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World poetry Day: जानिए आखिर कविता है क्या?

प्रसिद्ध यूनानी दार्शनिक प्लेटो ने तो कहा था कि कवियों और साहित्यकारों की कोई जरूरत ही नहीं है और इन्हें समाज से बाहर निकाल देना चाहिए था

Updated On: Mar 21, 2018 04:17 PM IST

FP Staff

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World poetry Day: जानिए आखिर कविता है क्या?

कविता की परिभाषा को लेकर प्राचीन काल से ही मतभेद हैं. लेकिन कविता की महत्ता को सभी ने स्वीकार की किया. वैसे कुछ लोग यह भी मानते हैं कि कविता कुछ बैठे ठाले लोगों का काम है. प्रसिद्ध यूनानी दार्शनिक प्लेटो ने तो कहा था कि कवियों और साहित्यकारों की कोई जरूरत ही नहीं है और इन्हें समाज से बाहर निकाल देना चाहिए था. वैसे प्लेटो के शिष्य अरस्तू ने कवियों का समर्थन किया और कहा कि यह हमारे लिए विरेचन का काम करता है. विरेचन चिकित्साशास्त्र की एक पद्धति है जिसमें शरीर के विकारों को निकाला जाता है. यानी अरस्तू यह मानते थे कि कविता हमारे मानसिक विकारों को नष्ट करने का काम करती है.

रोमांटिसिज्म के प्रवर्तक वर्डसवर्थ का कहना था कविता हमारी शक्तिशाली  भावनाओं का उन्मुक्त प्रवाह है और इसकी उत्पत्ति भावनाओं से होती है जो भावनाओं द्वारा ही अभिव्यक्त होती है. (Poetry is the spontaneous overflow of powerful feelings: it takes its origin from emotion recollected in)

भारत में भरत के नाट्यशास्त्र के वक्त से ही कविता को लेकर अलग-अलग मत दिए जाते रहे हैं. भामह, दंडी, विश्वनाथ और जगन्नाथ से लेकर सभी ने कविता को लेकर अपने-अपने मत रखे हैं और कविता के उद्देश्य को भी बताया है.

अगर बात हिंदी की करें तो तुलसीदास ने कविता को 'स्वांतः सुखाय' यानी स्वंय को खुशी देने वाला कहा है.

आइए देखते हैं कि हिंदी के कवियों ने कविता में कविता के बारे में क्या कहा है.

छायावाद के कवि पंत वियोग को कविता की उत्पत्ति का कारण मानते हैं और कहते हैं-

वियोगी होगा पहला कवि,

आह से उपजा होगा गान.

निकलकर आंखों से चुपचाप,

बही होगी कविता अनजान...'

इसी तरह छायावाद से ठीक पहले के कवि जब खड़ी बोली में कविता लिखने की शुरुआत हो रही थी तब मुकुटधर पांडेय लिखते हैं-

कविता सुललित पारिजात का हास है,

कविता नश्वर जीवन का उल्लास है.

कविता रमणी के उर का प्रतिरूप है ,

कविता शैशव का सुविचार अनूप है

कुवंर नारायण इंसानियत और सच्चाई के लिए कविता को महत्वपूर्ण मानते हैं-

कविता वक्तव्य नहीं गवाह है

कभी हमारे सामने

कभी हमसे पहले

कभी हमारे बाद

कोई चाहे भी तो रोक नहीं सकता

भाषा में उसका बयान

जिसका पूरा मतलब है सचाई

जिसका पूरी कोशिश है बेहतर इंसान

 

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