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अमृता शेरगिल: जिनके मौत का रहस्य कोई नहीं जान पाया!

28 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहने वाली अमृता शेरगिल ने अपनी पेंटिंग्स से दुनिया भर में नाम कमाया

Updated On: Dec 05, 2017 10:29 AM IST

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee

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अमृता शेरगिल: जिनके मौत का रहस्य कोई नहीं जान पाया!

दिल्ली में इंडिया गेट से कुछ ही दूर नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट है. लाल इमारतों की भीड़ में ये गैलरी अपने लॉन में लगे स्टील के पेड़ के चलते अलग से दिखती है. ये स्टील का पेड़ सुबोध गुप्ता का प्रसिद्ध आर्ट इंस्टॉलेशन है. गैलरी के अंदर अमृता शेरगिल की कई पेंटिंग्स लगी हैं. भारत के तमाम पेंटर्स के लिए इस गैलरी में जगह बनाना बड़ी बात है. मगर कह सकते हैं कि गैलरी के लिए बड़ी बात है कि उसके पास अमृता शेरगिल के पेंट किए कई कैनवास हैं.

अमृता शेरगिल 28 साल की उम्र में दुनिया से चली गईं. 28 की उम्र किसी पेंटर के लिए करियर शुरू करने की उम्र होती है. आधी हंगेरियन और आधी भारतीय अमृता ने इस बीच अपनी पहचान दुनिया भर के कला जगत में बनाई. अमृता शेरगिल एक ऐसा नाम हैं जिसे कला से वास्ता न रखने वाले लोग भी अच्छे से जानते हैं. हालांकि इसमें उनके किसी की परवाह न करने वाले व्यक्तित्व और अनगिनत अफेयर्स का भी बड़ा हाथ है.

पेंटिंग का बड़ा बदलाव

अमृता कहा करती थीं कि भारत सिर्फ मेरा है. उन्होंने जब भारत आकर अपने भारतीय पक्ष को खंगालना शुरू किया तो काफी कुछ ऐसा निकला जो भारत की कला के लिए नया मोड़ लेकर आया. राजा रविवर्मा ने यूरोपियन शैली का भारतीयकरण करते हुए भारतीय देवी-देवताओं को उनकी शक्ल दी. अमृता ने भारतीय आम लोगों के रंग रूप को कैनवास पर जगह दी.

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उनकी ब्राइड्स टॉयलेट जैसी पेंटिंग में भारत की सांवली त्वचा को बिना फूहड़ता से दिखाया है. रविवर्मा ने अपनी पेंटिंग्स में जहां पौराणिक चरित्रों के बहाने भारतीय कामुकता को दिखाया. अमृता इस काम में नए तौर तरीके लेकर आईं. उनका एक सेल्फ पोट्रेट बहुत प्रसिद्ध है जिसमें वो मुस्कुरा रही हैं. इसमें उन्होंने खुले कंधों वाला कुछ पहन रखा है. आजादी से पहले के भारत में इस तरह का अपना पोट्रेट पेंट करना काफी साहस का काम था. इसके अलावा उन्होंने अपने कई न्यूड पोट्रेट खुद ही पेंट किए. इनमें से कई मॉर्डन आर्ट गैलरी में लगे हुए हैं.

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अफेयर और बेपरवाही

अमृता के निजी जीवन के कई किस्से बहुत चर्चा में रहे. कई जगह दावा किया जाता है कि वो निम्फोमेनिया से पीड़ित थीं. एक ऐसी बीमारी जिसमें शारीरिक संबंध बनाना किसी नशे की लत जैसा होता है. प्रसिद्ध लेखक खुशवंत सिंह ने उनके बारे में लिखा है कि उन्होंने मन होने पर कई पुरुषों और स्त्रियों से संबंध बनाएं. इसके साथ ही खुशवंत सिंह ने अपने संस्मरण में लिखा है कि अमृता उनके परिवार से मिलीं तो खुशवंत की पत्नी के सामने ही उनके बेटे को बदसूरत कह दिया. इसी तरह जवाहरलाल नेहरू ने अमृता से उनका पोट्रेट बनाने की गुजारिश की. मगर अमृता को वो इतने प्रभावी नहीं लगे कि कैनवस पर पेंट किए जाएं.

अमृता ने 1938 में अपने चचेरे भाई विक्टर ईगन से शादी की. मगर उनके अफेयर की गिनती इससे कतई कम नहीं हुई. 1941 में वो अचानक से कोमा में चली गईं और कुछ ही समय में उनकी मौत हो गई. लोग इसके पीछे कई बार किसी साजिश का शक जाहिर कर चुके हैं मगर धीरे-धीरे अमृता एक ऐसी किंवदंती बन गईं जिसको जीना किसी के लिए भी सुखद नहीं होता मगर जिसको जानना हर कोई चाहता है.

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