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आप जो पनीर खा रहे हैं वो सेहतमंद है या हानिकारक...सच्चाई डरावनी है

पनीर पूरे उत्तर भारत में खाया जाता है (अफसोस कि पनीर खाने का चलन अब दक्षिण भारत में भी पांव पसार रहा है) लेकिन पंजाब पनीर के लिए किसी गृहप्रदेश की तरह है.

Updated On: Oct 23, 2018 04:59 PM IST

Maneka Gandhi Maneka Gandhi

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आप जो पनीर खा रहे हैं वो सेहतमंद है या हानिकारक...सच्चाई डरावनी है
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बीते दो महीनों से पंजाब में एक बड़ा संकट आन खड़ा हुआ है. यहां हर स्थानीय अखबार के पहले पन्ने पर इस संकट की सुर्खियां लग रही हैं. इस सूबे का पसंदीदा डिश है पनीर और वही पनीर बाजार में कहीं ढूंढे नहीं मिल रहा. पनीर को बनाया जाता है दूध में नींबू का रस/ लैक्टिक एसिड/ साइट्रिक एसिड/ टारटरिक एसिड सरीखी वनस्पति-जन्य खटाई डालकर या फिर फटे हुए दूध का खट्टा पानी मिलाकर.

पनीर पूरे उत्तर भारत में खाया जाता है (अफसोस कि पनीर खाने का चलन अब दक्षिण भारत में भी पांव पसार रहा है) लेकिन पंजाब पनीर के लिए किसी गृहप्रदेश की तरह है. यहां हर घर में पनीर खाया और परोसा जाता है- मानो यह कोई रोजाना की जरूरी रस्म हो. जहां तक मेरा सवाल है, पनीर मुझे तनिक भी नहीं भाता. मैं भूखे रहना बर्दाश्त कर लूंगी लेकिन पनीर खाना नहीं और मैं हवाई जहाज से सफर करने के दौरान ऐसा करती भी हूं क्योंकि हवाई जहाज में शाकाहारियों के लिए पनीर के सिवाय भोजन में और कोई विकल्प नहीं होता.

बरसों से मैं लोगों को आगाह करती रही हूं कि वे दूध या दूध से बनी चीजें ना खाएं. ऐसा करने की एक और वजह भी है. दरअसल आप पनीर के नाम पर जो खाते हैं वह पनीर होता ही नहीं. जबतक कि आप इसे किसी विश्वस्त स्रोत से हासिल दूध से अपने घर में ना बनाएं. वजह ये कि दूध भी ज्यादातर मामलों में दूध नहीं होता. आइए, कुछ हिसाब लगाएं और बात को कुछ सबूतों के सहारे समझें.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत में सालाना तकरीबन 15 करोड़ टन दूध का उत्पादन होता है. अगर यह सारा दूध सिर्फ पनीर बनाने में इस्तेमाल हो तो भारत में 7 लाख टन पनीर बन पाएगा. जाहिर है, ऐसा संभव नहीं क्योंकि दूध के एक छोटे से हिस्से का ही इस्तेमाल पनीर बनाने में होता है. लेकिन पनीर की बिक्री सालाना 5 लाख टन की है. तो फिर इतना पनीर आता कहां से है?

यह पनीर आता है मैदा, पॉम ऑयल, बेकिंग पाऊडर, पुराने और बेकार हो चुके स्किम्ड मिल्क, डिटर्जेंट, सोडा के बायकार्बोनेट तथा सल्फ्यूरिक एसिड के घालमेल से. यह वही सल्फ्यूरिक एसिड है जिसका इस्तेमाल लेड-एसिड बैट्रियों, मेटल क्लीनर्स, ड्रेन क्लीनर्स तथा जंगरोधी (एंटी रस्ट) उत्पादों में होता है. यही सल्फ्यूरिक एसिड महिलाओं पर भी फेंका जाता है.

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ढेर सारी चीजों के इस मिश्रण को तबतक उबाला जाता है जबतक कि वह सेमी सॉलिड प्रोडक्ट का रूप ना ले ले. इसके बाद मिश्रण को किसी बर्तन में उड़ेल लिया जाता है, उसे पीटकर फैलाया जाता है और कुछ घंटों के लिए यों ही छोड़ देते हैं. आखिर में, इस सामग्री को पांच किलो के टुकड़े में काटा जाता है और पनीर कहकर बेचा जाता है.

इस प्रक्रिया में छाड़न के तौर पर जो कुछ बचता है उसे उत्पादन की जगह पर ही गैरकानूनी तरीके से बने बोरवेल में डाल दिया जाता है. इससे मीलों तक भूमिगत जल प्रदूषित होता है. मोटा-मोटी हिसाब लगाए तो ऊपर बताए गए ढर्रे से 5 किलो पनीर तैयार करने में बनाने वाले को 30 रुपए से 150 रुपए तक का खर्चा बैठता है. इसे थोक भाव में 150-200 रुपए प्रतिकिलो बेचा जाता है, खुदरा भाव 300+ रुपए प्रतिकिलो है..

कैसे होता है यह गोरखधंधा 

फैक्ट्री का मालिक औद्योगिक इलाकों में गंदी झोपड़ियों में पनीर बनाता है. मालिक यह उत्पाद फर्जी डेयरीज को बेचते हैं.फर्जी डेयरी भी अक्सर इन फैक्ट्री मालिकों की ही होती है. फैक्ट्री मालिक वैध डेयरीज में भी पनीर बेचते हैं. ऐसी डेयरीज में कुछ गाय/भैंस खड़ी होती हैं और शायद यहां इन पशुओं से थोड़ा बहुत दूध भी निकाला जाता है. डेयरीज इस पनीर को मिठाई की बड़ी दुकानों तथा बेकरीज को बेचते हैं. पनीर बनाने की ज्यादातर फैक्ट्रियां रात में चलती हैं, उत्पाद को मुंह अंधेरे(भोर) बिक्री के लिए भेज दिया जाता है. इसके बाद पूरे दिन के लिए फैक्ट्री बंद रहती है. टोल पर कोई रोक ना ले या फिर कहीं खोज-पूछ ना हो जाय- इसके लिए एहतियात बरतते हुए पनीर को टेम्पो की जगह कार/एसयूवी में लादकर गंतव्य तक पहुंचाया जाता है.

जैसे वन विभाग की मिलीभगत से जंगल की कटाई होती है उसी तरह नकली खाद्य-पदार्थों का धंधा फूड इंस्पेक्टर और डेयरी डिपार्टमेंट की मिलीभगत के सहारे चलता है. मंत्री की ओर से जब-तब छापा मारने के आदेश जारी होते हैं. कुछ लोगों को जेल होती है, नकली खाद्य-पदार्थ बाजार से गायब हो जाता है और इसके बाद सबकुछ फिर से रोजमर्रा के ढर्रे पर चलने लगता है. फैक्ट्री मालिकों के मुताबिक स्थानीय हेल्थ ऑफिसर ‘दस्तूरी’ के तौर पर महीने के 5000 रुपए लेता है.

खाद्य-पदार्थ के हर नमूने को लैब से हरी झंडी देने के लिए 10 हजार से 15 हजार रुपए लिए जाते हैं. पंजाब बहुत छोटा राज्य है और यहां ढेर सारी तादाद में नकली पनीर की फैक्ट्रियां का होना कोई मामूली बात नहीं. इनमें से कोई भी फैक्ट्री डेयरी के नजदीक नहीं- इसे बहुत पहले ही खतरे के एक संकेत के रूप में लिया जाना चाहिए था. इन फैक्ट्रियों में ज्यादातर औद्योगिक इलाकों या फिर छोटे-छोटे गांवों में हैं. यों दर्जनों लोगों को जेल हुई है लेकिन मामले में स्वास्थ्य विभाग के किसी भी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई है.

इस साल पूरे अगस्त महीने में पंजाब में नकली दूध/पनीर बनाने वाली हजारों फैक्ट्रियों पर छापामारी हुई. चिलिंग सेन्टर(प्रशीतन केंद्र), क्रीमरी(घी-मक्खन बनाने के केंद्र), दूर दराज के इलाकों में बने दुग्ध-उत्पादक केंद्र तथा टोल पर टैंकर की जांच से खुलासा हुआ कि दूध और उससे बनी चीजों में एसिड तथा अवैध रंजकों(कलरिंग एजेंट) का इस्तेमाल हो रहा है. यहां तक कि जिन डेयरी में पनीर वैध तरीके से बनाया जा रहा था वहां भी बहुत ज्यादा गंदगी थी. कामगारों के हाथ और देह पर मैल थी, पनीर बनाने के उपकरणों में जंग लगी हुई थी. सो पनीर भोजन के लिहाज से सुरक्षित नहीं था.

बाजार से पनीर के गायब हो गया है. इसका मतलब हुआ कि ज्यादातर या कह लें पूरा ही पनीर नकली था. पनीर से बनी ज्यादातर मिठाइयां दुकानों से गायब हो गईं हैं. दुकानदारों और डेयरी मालिकों ने बड़े ऑर्डर लेने से इनकार कर दिया है.

यहां नीचे उदाहरण के तौर पर कुछ वाकयों का जिक्र किया जा रहा है. इससे आपको अंदाजा हो जाएगा कि नकली पनीर का उद्योग कितना बड़ा है :

- मोहाली के स्वास्थ्य विभाग ने जिले के बल्लोमाजरा गांव में पनीर बनाने के एक ठिकाने पर छापा मारा. यहां से 20.6 क्विंटल नकली पनीर, 33 क्विन्टल नकली स्किम्ड मिल्क, सल्फ्यूरिक एसिड तथा अन्य रासायनिक सामग्री बरामद हुई. फैक्ट्री का मालिक रोजाना चंडीगढ़, पिंजौर, कालका, राजपुरा और पंचकूला के रेस्टोरेंट और ढाबों में तथा स्थानीय स्तर पर कॉलोनियों में पनीर की आपूर्ति करता आ रहा है. फैक्ट्री मालिकों का दावा है कि वे लोग चीज, घी, मक्खन तथा अन्य डेयरी उत्पाद 5000 लीटर दूध से बनाते हैं और यह दूध संगरुर के लेहरगगा गांव से एकत्र किया जाता है लेकिन छापे के दौरान फैक्ट्री में डेयरी का सामान नहीं मिला. फैक्ट्री मालिक के पास किसी भी खाद्य-उत्पाद के लिए लाइसेंस नहीं था. पूरे परिसर में गंदगी फैली हुई थी.

- नाभा, पटियाला के खोक गांव की दो फैक्ट्रियों पर स्वास्थ्य विभाग, खाद्य-सुरक्षा विभाग, डेयरी विकास विभाग तथा पुलिस ने संयुक्त रुप से छापा मारा. इसमें 8 क्विन्टल नकली दूध, 12 क्विन्टल नकली पनीर, स्किम्ड मिल्क तथा कास्टिक सोडा के बक्से बरामद हुए.

- अमृतसर के गोंसावल गांव में छापेमारी के दौरान घटिया दर्जे की स्किम्ड मिल्क की 58 थैलियां बरामद हुईं. हर थैली में 25 किलो स्किम्ड मिल्क भरा था. 20 किलो पनीर तथा 30 किलो मिलावटी दूध भी बरामद हुआ.

- अमृतसर के रामतीरथ रोड पर कायम एक डेयरी में छापे के दौरान स्किम्ड मिल्क की 74 थैलियां, 35 किलो पनीर तथा 150 किलो मिलावटी दूध बरामद हुआ.

- बरनाला के नीमवाला मोर गांव, फतेहगढ़ साहिब जिले के चंडीला गांव तथा गुरदासपुर और पठानकोट में पनीर तथा खोया बनाने वाली फैक्ट्रियों में बड़ी मात्रा में नकली पनीर तथा खोया बरामद हुआ.मनसा में मिठाई की दुकानों में इस नकली पनीर से बना कई क्विन्टल पतीसा बेचा जा रहा था.

- खाद्य सुरक्षा के एक दल ने समराला तथा लुधियाना के बाघापुराना में पनीर बनाने वाले एक ठिकाने पर छापा मारा. दल को 3 क्विन्टल नकली पनीर, 90 लीटर पॉम ऑयल, पॉम ऑयल के 39 खाली कनस्तर(हर कनस्तर की क्षमता 15 लीटर की) और स्किम्ड मिल्क पाउडर की 17 थैलियां मिलीं. हर थैली में 25 किलो स्किम्ड मिल्क पाउडर था.

- पटियाला जिले के राजपुरा में 160 किलो नकली पनीर ले जाता हुआ एक वाहन पकड़ा गया. यह वाहन हरियाणा के जिंद जिले के नरवाणा से आ रहा था. वाहन को खाद्य-सुरक्षा दल ने रोका. वाहन को राजपुरा की डेयरी पहुंचना था. नरवाणा के मालिक ने स्वीकार किया कि वह डेयरी को नकली पनीर 160 रुपए प्रतिकिलो के हिसाब से बेचता है और डेयरी इस पनीर को आगे और लोगों को बेचती है.

- संगतपुरा भोंकी गांव में छापेमारी के दौरान 90 किलो पनीर, 1400 किलो दूध, 25 किलो की क्षमता वाली स्किम्ड मिल्क की 18 खाली थैलियां तथा एसएमपी के 2 भरे हुए बैग बरामद हुए.

- रोपर के बुअर माजरा में 12 क्विन्टल पनीर बरामद हुआ. यहां की डेयरी में साफ-सफाई बहुत खस्ताहाल थी और डेयरी मालिक के पास लाइसेंस नहीं था.

- जालंधर की फूड टीम ने आदमपुर में मिठाई की दुकान को पनीर पहुंचाने वाली एक कार को पकड़ा. कार की बैकसीट के रीयर स्टोरेज में पनीर लदा हुआ था. पनीर की जांच चल ही रही थी कि कार का ड्राइवर फरार हो गया.

- तरणतारण के जंडियाला में एक वाहन पकड़ में आया. इसमें 300 किलो नकली खोया बर्फी, मिल्क केक, लड्डू तथा पतीसा लदा हुआ था.

- फरीदकोट के जैतो में खोया बर्फी के सप्लायर की एक दुकान में छापे के दौरान 1.5 किलो नकली बर्फी और मिठाई मिली. खोया बर्फी फजिल्का से लायी गई थी और धोडा बर्फी चंडीगढ़ के डरिया गांव से आयी थी. इन्हें छोटी-छोटी दुकानों के मार्फत बेचा जा रहा था.

- गढ़शंकर में जांच और सैम्पलिंग के दौरान मिठाई की दुकान से 100 किलो नकली खोया पकड़ में आया.

क्या ऐसा सिर्फ पंजाब में ही हो रहा है ? ना, ऐसी बात नहीं. पूरे देश में नकली पनीर बिक रहा है और तकरीबन हर हफ्ते किसी ना किसी स्थानीय टीवी चैनल या अखबार में अवैध रुप से चलायी जा रही ऐसी फैक्ट्री की खबर आती है.

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पिछले माह आई ऐसी ही कुछ खबरों को यहां उदाहरण के तौर पर दर्ज किया जा रहा है:

- न्यूज 24: पानीपत से देहरादून जा रहे एक महिन्द्रा पिकअप में 120 किलो नकली पनीर मिला. बिल पर लिखा हुआ था कि लदा हुआ सामान प्लाईवुड है.

- बंसल न्यूज : मध्य प्रदेश के मुरैना में एक छापे के दौरान 1500 किलो नकली पनीर मिला. पनीर बनाने की फैक्ट्री औद्योगिक इलाके में है. फैक्ट्री में गंदगी फैली थी, चिलचट्टे भरे हुए थे और फर्श पर ही पनीर बनाया और फेंका जा रहा था. फैक्ट्री पर कई दफे छापा पड़ा. फैक्ट्री का मालिक कुछ दिनों तक छिपा रहा. उसने अपना व्यवसाय फिर से चालू कर लिया है.

- एनएनआई: मथुरा की पनीर फैक्ट्री में छापे के दौरान सामने आया कि पनीर बनाने की उपकरण जंग लगे हैं और इस्तेमाल किए जा रहे बर्तन गंदे हैं. फैक्ट्री में चारों तरफ दूध का पाउडर और रिफाइंड ऑयल फैला हुआ था. फैक्ट्री से पनीर दिल्ली भेजा जाता है.

- टाइम्स ऑफ इंडिया, बंगलुरु: बाजार यूरिया और केमिकल्स से बने पनीर से पटा पड़ा है. तमिलनाडु के धरमपुर से लाया गया 5 टन मिलावटी पनीर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया. यह पनीर केमिकल्स से भरा हुआ और सेहत के लिए नुकसानदेह था. पुलिस का कहना है कि केमिकल्स से बना हुआ 100 टन पनीर हर महीने तमिलनाडु से आता है. यहां नकली डेयरी प्रोडक्ट को सलेम मिल्क/पनीर के नाम से बुलाया जाता है.

- पटना : छापे के दौरान पता चला कि पॉश होटल और मिठाई की बड़ी दुकानों में भी मिलावटी या नकली पनीर बेचा जा रहा है. यह पनीर कॉर्न स्टार्च, केमिकल्स, यूरिया तथा मैदा से बनाया जाता है. ये लोग 40-50 रुपए प्रतिकिलो खरीदते हैं और 300 रुपए प्रतिकिलो के भाव से बेचते हैं. स्वास्थ्य विभाग की खाद्य सुरक्षा इकाई की एक रिपोर्ट के मुताबिक शहर की 60 दुकानों तथा ढाबों से उठाए गए पनीर के 60 प्रतिशत नमूनों में मिलावट पाई गई है. कॉटेज चीज(पनीर) की गुणवत्ता बढाने के लिए इसमें स्टार्च मिलाया जाता है. सवाल पूछने पर जांच दल ने बताया कि वो लोग सिर्फ स्टार्च की मिलावट का ही पता लगा सकते हैं, एसिड और अन्य रसायनों की मिलावट का पता लगाने में वो सक्षम नहीं हैं तथा अगमकुआं का लैब बंद पड़ा है !!

नकली और असली पनीर के बीच फर्क कैसे करें ? शुद्ध पनीर अपनी बनावट में मुलायम होता है. मिलावटी पनीर रबड़ सरीखा जान पड़ता है. शुद्ध पनीर में दूध का स्वाद होता है जबकि नकली पनीर बेस्वाद होता है. कच्चे पनीर पर आयोडिन का घोल डालिए. अगर रंग बदलकर काला-नीला हो जाय तो पनीर नकली है.

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