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चेखव: पाठकों को सोचने पर मजबूर करने वाला साहित्यकार

पेशे से डॉक्टर रहे रूसी साहित्यकार चेखव साहित्य में डॉक्टर की तरह पड़ताल तो भले ही करते हैं लेकिन कोई समाधान नहीं देते हैं

Updated On: Jan 29, 2018 08:27 AM IST

Piyush Raj Piyush Raj
कंसल्टेंट, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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चेखव: पाठकों को सोचने पर मजबूर करने वाला साहित्यकार

दुनिया में बहुत कम ही ऐसे साहित्यकार हुए हैं जिनकी रचनाएं दूसरे देशों और दूसरी भाषाओं में भी चाव से पढ़ी जाती हैं. रूसी साहित्यकार अंतोन चेखव भी इसी श्रेणी में आते हैं.

1917 की रूसी क्रांति की पृष्ठभूमि को तैयार करने में रूसी साहित्यकारों की बहुत बड़ी भूमिका मानी जाती है. इसमें ऐसे बहुत से साहित्यकार थे जो सीधे-सीधे घोषित मार्क्सवादी नहीं थे लेकिन इनकी रचनाओं ने रूसी जनता के दुख-दर्द को इस तरह दिखाया कि रूसी समाज पर इन रचनाओं का गहरा प्रभाव पड़ा. इन रचनाओं ने भी रूसी जनता को अपनी स्थिति को बदलने के लिए उद्वेलित किया.

चेखव के नाटकों और कहानियों ने भी रूसी समाज पर कुछ ऐसा ही प्रभाव डाला. चेखव महज 44 साल जीवित रहे और 1917 की क्रांति से 13 साल पहले ही 1904 में मर गए. चेखव कोई मार्क्सवादी लेखक नहीं थे और न उन्होंने अपनी रचनाओं में कहीं वर्ग-संघर्ष को उस तरीके से दिखाया जिस तरह से उस दौर की मार्क्सवाद से प्रभावित रचनाओं में दिखाया जाता था.

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चेखव का मानना था कि वे अपनी रचनाओं में समस्या का कोई समाधान नहीं देंगे बल्कि पाठक और दर्शकों को इसके बारे में स्वतंत्र रूप से छोड़ देंगे. चेखव की यह विशेषता उनकी कहानियों में भी दिखती है और उनके नाटकों में. प्रेमचंद के शब्दों को उधार लेकर कहें तो चेखव की रचनाएं राजनीति के आगे चलने वाली मशाल हैं.

आधुनिक कहानी और नाटकों के जन्मदाता

चेखव को आधुनिक कहानी लेखन और आधुनिक नाटकों की शुरुआत करने वाले प्रतिनिधि रचनाकारों में शामिल हैं. चेखव की रचनाओं ने आधुनिक कहानियों और नाटकों को एक दिशा देने का काम किया है. चेखव ने अपने छोटे से जीवन में सिर्फ 4 नाटक लिखे थे- द सीगल, अंकल वान्या, तीन बहनें और चेरी का बाग. ये चारों नाटक आज भी दुनिया के कई देशों मंचित किए जाते हैं. यह चेखव की रचनात्मक दृष्टि ही थी कि ये आज भी प्रासंगिक हैं.

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नाटकों की तरह चेखव की कहानियां भी प्रासंगिक हैं. चेखव ने रूस के आम आदमियों के जीवन को अपनी कहानियों का विषय बनाया है. चेखव ने अपनी कहानियों में शिक्षक, किसान, गाड़ीवान जैसे आम लोगों को अपना पात्र बनाया है.

चेखव ने इन कहानियों में रूसी समाज की विसंगतियों को दिखाया है. इसके अलावा चेखव ने अपनी कहानियों में धन, संपत्ति और ताकत को अप्रासंगिक भी बताया है. शर्त नामक कहानी में चेखव ने संपत्ति की जगह ज्ञान को बहुत ही भावनात्मक स्थापित किया है. इसी तरह कमजोर नामक कहानी में ताकतवर और कमजोर आदमी के संबंधों को बहुत ही खूबसूरत अंदाज में पिरोया गया है. दुख नामक कहानी में चेखव ने बड़ी ही सूक्ष्मता से यह दिखाया है कि कैसे एक गरीब व्यक्ति का दुख सुनने के लिए किसी के पास समय नहीं है और आखिर उसे अपना दुख हल्का करने के लिए इस दुख को अपने घोड़े को सुनना पड़ता है.

चेखव पेशे से डॉक्टर थे और वे कहा करते थे कि चिकित्सा मेरी धर्मपत्नी है और साहित्य प्रेमिका. जिस तरह से एक कुशल डॉक्टर बीमारी के इलाज के लिए शरीर की गहराई से पड़ताल करता है, चेखव अपनी रचनाओं में उसी गहराई के साथ रूसी समाज की पड़ताल करते हैं. चेखव विज्ञान और साहित्य के अंतर से परिचित थे, इस वजह से वे साहित्य में डॉक्टर की तरह पड़ताल तो भले ही करते हैं लेकिन कोई समाधान नहीं देते हैं. उनकी रचनाएं खुद पाठकों को समाधान खोजने के लिए प्रेरित करती हैं.

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