S M L

भगवद् गीता को समझना है तो आइंस्टीन के E=mc2 को समझिए

आइंस्टीन को अगर साइंस का रॉकस्टार कहें तो गलत नहीं होगा. उनसे जुड़े किस्से, उनकी बातें और उनकी रिलेटिविटी थ्योरी को समझने के तरीके, सभी कुछ बड़ा रोचक है

Updated On: Mar 14, 2018 08:51 AM IST

Animesh Mukharjee Animesh Mukharjee

0
भगवद् गीता को समझना है तो आइंस्टीन के E=mc2 को समझिए

दुनिया को दो हिस्सों में बांटा जा सकता है एक आइंस्टाइन के पहले और दूसरा आइंस्टाइन के बाद. दुनिया के सबसे ज़्यादा पॉपुलर वैज्ञानिकों में से एक आइंस्टाइन ने दुनिया को 3 अक्षर का एक फॉर्मूला दिया- E=MC2. इस छोटे से सूत्र ने विज्ञान को हमेशा के लिए बदल दिया. आइंस्टीन को अगर साइंस का रॉकस्टार कहें तो गलत नहीं होगा. वो अपने समय के सबसे लोकप्रिय लोगों में तो थे ही उनसे जुड़े किस्से, उनकी बातें और उनकी रिलेटिविटी थ्योरी को समझने के तरीके, सभी कुछ बड़ा रोचक है.

कोई आपसे पूछे कि ब्रह्मांड में कितनी तरह की चीज़े हैं तो आप क्या जवाब देंगे. जवाब है सिर्फ दो. पहली चीज़ है ऊर्जा यानी एनर्जी (E). दूसरी द्रव्यमान, मैटर या मास (M). ऊर्जा न पैदा होती है न खत्म की जा सकती है. बस अपना रूप बदलती है. आप चाहें तो ऊर्जा को बदलकर आत्मा शब्द लिख दें तो गीता का श्लोक बन सकता है.

Albert einstien (6)

लेकिन इसका मतलब ये कतई नहीं है कि गीता में थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी का वर्णन है. विज्ञान क्रमिक ज्ञान है और फॉर्मूलों पर काम करता है. गीता दर्शन है जिसकी व्याख्या मोटे तौर पर एक वैज्ञानिक सिद्धांत से मिलती है. न्यूटन ने जो कहा उसे आइंस्टीन ने आगे बढ़ाया. इसका मतलब ये नहीं है कि न्यूटन के सिद्धांत आज गलत हो गए. उनकी विस्तृत व्याख्या हुई. इसी तरह सर स्टीफन हॉकिंग्स ने आइंस्टीन के काम को आगे बढ़ाया है.

Albert einstien (2)

किसी चीज़ को जलाने से उसके अंदर की ऊर्जा का एक अरबवां हिस्सा ही हमें मिल पाता है. यानी एक लीटर पेट्रोल जलाने पर आपकी कार अगर 20 किलोमीटर चलती है, और इसी एक लीटर पेट्रोल को पूरी तरह से ऊर्जा में बदल दिया जाए तो आपकी कार लगभग 20 अरब किलोमीटर चलेगी. (आसानी से समझाने के लिए कैल्कुलेशन को थोड़ा जनरलाइज़ किया गया है)

आइंस्टीन की थ्योरी को माने तो टाइम ट्रैवल भी संभव है. इसे कुछ इस तरह समझा जा सकता है.

मान लीजिए आप एक रेलगाड़ी में हैं जो एक सेकेंड में सौ किलोमीटर चलती है और आप के हाथ में एक गेंद है. आप गेंद को उछालते हैं और गेंद वापस आपके हाथ में आती है. आपको लगेगा कि गेंद ने सिर्फ हवा में उछाले जाने और वापस आने तक की दूरी तय की है मगर ट्रेन के बाहर खड़े आदमी के लिए आप और गेंद इस एक सेकेंड में 100 किलोमीटर सफर तय कर चुके हैं.

अगर एक आदमी यही 100 किलोमीटर की दूरी पैदल तय करे तो उसे इसे पूरा करने में कई घंटे लग जाएंगे. जबकि आप और गेंद बिना किसी मेहनत के 1 सेकेंड में उतनी दूरी तय कर चुके होंगे. और आसानी से कहें उसके कई सालों के बराबर आपका एक सेकेंड हुआ.

