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आखिर क्यों बप्पी लाहिड़ी से नाराज हो गए थे इंडस्ट्री के बाकी संगीतकार

बप्पी पर संगीत चुराने का आरोप भी लगा जिसके जवाब में वो कहते रहे कि उन्होंने चोरी नहीं की बल्कि उन्होंने कुछ गाने कहीं और की धुनों से प्रभावित होकर बनाए.

Updated On: Nov 27, 2018 07:22 AM IST

Shivendra Kumar Singh Shivendra Kumar Singh

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आखिर क्यों बप्पी लाहिड़ी से नाराज हो गए थे इंडस्ट्री के बाकी संगीतकार

1982 की बात है. प्रकाश मेहरा अमिताभ बच्चन के साथ एक फिल्म बना रहे थे. इससे पहले वो अमिताभ बच्चन के साथ जंजीर, मुकद्दर का सिंकदर और लावारिस जैसी सुपरहिट फिल्म बना चुके थे. बतौर संगीतकार कल्याण जी आनंद जी प्रकाश मेहरा की टीम का अभिन्न हिस्सा थे. जंजीर, मुकद्दर का सिंकदर और लावारिस का संगीत कल्याण जी आनंद जी ने ही दिया था. लावारिस तो इस नई फिल्म से सिर्फ एक साल पहले ही रिलीज हुई थी. लेकिन इस एक साल में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में म्यूजिक का ट्रेंड काफी तेजी से बदला था.

एक नए संगीतकार ने एंट्री ली थी और वो बड़े बड़े संगीतकारों को चुनौती दे रहा था. प्रकाश मेहरा ने अपनी नई फिल्म नमक हलाल के लिए भी इसी नए संगीतकार को चुना. इसके बाद जो हुआ वो इतिहास में दर्ज है. फिल्म के गाने सुपरहिट हुए. इसी फिल्म में उस संगीतकार 12 मिनट का एक लंबा गाना कंपोज किया. वो गाना लिखा था अनजान ने और उसे अमिताभ बच्चन पर फिल्माया गया था.

वो गाना था- पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी. जो हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के सबसे लंबे गानों में गिना जाता है. इस फिल्म का एक और गाना रात बाकी बात बाकी भी कमाल का हिट हुआ था. अब आप समझ गए होंगे कि बात बप्पी लाहिड़ी की हो रही है. इस गाने के उतार चढ़ाव को याद कीजिए आपको बप्पी लाहिड़ी का कमाल समझ आएगा.

इसी साल दिसंबर में एक और फिल्म रिलीज हुई. उस फिल्म को बब्बर सुभाष ने बनाया था. फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती थे. वो फिल्म थी डिस्को डांसर. एक बार फिर बप्पी लाहिड़ी की बनाई धुनों से सजी इस फिल्म ने तहलका मचा दिया. वो हिंदुस्तान की पहली ऐसी फिल्म थी जिसने 100 करोड़ रुपए का बिजनेस किया था. कहानी डॉ. राही मासूम रजा की थी. इस फिल्म के गाने आई एम ए डिस्को डांसर, जिमी जिमी आजा आजा, कोई यहां आहा नाचे नाचे, याद आ रहा है, गोरों की ना कालों की दुनिया है दिलवालों की ने तहलका मचा दिया.

ये नए किस्म का संगीत था. बप्पी लाहिड़ी देखते-देखते डिस्को किंग बन गए. कॉमेडियन कपिल शर्मा के शो में उन्होंने बताया था कि कैसे एक बार माइकल जैक्सन उनके पास आए और उनके गले में पड़े गणपति बाबा के लॉकेट की तारीफ करने लगे. फिर उन्होंने बप्पी दा से उनका नाम पूछा. उन्हें जब ये पता चला कि बप्पी लाहिड़ी ने ही फिल्म डिस्को डांसर का म्यूजिक दिया है तो उन्होंने कहा कि उन्हें इस फिल्म का एक गाना पसंद है. वो गाना था जिमी जिमी, आजा आजा.

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बप्पी लाहिड़ी के लिए करोड़ों हिंदुस्तानियों का दिल जीतना तो आसान था लेकिन फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाना मुश्किल था. ऐसा इसलिए क्योंकि बप्पी लाहिड़ी का संगीत ‘ट्रेडिशनल’ संगीत से काफी अलग था. रंभा हो, कोई यहां नाचे अउआ अउआ जैसे गानों पर स्थापित और प्रतिष्ठित संगीतकारों की नजरें टेढ़ी थीं. ऐसा कहा जाता है कि उस दौर में कई संगीतकारों ने खुलकर सवाल किया था कि ये कैसे गाने हैं.

