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गणतंत्र दिवस से पहले करणी सेना की गुंडागर्दी, क्या कह रहे हैं पीएम के ट्वीट

जिम्मेदार पदों पर चुने गए तमाम नेता कई सारे ट्वीट कर रहे हैं मगर करणी सेना की गुंडागर्दी पर क्या कह रहे हैं

FP Staff Updated On: Jan 25, 2018 02:16 PM IST

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गणतंत्र दिवस से पहले करणी सेना की गुंडागर्दी, क्या कह रहे हैं पीएम के ट्वीट

पद्मावत की रिलीज़ के बाद करणी सेना की गुंडागर्दी बढ़ती जा रही है. बुधवार को हरियाणा के गुरुग्राम में एक स्कूल बस पर पथराव किया गया. कई स्कूलों में इस डर से गुरुवार को छुट्टी कर दी गई है.

सवाल उठ रहा है कि सुप्रीमकोर्ट के दखल के बावजूद इस हिंसा से निपटने के सख्त उपाय क्यों नहीं अपनाए जा रहे. शुक्रवार को गणतंत्र दिवस है. ऐसे में देश की राजधानी में कहीं अराजकतत्वों का एक समूह तोड़-फोड़, आगजनी कर रहा है. सोशल मीडिया पर जहां लोग स्कूली बच्चों पर पथराव की निंदा कर रहे हैं, देखते हैं कि देश के सबसे जिम्मेदार पदों के लिए चुने गए नेता क्या कह रहे हैं.

नरेंद्र मोदी सोशल मीडिया के रिएक्शन पर अक्सर बात करते हैं. आज उन्होंने एक से ट्वीट किए हैं. मगर इनमें पद्मावत या हिंसा की कोई बात नहीं है.

राहुल गांधी ने बच्चों पर पथराव की आलोचना की है मगर वो भी सीधे-सीधे कुछ कहने से बचे हैं.

अपने बयानों से चर्चा में रहने वाले दिग्विजय सिंह ने बचते-बचाते पद्मावत का विरोध कर रहे लोगों को सही ठहराया है.

गुरुग्राम की घटना पर लोग नाराज़ हैं मगर हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर ने नेशनल वोटर्स डे की बात कही है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इस मामले की निंदा करते हुए ट्वीट किया है.

दिल्ली एनसीआर का नोएडा और गाज़ियाबाद का हिस्सा उत्तर प्रदेश में आता है. इसके अलावा कल लखनऊ में भी करणी सेना ने हंगामा काटा था. योगी आदित्यनाथ ने आज कई ट्वीट किए हैं मगर इसमें करणी सेना या हिंसा का जिक्र नहीं है.

अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए जनता की सुरक्षा को सरकार की जिम्मेदारी बताया है.

पद्मावत विवाद की पूरी जड़ राजस्थान में है. महारानी वसुंधरा को इससे शायद इतना फर्क नहीं पड़ता है.

वहीं जंगलराज की आलोचना करने वाले सुशासन बाबू नीतीश कुमार भी मानव श्रंखला के बारे में बताने में व्यस्त हैं.

योगेंद्र यादव ने कई ट्वीट किए हैं जिनमें करणी सेना और सरकारों की आलोचना की है. योगेंद्र ने कहा है कि वो फिल्म से प्रभावित नहीं है मगर निर्देशक की अभिव्यक्ति की आजादी सुरक्षित रहे.

हमारे देश में बसें आम आदमी के सफर करने का जरिया है. वीवीआईपी परिवारों के बच्चे या अतिविशिष्ट लोग बस में सफर नहीं करते हैं. ये बात हमारे राजनेता भी जानते हैं और करणी सेना वाले भी.

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