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गरीबों के सामने नकली खाना रख खींची तस्वीरें, वर्ल्ड प्रेस के फोटोग्राफर की हो रही आलोचना

इस फोटो को लेकर सोशल मीडिया पर काफी विरोध हो रहा है, लोगों का कहना है कि इस तरह का फोटो लेना पूरी तरह से गलत था

Updated On: Jul 25, 2018 07:04 PM IST

FP Staff

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गरीबों के सामने नकली खाना रख खींची तस्वीरें, वर्ल्ड प्रेस के फोटोग्राफर की हो रही आलोचना

वर्ल्ड प्रेस द्वारा पोस्ट की गई एक फोटो सीरीज पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर आलोचना का मुद्दा बनी हुई है. 'ड्रीमिंग फूड' नाम की इस सीरीज में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में गरीबी की हालत को दिखाया गया है. इस फोटो में दो बच्चे और एक महिला के सामने मेज पर खाने का सामान रखा हुआ है और इन्होंने अपने दोनों हाथों से आंखों को ढक रखा है. लेकिन सबसे दुखद यह है कि जडो खाना मेज पर रखा हुआ है वह असली नहीं बल्कि नकली है.

इस फोटो के नीचे लिखा हुआ कैप्शन फोटोग्राफर एलिसियो मामो के बारे में बताता है. फोटोग्राफर ने लिखा है कि वह सामाजिक और राजनीतिक मामलों पर फोटोग्राफी करते हैं.

These photographs are from Uttar Pradesh and Madhya Pradesh two of the poorest states of India. From the series "Dreaming Food", a conceptual project about hunger issue in India. ⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀ [This project has been the subject of much online debate. Please read Alessio Mamo’s statement, released on 24 July 2018, giving more details and apologising for any offence: https://medium.com/@alessio.mamo/my-statement-on-dreaming-food-7169257d2c5c] ⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀ My name is Alessio Mamo (@alessio_mamo) an Italian freelance photographer based in Catania, Sicily. In 2008 I began my career in photojournalism focusing on contemporary social, political and economic issues. I extensively cover issues related to refugee displacement and migration starting in Sicily, and extending most recently to the Middle East. I was awarded 2nd prize in the People Singles category of #WPPh2018 and this week I’m taking over World Press Photo's Instagram account. ⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀ Despite economic growth, a majority of the Indian population still lives in extreme poverty and disease. Behind India’s new-found economic strength are 300 million poor people who live on less than $1 per day. Government figures may indicate a reduction in poverty. But the truth is, with increasing global food prices, poverty is spreading everywhere like a swarm of locusts. These pictures are taken in rural areas where conditions are worse than in the cities and where close to 70% of India’s population reside today. Statistics show that 2.1 million children under 5 years old die of malnutrition annually. The idea of this project was born after reading the statistics of how much food is thrown away in the West, especially during Christmas time. I brought with me a table and some fake food, and I told people to dream about some food that they would like to find on their table. ⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀⠀ #WPPh2018#asia #dreamingfood #india

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एलिसियो मामो ने लिखा कि आर्थिक प्रगति के बावजूद अधिकांश भारतीय जनसंख्या अभी भी बहुत गरीब है. भारत की आज की इस नई आर्थिक ताकत के पीछे इसके 30 करोड़ अति गरीब लोग हैं जो आज भी एक डॉलर प्रतिदिन यानी कि 70 रुपए से कम पर रोज गुजारा करते हैं. सरकार के आंकड़े भले ही गरीबी को कम होता हुआ दिखा रहे हों लेकिन वास्तविकता ये है कि खाने-पीने की चीजों के लगातार बढ़ रहे दाम की वजह से पूरी दुनिया में गरीबी लगातार बढ़ रही है.

उन्होंने लिखा, ये तस्वीरें ग्रामीण इलाके की हैं जहां स्थिति काफी खराब है. गांवों की लगभग 70 फीसदी जनसंख्या गरीब है. आंकड़े बताते हैं कि 5 साल से कम उम्र के लगभग 21 लाख बच्चे हर साल कुपोषण की वजह से मर जाते हैं. वो लिखते हैं कि इस प्रोजेक्ट पर काम करने का विचार तब मन में आया, जब मैने एक आंकड़ा पढ़ा जिसमें दिखाया गया था कि पश्चिमी देशों में यूं ही खासकर क्रिसमस पर कितना भोजन फेंक दिया जाता है. आगे उन्होंने लिखा कि मैं कुछ नकली खाना और एक मेज अपने साथ लेकर आया और लोगों से कहा कि वो उस खाने के बारे में सोचें जिसे वो अपनी मेज पर देखना चाहते हैं.

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