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बतौर संगीतकार आदेश श्रीवास्तव के पास अभी बहुत कुछ देने को बाकी था

संगीतकार आदेश श्रीवास्तव के जन्मदिन पर खास

Updated On: Sep 04, 2018 09:32 AM IST

Shivendra Kumar Singh Shivendra Kumar Singh

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बतौर संगीतकार आदेश श्रीवास्तव के पास अभी बहुत कुछ देने को बाकी था

उस हंसमुख, हर दिल अजीज, जबरदस्त प्रतिभाशाली और ‘फाइटर’ कलाकार ने 4 सितंबर 2015 को कोकिलाबेन अस्पलात में अपना 51वां जन्मदिन मनाया. अस्पताल में इसलिए क्योंकि उसे कैंसर था. जो इलाज के बाद वापस शरीर में घर कर चुका था. हर कोई दुआ कर रहा था कि कैंसर एक बार फिर हार जाए लेकिन होनी को कुछ और ही मंजूर था. जन्मदिन के कुछ ही घंटे बीते थे कि कलाकार की सांसों ने उसका साथ छोड़ दिया. तारीख के लिहाज से दुनिया एक दिन आगे बढ़ चुकी थी लेकिन उस एक कलाकार के जाने से कईयों की जिंदगी कुछ दिनों के लिए थम सी गई.

ये संगीतकार आदेश श्रीवास्तव की कहानी है. जो वक्त से काफी पहले ही दुनिया छोड़ गए. लेकिन अपने पीछे ऐसा करामाती और कामयाब संगीत छोड़ गए जो हर वक्त उनकी याद दिलाता रहेगा. आदेश श्रीवास्तव उन संगीतकारों में से थे जो डंके की चोट पर कहते थे कि उन्होंने अपने जीवन में जितनी भी धुनें तैयार की हैं वो सब की सब ‘ओरिजिनल’ हैं. उनका संगीत उस दौर में परवान चढ़ रहा था जब किसी दूसरे की धुन से ‘इंप्रेस’ होकर नई धुन बनाने का ‘कल्चर’ जोर पकड़ रहा था. आदेश ताल ठोंक कर कहते थे कि वो इस रेस का हिस्सा नहीं हैं.

इसीलिए शायद ही कभी कोई उनके संगीत को लेकर कुछ कह पाया हो. आदेश श्रीवास्तव कंप्यूटर पर संगीत बनाने की बजाए अपनी धुनों को परंपरागत तरीके से हारमोनियम पर कंपोज किया करते थे. एक इंटरव्यू में उन्होंने खुद ही ये बात कही थी कि ये सारी आदतें उनमें इसलिए हैं क्योंकि उन्होंने तबीयत से संगीत सीखा है.

छोटे से थे आदेश जब घर में चाचा लोगों को गाते बजाते देखते थे. उन्होंने भी अपने पिता से ड्रम की फरमाइश की थी. ड्रम तो मिल गया लेकिन आदेश की लंबाई ही इतनी नहीं थी कि वो ड्रम बजा पाएं. फिर भी वो घंटों उसी ड्रम को बजाने की कोशिश में लगे रहते थे. ये संगीत का जुनून ही था जो उन्हें मुंबई लेकर गया. मुंबई में लंबे समय तक वो संगीतकार प्यारेलाल की ऑरकेस्ट्रा में ‘परकशन’ बजाते थे.

महबूब स्टूडियो में ऐसी ही एक रिकॉर्डिंग में उनकी मुलाकात अमिताभ बच्चन से हुई थी. अमिताभ बच्चन ने हमेशा आदेश श्रीवास्तव को छोटे भाई की तरह प्यार दिया. अमिताभ बच्चन के अलावा और भी कई जाने-माने अभिनेता अभिनेत्रियों ने उसी दौर में आदेश श्रीवास्तव को नोटिस कर लिया था. वो आदेश की शख्सियत की खूबी भी थी कि वो सैकड़ों की भीड़ में भी अलग से दिख जाते थे.

लंबा कद, घुंघराले बाल और अपने काम की लगन. इसी दौरान 90 के दशक के शुरुआती साल में फिल्म आई-प्रहार. इस फिल्म में संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. फिल्म में सुरेश वाडेकर का गाया एक गाना जबरदस्त हिट हुआ. ‘धड़कन जरा रुक गई है’, माधुरी दीक्षित और गौतम जोगलेकर के साथ इस गाने में आदेश श्रीवास्तव भी स्क्रीन पर नजर आए. जो वॉयलिन बजा रहे थे.