Albert einstien (1)

इसी थ्योरी को चरम पर ले जाइए और लाइट की स्पीड पर चलना शुरू करिए और दस साल अंतरिक्ष में टहलिए. जब आप वापस आएंगे तो दुनिया में नौ हज़ार साल गुज़र चुके होंगे. (चौंकाता है पर विज्ञान है.)

सरलता

आइंस्टीन विज्ञान की दुनिया में जितने महान थे निजी ज़िंदगी में उतने ही सरल. एक बार की बात है उन्हें किसी ने लिफ्ट के बारे में बताया. लिफ्ट की खूबी बताते हुए कहा कि इससे समय बचता है. सीढ़ी चढ़ने उतरने की मेहनत बचती है. आइंस्टीन को ये आइडिया बड़ा अच्छा लगा. उन्होंने अपने घर में लिफ्ट लगवाने का ऑर्डर दे दिया. लिफ्ट लगाने वाली कंपनी से जब लोग उनके घर पहुंचे तो पता चला कि आइंस्टीन का घर तो एक मंज़िल का ही है.

Albert einstien (3)

एक समय तक दुनिया भर में आइंस्टीन को खत लिखे जाते थे. उनका पता न जानने वाले कई लोग अलबर्ट आइंस्टीन, यूरोप लिखकर खत भेज देते थे. आइंस्टीन तक ये चिट्ठियां पहुंच जाती थीं. इस पर वो कई बार आश्चर्य जताते हुए कहते कि मेरा पोस्टमैन बहुत भला आदमी है.

भारत से जुड़ाव

आइंस्टीन ने दुनिया के इतिहास पर कई प्रभाव डाले. उनकी बोस आइंस्टीन थ्योरी ने क्वान्टम फिज़िक्स को एक नया मुकाम दिया. उनके सिद्धांत पर ही ऐटम बम बना. इसके अलावा आइंस्टीन गांधी से बहुत प्रभावित थे. गांधी को लेकर उन्होंने कहा था, आने वाली पीढ़ियां ये विश्वास नहीं करेंगी कि धरती पर हाड़-मांस का बना एक ऐसा आदमी भी चला था. गांधी के बारे में खराब धारणा बनाने से पहले फिर से याद कर लीजिएगा. आइंस्टीन आपसे कहीं ज़्यादा बुद्धिमान थे.

Albert einstien (4)

आइंस्टीन से जुड़ी हुई एक और रोचक बात है. बचपन से हम सभी सुनते आ रहे हैं कि आइंस्टीन बचपन में बेहद खराब स्टूडेंट थे, अचानक से उनकी प्रतिभा का विकास हो गया. ये आधा सच है.

क्या आइंस्टीन फेल हुए थे

आइंस्टीन ने 6 साल की उम्र में स्कूल जाना शुरू किया. उनकी टीचर उन्हें जीनियस या टैलेंटेड छात्र नहीं मानती थीं. लेकिन उनके नंबर अच्छे आते थे. इसके साथ ही उनका मन स्कूल के अनुशासन में नहीं लगता था. इसके बाद उन्होंने स्कूल बदला. 11 की उम्र में आइंस्टीन कॉलेज की स्कूल की किताबें पढ़ते थे. उनके नंबर हमेशा अच्छे आते रहे. लेकिन स्कूल का अनुशासन उन्हें नहीं भाया.

Albert einstien

अपने ग्रेजुएशन से 11 साल पहले ही उन्होंने ज्यूरिख पॉलिटेक्निक का एंट्रेंस एग्ज़ाम दिया. इसमें वो गणित में तो पास हो गए लेकिन भाषा, बॉटनी और जूलॉजी में फेल हो गए. इसके पीछे एक वजह इन परीक्षाओं का फ्रेंच में होना था. आइंस्टीन को तब बहुत ज्यादा फ्रेंच नहीं आती थी. हालांकि बाद में उन्हें इसी कॉलेज में एडमीशन मिला.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो
#MeToo पर Neha Dhupia

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi