्म निर्माण का मार्ग ने नवीन मार्ग प्रशस्त करते चले गए. उनकी फिल्मों- द लास्ट टेंपटेशन ऑफ क्राइस्ट, गॉडफेलाज, केप फियर, कसीनो, गैंग्स ऑफ न्यूयॉर्क, डिपार्टेड, एवियेटर, शटर आईलैंड और ह्यूगो- ने प्रयोगधर्मिता को पराकाष्ठा तक महसूस कराया है. इन फिल्मों के दौरान उन्होंने हॉलीवुड के दो बेहतरीन कलाकारों रॉबर्ट डी नीरो और लियोनार्डो डी कैप्रियो के साथ लंबी और उम्दा साझीदारी की है.

U.S. actor and UN Messenger of Peace Leonardo DiCaprio poses during arrivals for a screening of his documentary film "Before the Flood" at the United Nations in New York

स्कॉरसेसी दुनिया में जीवित सभी निर्देशकों में सबसे ज्यादा बार अकादमी पुरस्कारों के नामित होने के लिए जाने जाते हैं लेकिन उन्हें सफलता मिली साल 2006 में आई फिल्म डिपार्टेड से.

वर्तमान समय में मार्टिन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पर एक डॉक्यूमेंट्री बनाने के प्रोजेक्ट में लगे हुए हैं. साथ ही 2019 में उनकी फिल्म आईरिशमैन भी आएगी जिसमें अल पचीनो और रॉबर्ट डी नीरो दिखाई देंगे.

मार्टिन को उनके जन्मदिन पर हमारी तरफ से बधाई कि वो ऐसी फिल्में बनाते रहें और फिल्मी दर्शकों को लुभाते रहें.

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