बावजूद इसके ये सारे गाने जबरदस्त हिट हो रहे थे. 80 के दशक में एक के बाद एक बप्पी लाहिड़ी के पास फिल्में आ रही थीं. उनके पास काम का अंबार था. जबकि दूसरे संगीतकारों के पास काम की कमी होने लगी थी. कहते हैं कि उस दौर में सबसे ज्यादा नुकसान आरडी बर्मन को हुआ था. आरडी बर्मन महान संगीतकार थे. हिंदी फिल्मों में वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट को लाने का श्रेय उन्हीं को दिया जाता है. बप्पी लाहिड़ी उनसे भी कई कदम आगे निकलकर प्रयोग कर रहे थे.

उनके प्रयोग लोगों को पसंद भी आ रहे थे. यही वजह थी कि बप्पी लाहिड़ी के काम को लेकर ज्यादातर संगीतकारों में नाराजगी का माहौल था. कहा जाता है कि आरडी बर्मन तो उनसे इतने नाराज थे कि उन्होंने अपनी पत्नी आशा भोसले को बप्पी लाहिड़ी की फिल्मों में गाने से मना ही कर दिया था. हालांकि कुछ सालों बाद आशा भोंसले ने फिर बप्पी लाहिड़ी के लिए गाना गाया.

दरअसल 27 नवंबर 1952 को कोलकाता में जन्में बप्पी लाहिड़ी बॉम्बे को जीतने के इरादे से ही वहां गए थे. उनके पिता अपारेश लाहिड़ी भी अच्छे गायक थे. मां बांसरी लाहिड़ी भी शास्त्रीय संगीत की नामी कलाकार थीं. बप्पी ने तीन साल की उम्र में तबला बजाना शुरू कर दिया था. एल्विस प्रेसले उनके आदर्श थे. एल्विस प्रेसले के लिए बप्पी लाहिड़ी पागल थे. छोटे थे तब से ही ये सपना उनकी आंखों में पलने लगा था कि अगर कभी पैसे आए तो वो वैसे ही ‘स्टाइल स्टेटमेंट’ देंगे तो प्रेसले का है.

मां से शास्त्रीय संगीत की तालीम उन्हें मिल ही रही थी. हुआ यूं था कि हिंदी फिल्मों में गाने के बाद भी उनके पिता अपारेश लाहिड़ी वापस कोलकाता आ गए थे. उन्हें बॉम्बे की जिंदगी पसंद नहीं आई थी. अपने पिता से बिल्कुल उलट बप्पी लाहिड़ी शुरू से ही बॉम्बे में अपना नाम कमाना चाहते थे. 19 साल के थे जब उन्हें पहली बार संगीत कंपोज करने का मौका मिला था.

सच ये है कि इस छोटी सी उम्र में उन्होंने ना सिर्फ धुनें तैयार करना शुरू कर दिया था बल्कि अगला एक दशक ऐसा था जब पूरा हिंदुस्तान उनकी धुनों पर थिरक रहा था. उन्हें गोल्डेन म्यूजिक डायरेक्टर कहा जाने लगा था. दिलचस्प बात ये है कि इन सारी उपलब्धियों के बाद भी उन्हें खारिज करने वाले संगीतकार अपनी जिद पर अड़े थे.

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ये बचपन की तालीम और काबिलियत का असर ही था कि बप्पी लाहिड़ी ने अपनी फिल्मों में तड़क-भड़क से हटकर कुछ बेहद मेलोडियस गाने भी कंपोज किए. इंतहा हो गई इंतजार की, याद आ रहा है तेरा प्यार, चलते चलते मेरे ये गीत याद रखना, किसी नजर को तेरा इंतजार आज भी है और दिल में हो तुम जैसे दर्जनों गाने इस फेहरिस्त में शामिल हैं.

उन पर संगीत चुराने का आरोप भी लगा जिसके जवाब में वो कहते रहे कि उन्होंने चोरी नहीं की बल्कि उन्होंने कुछ गाने कहीं और की धुनों से प्रभावित होकर बनाए. कुछ साल पहले फिल्म डर्टी पिक्चर का गाना ऊ लाला ऊ लाला ने भी जमकर धूम मचाई. अपने शानदार संगीत के अलावा वो अपने स्टाइल स्टेटमेंट की वजह से भी जाने जाते हैं. उनके गले में सोने की दर्जनों चेन होती हैं. दिन हो या रात उनकी आंखों पर चश्मा होता है. उनपर चुटकुले बनते हैं, लेकिन उन्हें उन चुटकुलों से नहीं बल्कि उन दो लॉकेट से प्यार है जो उनकी मां और उनकी पत्नी ने दिया है. उन्हें लगता है कि उनकी कामयाबी में उनके उन जो लॉकेट का भी रोल है.

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