इसके कुछ ही समय बाद आदेश श्रीवास्तव ने बतौर संगीतकार फिल्मों में काम करना शुरू किया. शुरुआती फिल्में सामान्य ही रहीं. 1994 में एक तमिल फिल्म का रीमेक बना. ‘आओ प्यार करें’ नाम से बनी उस फिल्म में आदेश श्रीवास्तव का संगीत था. 90 का दशक रोमांटिक गानों का दूसरा नाम बनना शुरू हो चुका था. इस फिल्म में आदेश के बनाए दो गाने ‘चांद से परदा कीजिए कहीं चुरा ना ले चेहरे का नूर’ और ‘हाथों में आ गया जो कल रुमाल आपका’ दो गाने जमकर हिट हुए.

बतौर संगीतकार अगली बड़ी हिट के लिए आदेश श्रीवास्तव ने तीन चार साल का इंतजार किया. जिसके बाद उनकी फिल्म आई मेजर साहब. लेकिन इस दौरान आदेश श्रीवास्तव ने फिल्मों के बैकग्राउंड म्यूजिक में जमकर नाम कमाया. खलनायक के अलावा फिल्म बॉर्डर का जिक्र करना जरूरी है. ‘ड्यूरेशन’ के लिहाज से ‘बॉर्डर’ आम फिल्मों के मुकाबले बड़ी फिल्म थी. जिसका बैकग्राउंड म्यूजिक स्कोर करना आसान काम नहीं था. आदेश ने ये मुश्किल काम बखूबी किया. फिल्म में जिस तरह का जोशीला संगीत चाहिए था उन्होंने उसी से मिलता जुलता बैकग्राउंड म्यूजिक भी तैयार किया.

इसी दौरान वो लोकप्रिय टीवी रिएलिटी शो सारेगामा में आदेश श्रीवास्तव बतौर जज नजर आने लगे. 2001 में फिल्म कभी खुशी, कभी गम में आदेश श्रीवास्तव ने सिर्फ एक गाना कंपोज किया. ‘से शावा शावा’ पर अमिताभ बच्चन ऐसा नाचे कि फिर काफी समय तक फिल्मों में पंजाबी धुनों पर काम चलता रहा. फिर 2003 में फिल्म आई- बागबां.

एक बेहद सामान्य से विषय पर बनी फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड कायम कर दिया. सीधी सादी कहानी लोगों के दिलों को छू गई. इस फिल्म में आदेश का ही संगीत था. जिसे लोगों ने जमकर सराहा. फिल्मकार प्रकाश झा आदेश श्रीवास्तव को अपना ‘लकी मैस्कट' मानते थे. उन्होंने जब फिल्म राजनीति बनाई तो उसमें कई संगीतकारों को शामिल किया. इस फिल्म में शास्त्रीय रागों को छूते हुए कंपोज किया गया गाना मोरा पिया मोसे बोलत नाही अब तक सुपरहिट गानों में गिना जाता है. फिल्मों के अलावा आदेश विदेशों में लगातार शो करते रहे. उन्होंने अमेरिकी गायक एकॉन सहित दुनिया के कई जाने माने कलाकारों के साथ फ्यूजन किया. 2000 से लेकर 2010 तक आदेश ने जो भी किया वो सब का सब हिट हुआ. अभी करियर अपने ‘पीक’ पर था जब उन्हें पता चला कि वो अपने शरीर में कैंसर जैसी बीमारी लिए घूम रहे हैं.

पहले तो इस बात को स्वीकार करने में थोड़ा वक्त लगा लेकिन जब एक बार दिल कड़ा कर लिया तो फिर आदेश फाइटर बन कर इस बीमारी से लड़े. डॉक्टरों के मना करने के बाद भी उन्होंने अपने स्टूडियो जाना बंद नहीं किया. अपनी बीमारी के दौरान उन्होंने स्टेज पर गाने गाए. हनुमान चालीसा और सुंदरकांड जैसी धार्मिक रचनाओं को रिकॉर्ड किया. उन्होंने अपने दिमाग से ही निकाल दिया कि उन्हें कैंसर है. वो ठीक भी हो गए थे. लेकिन जब बीमारी एक बार जाकर वापस आ जाए तो शरीर टूट जाता है. आदेश का शरीर भी इस बार बीमारी ने तोड़ दिया. एक ‘मल्टीटैलेंटेड’ कलाकार समय से पहले ही दुनिया छोड़ गया.

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