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जन्मदिन विशेष: इस गणितज्ञ ने बदली है कई बिहारियों की तकदीर

सुपर-30 के संस्थापक आनंद कुमार के ऊपर कई डाक्यूमेंट्री मूवी बन चुकी है और उनके जीवन के ऊपर बन रही एक बॉयोपिक मूवी साल 2018 के नवंबर रिलीज हो रही है

Updated On: Jan 01, 2018 08:19 AM IST

Piyush Raj Piyush Raj
कंसल्टेंट, फ़र्स्टपोस्ट हिंदी

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जन्मदिन विशेष: इस गणितज्ञ ने बदली है कई बिहारियों की तकदीर

बिहार के गणितज्ञ आनंद कुमार आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. बिहार के पटना में रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स नामक कोचिंग चलाने वाले आनंद कुमार अपने सुपर-30 की वजह से जाने जाते हैं. सुपर-30 के द्वारा आनंद कुमार बिहार के प्रतिभाशाली छात्रों को पूरी तरह मुफ्त में आईआईटी-जेईई की कोचिंग करवाते हैं और मुफ्त में ही उनके रहने और खाने-पीने की भी व्यवस्था करते हैं. सुपर-30 के लगभग शत-प्रतिशत छात्रों का एडमिशन आईईटी में होता रहा है. आनंद कुमार ने 2012 में सुपर-30 की शुरुआत की थी. उस वक्त उनका रामानुजम स्कूल ऑफ मैथेमेटिक्स काफी प्रसिद्ध हो गया था.

सुपर-30 की शुरुआत के पीछे एक वजह गरीब छात्रों की मदद है. सुपर-30 की स्थापना की पृष्ठभूमि कैसे तैयार हुई इसे समझने के लिए सबसे पहले बिहार के पटना में चल रहे कोचिंग संस्थानों के तरीके को समझना जरूरी है. बिहार जैसे गरीब राज्य के कोने-कोने से 10वीं पास करके स्टूडेंट्स इंजीनियर या डॉक्टर बनने का सपना लेकर पटना आते हैं. इंजीनियरिंग में प्रवेश के इच्छुक छात्र गणित, फिजिक्स और कैमेस्ट्री विषयों की तैयारी करते हैं और मेडिकल में प्रवेश के इच्छुक छात्र बायोलॉजी, फिजिक्स और कैमेस्ट्री की. अपने इस सपने को पूरा करने के लिए वे या तो इन सभी विषयों की पढ़ाई एक ही कोचिंग सेंटर में करते हैं या फिर अलग-अलग शिक्षकों से इसकी कोचिंग लेते हैं. पटना में इन अलग-अलग विषयों के कई प्रसिद्ध शिक्षक हैं और सभी का अपना-अपना कोचिंग संस्थान है. इस वजह से प्रवेश परीक्षा की तैयारी करने वाले ज्यादातर छात्र अलग-अलग ही इन विषयों को अलग-अलग शिक्षकों से पढ़ना पसंद करते हैं. लेकिन इस तरीके से स्टूडेंट्स का अधिक वक्त जाया होता है.

Super-30

आनंद कुमार ने अपने सुपर-30 के जरिए इस समस्या को भी दूर किया. 2012 में सुपर-30 के स्टूडेंट्स के चयन के लिए पहली बार आनंद कुमार ने अपने विजन को रखते हुए एक परीक्षा लिया और इसमें से 100 छात्रों का चयन करके उनमें से फिर 30 छात्रों का चयन किया. इन 30 छात्रों के लिए सभी विषयों के कोचिंग की व्यवस्था की.

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शुरू-शुरू में जब सुपर-30 के कई छात्रों का चयन हुआ तो आनंद कुमार के आलोचकों ने कहा कि वे 100 छात्रों को पढ़ाते हैं और इनमें से जिनका भी चयन होता है, उन्हें सुपर-30 का छात्र कह देते हैं. उनके ऊपर यह भी आरोप लगा कि वे इसी वजह से आईआईटी की प्रवेश परीक्षा से पहले सुपर-30 के छात्रों के नामों का खुलासा भी नहीं करते हैं. अगर आलोचकों की इस बात को मान भी लें तो फिर भी 100 छात्रों में से 30 छात्रों का चयन कोई मामूली बात नहीं वो भी बिहार जैसे राज्य से. सुपर-30 इस वजह से भी खास है क्योंकि इससे पहले पटना में रहकर तैयारी करने वाले छात्रों का आईईटी में सफलता का प्रतिशत काफी कम था. इक्का-दुक्का छात्र आईआईटी में सफल होते थे और अधिकतर प्रतिभाशाली छात्र संसाधनों के अभाव में किसी तरह अन्य इंजीनियरिंग कॉलेजों में एडमिशन ले पाते थे जबकि अगर इन्हें अच्छी कोचिंग मिली होती तो ये भी आईआईटी में प्रवेश पा सकते थे.

kbc anand kumar

आनंद कुमार आईआईटी में छात्रों का एडमिशन करवाकर अपनी उस कसक की भी भरपाई कर लेते हैं, जिसकी वजह से वे कैम्ब्रिज पढ़ने नहीं जा पाए. आनंद कुमार ने साल 1992 से गणित पढ़ाना शुरू किया. इसकी शुरुआत 500 रुपए महीने के एक किराए के कमरे से हुई. आनंद ने इसका नाम रामानुजन स्कूल ऑफ मैथमेटिक्स रखा. एक ही साल में 2 छात्रों को पढ़ाने से शुरू हुआ ये सफ़र 36 छात्रों तक पहुंच गया.

3 साल बाद उनके कोचिंग में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या करीब 500 पहुंची.

सुपर-30 के अभी तक 15 बैच निकल चुके हैं. कुल 450 छात्रों में से 396 छात्र ऐसे रहे जो JEE-एडवांस की परीक्षा में उत्तीर्ण हुए. आनंद कुमार के सुपर-30 की सफलता दर 88% रही है. 15 सालों के दौरान चार मौके ऐसे आए, जब उनके 30 में से सभी 30 बच्चे परीक्षा में पास रहे. ये साल 2008, 2009, 2010 और 2017 हैं.

आनंद कुमार के ऊपर कई डाक्यूमेंट्री मूवी बन चुकी है और उनके जीवन के ऊपर बन रही एक बॉयोपिक मूवी साल 2018 के नवंबर रिलीज हो रही है. इस मूवी में ऋतिक रोशन आनंद कुमार की भूमिका निभा रहे हैं.

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