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RBI और RSS के लोगों ने कहा केरल में बाढ़ का कारण सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश की मांग है!

इस महीने की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म के उम्र वाली महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था

Updated On: Aug 18, 2018 08:19 PM IST

FP Staff

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RBI और RSS के लोगों ने कहा केरल में बाढ़ का कारण सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश की मांग है!

केरल में बाढ़ का कारण क्या है?

अगर ट्विटर के लोगों की मानें तो ऐसा इसलिए है क्योंकि महिलाएं सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करना चाहती थीं. और जाहिर तौर पर इससे भगवान अयप्पा नाराज हो गए जिसके कारण उन्होंने भारी विनाश किया है.

इस महीने की शुरुआत में, सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सबरीमाला मंदिर में मासिक धर्म के उम्र वाली महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रखा था. ट्विटर पर कई लोगों ने कहा है कि केरल को बाढ़ का सामना इसी वजह से करना पड़ रहा है.

पूरा केरल उन लोगों की वजह से जल रहा है जिन्होंने सबरीमाला मंदिर के अनुशासन में हस्तक्षेप किया. भगवान अयप्पा गुस्से में हैं और बाहरी लोगों को दखल देने के कारण केरल को दंडित कर रहे हैं. इस बात पर ध्यान दें कि सारी बारिश केरल में हो रही है तमिलनाडु या कर्नाटक में नहीं!

राजी राजन नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा है- 10 से 50 साल के बीच की उम्र वाली औरतें मंदिर में नहीं गई हैं. साबरीमाला के इतिहास में कभी भी, कुछ भी बुरा नहीं घटा. हमें अविश्वास का अधिकार है. लेकिन सदियों से चली आ रही अपनी प्रथा से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए.

और इन सारे ट्वीट्स में, एस गुरुमुर्ति का भी एक ट्वीट है. 7 अगस्त 2018 को केंद्र ने गुरुमु्र्ति को पार्ट टाइम गैर-आधिकारिक निदेशक के रूप में भारतीय रिजर्व बैंक के बोर्ड में नियुक्त किया था. गुरुमुर्ति ने लिखा- सुप्रीम कोर्ट के जजों यह देखना चाहिए कि इस मामले और सबरीमाला में जो भी हो रहा है उसके बीच में क्या कोई संबंध है. अगर इन दोनों के बीच संबंध होने का चांस लाख में एक हो तो भी लोग अयप्पन के खिलाफ किसी भी तरह के फैसले को स्वीकार नहीं करेंगे.

और जैसा कि तय था गुरुमुर्ति के इस ट्वीट को लोगों की आलोचना का सामना करना पड़ा. मनिकंदन नाम के एक ट्विटर यूजर ने लिखा- इसे किसी भी धार्मिक मुद्दे से लिंक न करें. ये कोई अच्छी बात नहीं है. आपसे यह उम्मीद नहीं थी. इस समय जरुरत बाढ़ में फंसे लोगों की मदद करने का है. अगर आप किसी भी तरह से मदद कर सकते हैं, तो कृपया करें.

वहीं सुधीर श्रीनाथ ने लिखा- सर, क्या इस समय आपको ऐसी बात करते हुए शर्म नहीं आई? लोग मर रहे हैं, बेघर हो गए हैं और आप भारतराज के फिल्म के गांववाले की तरह बात कर रहे हैं.

गुरुमूर्ति ने लोगों को शांत करने का प्रयास करते हुए ट्वीट किया, 'मैंने यह कहा- यदि इस मामले और बारिश में हल्‍का सा भी कनेक्‍शन हो सकता है तो लोग- फिर से कहता हूं लोग- नहीं चाहेंगे कि फैसला अयप्‍पन के खिलाफ जाए. यदि लोगों की मान्‍यता के बारे में है. आपकी जानकारी के लिए बता दूं कि मैं अयप्‍पा का भक्‍त नहीं हूं और सबरीमाला भी नहीं जाता.'

उन्‍होंने आगे लिखा, 'भारतीय बुद्धिजीवियों के दोगलेपन को देखकर हैरान हूं जो लोगों की आस्‍था को खारिज कर देते हैं. 99 फीसदी भारतीय भगवान में विश्‍वास करते हैं. उदारवादी, धर्मनिरपेक्ष, बुद्धिजीवी को मिलाकर 100 फीसदी लोग ज्‍योतिष को मानते हैं. नास्तिक करुणानिधि के समर्थकों ने भी उनके लिए प्रार्थना की थी. मैं उन लोगों में से हूं जो ज्‍योतिष के बजाय भगवान को मानते हैं.'

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