S M L

अयोध्या: रामलला के दर्शन करने से पहले हनुमान के इस मंदिर में हाजिरी लगाना क्यों है जरूरी?

मान्यता है कि राम लला के दर्शन करने से पहले हनुमान के मंदिर हनुमानगढ़ी जाना चाहिए. यहां पहुंचने के लिए 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं

Updated On: Dec 06, 2018 09:26 AM IST

Rituraj Tripathi Rituraj Tripathi

0
अयोध्या: रामलला के दर्शन करने से पहले हनुमान के इस मंदिर में हाजिरी लगाना क्यों है जरूरी?

अयोध्या में राम मंदिर को लेकर सियासी हलचल और बयानबाजी जारी है. यह मामला इसलिए भी तूल पकड़ रहा है क्योंकि चुनाव नजदीक हैं और कल 6 दिसंबर है यानि वह दिन जब बाबरी मस्जिद ढहाई गई थी. वीएचपी इस दिन को संकल्प दिवस के रूप में मना रही है. 6 दिसंबर को वह सभी मंदिरों में पूजा अर्चना भी करवाएगी.

ऐसे में यह जान लेना जरूरी है कि राम लला के दर्शन करने से पहले क्या जरूरी है. राम लला के दर्शन के लिए जाने से पहले भक्तों को इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि वह पहले हनुमानगढ़ी जाएं. ऐसा करने के पीछे मान्यता यह है कि हनुमान के इस मंदिर में जाए बिना अगर राम मंदिर चले गए तो यात्रा अधूरी मानी जाएगी. मान्यता यह भी है कि हनुमान की आज्ञा के बिना कोई राम लला के दर्शन के लिए नहीं जा सकता.

ये भी पढ़ें: आतंकी मसूद अजहर ने दी धमकी, कहा- राम मंदिर बना तो दिल्ली से काबुल तक मचेगी जबरदस्त तबाही

अयोध्या भगवान राम की नगरी है जहां सरयू में लोग अपने पाप धोने आते हैं. मान्यता है कि राम लला के दर्शन करने से पहले हनुमान के मंदिर हनुमानगढ़ी जाना चाहिए. यहां पहुंचने के लिए 76 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं. जिन्हें केवल वही शख्स चढ़ सकता है जिस पर हनुमान की कृपा हो. बिना उनकी इच्छा के कोई उनके मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता.

इस मंदिर में हनुमान की 6 इंच की प्रतिमा है जो दक्षिणमुखी है. कहा जाता है कि अयोध्या कई बार बनी और बिखरी लेकिन हनुमान का यह मंदिर ऐसा ही बना रहा. प्राचीन इतिहास में बताया गया है कि भगवान राम जब लंका में रावण का वध करके अयोध्या लौटे तो उन्होंने परमभक्त हनुमान को यही जगह रहने के लिए दी थी और श्रीराम ने कहा था कि जो भी मेरे दर्शन के लिए अयोध्या आएगा, उसे पहले हनुमान का दर्शन और पूजा करनी होगी.

धर्म की दीवार में कैद नहीं हुआ यह मंदिर, नवाब के बेटे को भी मिला था जीवनदान 

इस मंदिर में हुनमान चालीसा की लाइनें दीवारों पर लिखी हैं. यहां के बारे में दिलचस्प यह है कि यह मंदिर कभी धर्म की दीवारों में कैद नहीं हुआ. यहां जिसने भी जो मांगा, वह मिला. इसके पीछे कहानी है कि अयोध्या के नवाब मंसूर अली के पुत्र की हालत एक बार बहुत खराब हो गई थी.

तमाम कोशिशों के बाद भी वह ठीक नहीं हो रहा था और मरने की नौबत आ गई. ऐसे में नवाब ने हुनुमानलला के दरबार में हाजिरी लगाई और उनसे अपने बेटे की जान बचाने की प्रार्थना की.

हनुमान के आशीर्वाद से नवाब का बेटा सही हो गया. जिसके बाद नवाब ने ही इस मंदिर का जीर्णोंद्धार कराया. यह भी कहा जाता है कि नवाब हनुमान की महिमा से इतना भावुक हो गए कि उन्होंने ताम्रपत्र पर लिखकर इस बात का ऐलान किया कि इस मंदिर पर किसी राजा या शासक का कोई अधिकार नहीं रहेगा और यहां के चढ़ावे से कोई टैक्स वसूल नहीं किया जाएगा.

ये भी पढ़ें: अंबेडकर ट्रस्ट ने राम जन्मभूमि पर बौद्धों के हक के पक्ष में 1991 में किया था मुकदमा

मान्यता यह भी है कि जो भक्त हनुमान के इस मंदिर में लाल चोला चढ़ाते हैं, उनके ग्रह शांत हो जाते हैं और जीवन में सफलता और समृद्धि मिलती है. इसके अलावा अयोध्या के बारे में भी अथर्ववेद में कहा गया है कि यह ईश्वर का नगर है जो स्वर्ग के समान है. जिसकी रक्षा हनुमान स्वयं करते हैं.

ये भी पढ़ें: बाबरी विध्वंस: एक-एक कर तीनों गुंबद टूटे और उखड़ गई हिंदू समाज की विश्वसनीयता

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
Jab We Sat: ग्राउंड '0' से Rahul Kanwar की रिपोर्ट

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi