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जानवरों की पूजा का मानवीय इतिहास है बहुत पुराना

आधुनिक दुनिया में, अधिकांश धर्मों ने मनुष्य-पशु देवत्वों की अवधारणा को छोड़ दिया है. हमारे देवता अब विशुद्ध मानव के गुणों वाले हैं

Maneka Gandhi Maneka Gandhi Updated On: Dec 04, 2017 07:17 PM IST

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जानवरों की पूजा का मानवीय इतिहास है बहुत पुराना

पुराने समय में मनुष्य पशुओं के केवल निकट ही नहीं थे, बल्कि अधिकांश मामलों में, उन पर गहराई से निर्भर भी थे. चूंकि वे स्थानीय संस्कृति का हिस्सा थे, अत: उन्हें धर्म से विलग नहीं किया जा सकता था. इस जटिलता का कारण, उनकी पशुओं को देवताओं के रूप में प्रयोग करने की इच्छा भी थी. समय बीतने के साथ, मनुष्यों ने मानवीय सीमाओं से आगे निकलने के एक मार्ग के रूप में सभी प्रमुख धर्मों में पशुओं को साथ में जोड़ा.

पशुओं को अधिक समझदार, अधिक रहस्यमय, मनुष्यों के लिए छिपे प्रकृति के रहस्यों तक उनकी पहुंच के रूप में देखा जाता है. उन्होंने दिव्य को अतिरिक्त अर्थ दिया वे सशक्‍त और त्‍वरित थे. वे समुद्र या वायु में रह सकते थे और जिनकी ऐसी क्षमताओं और इंद्रियां थीं, जिनकी मानव इच्छा भी नहीं कर सकते थे.

इसलिए उन्होंने परमात्मा को अतिमानव से कुछ और अधिक स्‍वरूप प्रदान किया. भारतीय, यूनानी, मेसोपोटेमिया और मिस्र के लोग इस मार्ग का नेतृत्व करते थे, लेकिन प्रत्‍येक संस्कृति, अजीब तरह से, उसी शक्तियों का प्रतिनिधित्व करने के लिए पशुओं का प्रयोग करती थी. इनमें वृषभ एवं सिंह शक्ति और संरक्षण का प्रतिनिधित्व करते हैं, गाय प्रेम और उदारता का और सांप के निर्माता एवं पक्षी मोह का प्रतिनिधित्‍व करते हैं.

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एकिडिना की विशाल मूर्ति. तस्वीर विकीपीडिया से साभार

यूनानी पौराणिक कथाओं में वर्णित एकिडिना को सभी दैत्‍यों की मां बताया जाता है. वह गुफा में रहती है और उसका आधा शरीर सांप का है. दूसरी ओर, चीनी लोककथाओं में नुवा देवी हैं जिन्‍होंने मानव जाति बनाई और स्‍वर्ग का पुरोद्धार किया. जापानी अर्ध स्‍त्री–सर्प न्‍यूरोन्‍ना, उभयचर है और अकेले रहना चाहती है, किंतु परेशान होने पर वह अपने शिकार के शरीर से रक्त चूसती है.

सोलोमन द्वीप समूह के हटूइववारी देव में एक मानव का सिर, चार आंखें, नुकीले पंजे ,चौड़े डैने और सांप का शरीर है. विश्वास यह है वह धरती मां का नर संस्करण है और वह सभी प्राणियों का निमित्‍त और पोषणकर्ता है. मिस्र की पौराणिक कथाओं में कोबरा की शीर्ष वाली मेरेटेसेगर, जिसका अर्थ है, 'वह जो नीरवता से प्रेम करती है', के पास महान शक्तियां हैं एवं उसे भय और दयालुता दोनों गुणों की देवी माना जाता था.

वह उन पर विष उगलती थी जो किसी राजसी भवन में तोड़फोड़ या उसे लूटने का प्रयास करते थे. यूनानी मिथकों में वर्णित गोर्गन्स महिलाओं के सिर पर बाल के जगह सांप थे और वे किसी वस्‍तु को देखने की शक्ति मात्र से ही पत्‍थर में परिवर्तित कर सकती थीं.

सुमेरिया में, कुसरिकू का सिर और धड़ मानव का था, पर उसके कंधे, सींग और कान गोवंशीय प्रजाति के जैसे थे. इसलिए उसे वृषभ पुरुष के नाम से जाना जाता था. वह अपने नागरिरकों की क्रूर घुसपैठियों और बुरी आत्माओं से रक्षा उनके दरवाजे पर रहा कर करता है. वह न्याय के भगवान के साथ भी संबंद्ध है.

लामासू एक मेसोपोटामियन के सुरक्षा प्रदान करने वाले देवता हैं और उनमें जीवन के सभी पक्ष शामिल हैं. उन्‍हें मानव सिर के साथ वृषभ या सिंह के धड़ एवं पक्षी के पंख से युक्‍त दर्शाया गया है. दीर्घ लामासू की मूर्ति, असीरिया मूर्तिकला का विशिष्‍ट अंग है और दीर्घ मूर्तिकला का ज्ञात अनुपम उदाहरण हैं.

वे शक्ति और संरक्षण का प्रतिनिधित्व करते हैं और महलों में प्रवेश द्वार पर रखे जाते हैं. दुर्भाग्यवश, लामासू अब कंपनियों/वैज्ञानिकों के दल अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोटेशन एसोसिएशन  का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो पशुओं के अंगों को मनुष्यों में प्रत्यारोपित करने के लिए का प्रयास कर रहे हैं.

मोंटू मिस्र के देव हैं और उनके शीर्ष पर वृषभ है एवं धड़ मानव का है. मिस्र के महानतम योद्धाओं राजाओं ने स्‍वयं को पराक्रमी वृषभ, मोंटू के पुत्र कहा है. कई फराओ राजाओं को मेंथूटेप अर्थात मोंटू संतुष्‍ट है, कहा गया है.

यूनानी परंपरा में एक स्फिंक्स एक पौराणिक प्राणी है जो मानव के सिर एवं शेर के धड़ वाला और कभी-कभी पंखों वाला पक्षी होता है. जो लोग इसकी पहेली का उत्‍तर नहीं दे सकते वे मारे और खा लिए गए हैं. यूनानी स्फिंक्स के विपरीत, मिस्र के स्फिंक्स अतिशक्तिशाली किंतु उदार नर है. दोनों ही संरक्षक हैं जो मंदिरों और मकबरों के प्रवेश द्वार पर होते हैं.

मिस्र के प्रत्‍येक देवताओं में शेर शीर्ष है. माहेस प्राचीन मिस्र के सिंह शीर्ष वाले देव हैं और उन्‍हें युद्ध, संरक्षण, मौसम, चाकू, जूं और भक्षण से जुड़ा माना जाता है. पाकहेत रक्‍तपात से जुड़ी एक शेरनी के सिर वाली देवी हैं. सेखमेट एक योद्धा देवी और साथ ही चिकित्सा की देवी हैं.

यह कहा गया था कि उनकी सांस ने मरुस्‍थल का निर्माण किया. उन्हें राजाओं के रक्षक के रूप में देखा गया था. टेफनट नमी, नम हवा, ओस और बारिश की देवी है उन्‍होंने अपने भाई शू से विवाह किया और वह नट यानी आकाश और गेब यानी पृथ्‍वी की मां बनीं.

तस्वीर विकीपीडिया से साभार

तस्वीर विकीपीडिया से साभार

हिंदू भगवान विष्णु के अवतारों में से एक नरसिंह थे और उनका सिर सिंह के समान और पंजे नुकीले थे. वे दानव राजा हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष को पराजित करके दुष्टता और धार्मिक उत्पीड़न को समाप्‍त करने के लिए आए थे.

प्रत्यांगिरा, जिसे नरसिंही भी कहा जाता है, एक हिंदू देवी हैं जिसकी सिर शेरनी का है. वह दुर्गा का एक पक्ष हैं. रामायण में रावण के पुत्र, इंद्रजीत 'निकुंभबाला यज्ञ' (प्रत्‍यांगिरा की पूजा करने हेतु एक अनुष्‍ठान) कर रहा था, और उस समय भगवान राम की सेना लंका में युद्धरत थी. हनुमान इस अनुष्ठान को रोकने के लिए गये क्योंकि उन्हें पता था कि यदि इंद्रजीत ने इसे पूरा किया, तो वह अजेय हो जाएगा. कुछ मंदिरों में प्रत्यांगिरा देवी हवन अमावास पर किया जाता है.

मिस्र की हाथोर, गाय के सिर वाली देवी हैं. वे आनन्द के सिद्धांत, स्त्रीत्‍व प्रेम, संगीत, नृत्य और मातृत्व का मानवीकरण अभिव्‍यक्ति हैं. बैट, जिसका अर्थ आत्मा है, वे गाय के सींग और कान वाली मिस्र की देवी भी है. वह संगीत वाद्ययंत्र सिस्‍टम से संबंधित हैं. यह मिस्र के मंदिरों में सबसे अधिक बार प्रयोग होने वाले पवित्र यंत्रों में से एक है. बैट हाथोर के समान ही हैं, सिवाय इसके कि बैट के सींग अंदर की तरफ और हाथोर के बाहर की तरफ.

अनुबिस अफ्रीकी स्वर्ण भेड़िया के शीर्ष वाले (पहले कुत्ते या गीदड़ के रूप में सोचा गया था) मिस्र के देवता हैं जिनका संबंध मृत्यु, ममीकरण और जीवन के पश्‍चात आत्माओं की शुरुआत करने से है. बस्‍टेट बिल्ली के शीर्ष वाली मिस्र की देवी हैं जो युद्ध और बिल्लियों का रक्षक है.

खेपरी गोबर के झींगुर के शीर्ष वाले मिस्र के देवता हैं. जिस तरह वह अपने सींग का उपयोग करते हुए गोबर का गोला बना कर धकेलता है उसी प्रकार खेपरी आकाश के नीचे सूर्य को धकेलता है, जहां से वह अगली प्रात: उग आता है. खेपर शब्द का अर्थ है 'अस्तित्व में आना' और यह देव सूर्य के पुनर्जन्म और नवीनीकरण के साथ जुड़ा हुआ है.

तवारेट, जिसका आशय महान से है, वह दरियाई घोड़े के शीर्ष वाली देवी है और वह बच्‍चों के जन्म और प्रजनन क्षमता से जुड़ी हैं.

आइबिस पक्षी के शीर्ष वाले मिस्र के देव थोथ ब्रह्मांड बनाए रखते हैं, ईश्वरीय विवादों का मध्यस्थता करते हैं और मृतकों के प्रति न्याय, जादू की कला, लेखन की व्यवस्था और विज्ञान के विकास का प्रबंधन करते हैं. जापानी पौराणिक कथाओं में अमीदा नामक एक योद्धानुमा ईश्वर है जिनका धड़ मनुष्‍य का और शीर्ष श्‍वान का है.

जापानी तानुकी एक बिज्‍जू या रैक्कोन पशु है जो मानव में परिवर्तित हो सकता है और बुसिस्‍ट भिक्षुओं का मानवीकरण करके लोगों को गुमराह कर सकते हैं. किस्‍तून जो कि लोमड़ी की तरह हैं, उनके पास भी समान शक्तियां हैं और वे स्‍वयं को मोहक महिलाओं में परिवर्तित कर पुरुषों से विवाह करती हैं.

चीनी पौराणिक कथाओं में चू पा-चिह एक ईश्वरीय प्राणी है, जो स्वर्ग में अपनी अनैतिकता के कारण पृथ्वी पर एक शूकर के शीर्ष और मनुष्‍य के शरीर के साथ भेजा गया. वह अपने परिवार को मार देता है और तब तक यात्रियों का शिकार करता है जब तक कि उसे देवी कुयान यिन द्वारा सदाचार के मार्ग पर नहीं लाया जाता. फिर वह एक पुजारी बन जाता है. (हमारे पास रामायण के लेखक वाल्मीकि की भी ऐसी एक कहानी है).

खनूम, भेंड के सिर वाले मिस्र के देव, नील नदी के स्रोत के देवता है और मानव के बच्चों के शरीर का निर्माता है. वह माता के गर्भ में शिशु को रखने से पूर्व मिट्टी से कुम्हार के पहिए पर उन्‍हें बनाते हैं.

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सोबैक की मूर्ति. तस्वीर विकीपीडिया से साभार

मगरमच्छ के शीर्ष वाले मिस्र के देवता, सोबैक, फराओ की शक्ति, उर्वरता और सैन्य शक्ति के साथ जुड़ा हुआ है, लेकिन वे साथ ही नील नदी के द्वारा प्रस्तुत विनाश के विरुद्ध सुरक्षात्मक देवता के रूप में कार्य करते है.

आधुनिक दुनिया में, अधिकांश धर्मों ने मनुष्य-पशु देवत्वों की अवधारणा को छोड़ दिया है. हमारे देवता अब विशुद्ध मानव के गुणों वाले हैं. यहां तक कि जो नवीन देवियां हिंदू देवताओं में जोड़े जाते हैं, जैसे संतोषी मां, जिन्हें 70 के दशक में बनाया गया था, वे सभी पशुओं के जादू से रहित केवल दिव्य महिला हैं.

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