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जन्मदिन विशेष: पटियाला पेग और रणजी ट्रॉफी शुरू करने वाले महाराजा भूपिंदर सिंह

अपनी रंगीन मिजाज़ी के लिए मशहूर महाराजा के पास 2930 हीरों का एक हार भी था.

Updated On: Oct 12, 2017 08:57 AM IST

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee

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जन्मदिन विशेष: पटियाला पेग और रणजी ट्रॉफी शुरू करने वाले महाराजा भूपिंदर सिंह

दुनिया में बहुत सारी जगहों के नाम खाने की चीजों से जुड़े हैं. मसलन आगरे का पेठा, मथुरा के पेड़े, फ्रेंच टोस्ट, मैसूरपाक वगैरह, वगैरह. मगर जब पीने के साथ किसी जगह का नाम जोड़ने की बात आती है तो पहला नाम पटियाला का आता है. पटियाला पेग का नाम शराब पीने और न पीने वाले सबको पता है.

पटियाला पेग का आविष्कार पटियाला के महाराजा भूपिंदर सिंह ने किया था. पंजाब में चंडीगढ़ के करीब की पटियाला रियासत ने यूं तो फैशन इंडस्ट्री को पटियाला सलवार भी दी है. संगीत का पटियाला घराना भी मशहूर है. मगर पटियाला पेग में अपना एक रंग है जिसके चलते उसपर कई गाने और कहावते भी बन चुकी है.

महाराजा भूपिंदर सिंह को अपनी रंगीन मिजाजी और अय्याश जिंदगी के लिए जाने जाता है. वो कई सारी रानियों, उपरानियों वाले हरम, कई रॉल्सरॉयस गाड़ियों और महंगे शौक के लिए जाने जाते हैं. उनके पास मशहूर हीरा कंपनी कार्टियर का बनाया एक हीरों का हार था जिसमें 2930 हीरे और दुनिया का सातवां सबसे बड़ा हीरा लगा था.

महाराजा 1911 में भारतीय क्रिकेट टीम की तरफ से इंग्लैंड दौरे पर भी गए थे. उन्होंने क्रिकेट टीम की कप्तानी भी की. महाराजा ने मशहूर मेरिलेबॉन क्रिकेट क्लब (एमसीसी) की टीम की तरफ से भी क्रिकेट खेला. महाराजा के खाते में हिंदुस्तान की घरेलू क्रिकेट सीरीज रणजी ट्रॉफी शुरू करने का भी श्रेय है.

अपने मशहूर हीरों के हार के साथ महाराजा भूपिंदर सिंह

अपने मशहूर हीरों के हार के साथ महाराजा भूपिंदर सिंह

कैसे बना पटियाला पेग

इसके बनने के पीछे दो कहानियां हैं. पहली कहानी है कि महाराजा को सेहत से जुड़ी वजहों के लिए ज्यादा पीने के लिए मना किया गया. महाराजा को कहा गया कि वो एक पेग शराब पिएं और गिलास में शराब दो उंगलियों की ऊंचाई तक रहे. दो उंगलियां मतलब एक के एक ऊपर दो उंगलियां. महाराजा ने भी दो उंगलियों का ही पेग बनाया. मगर उसमें सबसे ऊपर वाली और सबसे नीचे वाली दो उंगलियां शामिल कीं. अब महाराजा को कौन मना करता, धीरे-धीरे पटियाला के महाराजा का ये पेग पटियाला पेग बन गया.

दूसरी कहानी है कि महाराजा की पोलो टीम से मैच खेलने आयरलैंड की टीम आई. महाराजा नहीं चाहते थे कि ये मैच आयरिश जीतें. उन्होंने सारे खिलाड़ियों को दावत दी. दावत में जो शराब परोसी गई उसके पेग का साइज़ बड़ा था. ऐसे में जब किसी खिलाड़ी ने पूछा कि ये पेग इतना बड़ा क्यों है? तो महाराजा ने कहा ये पटियाला है और पटियाला के पेग इतने ही बड़े होते हैं.

कितना बड़ा होता है पटियाला पेग

पुराने लोगों की मानें तो 120 एमएल के करीब का पेग पटियाला पेग कहलाता है. आजकल हिंदुस्तान के बार जो पेग सर्व करते हैं वो नाम के पटियाला पेग होते हैं. उनमें 90 एमएल से ज्यादा शराब नहीं परोसी जाती है.

दुनिया में नहीं है पेग सिस्टम

कुछ लोगों को जानकर हैरानी होगी कि दुनिया के ज्यादातर देशों में पेग सिस्टम नहीं है. वहां सिंगल, मतलब 30 एमएल शराब का शॉट या डबल यानी 89 एमएल तक शराब की निश्चित माप ही परोसी जाती है. पटियाला पेग को लेकर जो नॉस्टैल्जिया है उसका मजा लें मगर याद रखें कि शराब पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है.

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