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स्मार्टफोन पर थर्ड पार्टी एप से सचेत रहकर करें जानकारी शेयर

विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन पर ‘थर्ड पार्टी एप’ से कुछ भी शेयर करने में सावधान रहने की जरूरत है. क्योंकि ऐसे एप से यूजर्स की संवेदनशील जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच सकती है

Bhasha Updated On: Mar 25, 2018 05:51 PM IST

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स्मार्टफोन पर थर्ड पार्टी एप से सचेत रहकर करें जानकारी शेयर

फेसबुक यूजर्स की जानकारी चुराए जाने के विवादों के बीच विशेषज्ञों ने स्मार्टफोन में तीसरे पक्ष यानी बाहरी एप से जुड़े जोखिमों के प्रति भी लोगों को आगाह किया है.

विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्टफोन पर इस तरह के ‘थर्ड पार्टी एप’ को पहुंच के स्तर के बारे में सावधान रहने की जरूरत है. क्योंकि ऐसे एप से यूजर्स की संवेदनशील जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच सकती है.

यूजर्स के डेटा चोरी का यह विवाद काफी चर्चा में है. वर्ष 2016 में अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप के लिए काम कर रही फर्म कैंब्रिज एनालिटिका ने 5 करोड़ फेसबुक यूजर्स से जुड़ी जानकारी उनकी सहमति के बिना हासिल की.

नेटवर्क इंटेलीजेंस के प्रमुख वैश्विक व्यापार अल्ताफ हाल्दे ने पीटीआई-भाषा से कहा, यूजर्स को केवल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जानकारी की सुरक्षा को लेकर ही चिंतित नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें अपने स्मार्टफोन पर थर्ड पार्टी एप को दी जाने वाली पहुंच के प्रति भी सावधान रहना चाहिए.

'किसी गेम एप को मेरी एड्रेस बुक का क्या करना है'

इसका उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि अनेक गेम अपने यूजर्स से उनकी फ्रेंड लिस्ट तक पहुंच या पाठ्य संदेश मैसेज पढ़ने की अनुमति मांगते हैं. उन्होंने कहा, ‘किसी गेम एप को मेरी एड्रेस बुक का क्या करना है. आम तौर पर लोग इस पर ध्यान नहीं देते लेकिन इसके काफी प्रतिकूल प्रभाव हो सकते हैं.’

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कैस्परस्की लैब में महाप्रबंधक श्रेणिक भयानी ने कहा, साइबर सुरक्षा के लिहाज से फेसबुक की यह घटना हम सभी के लिए एक सबक है. जब तक हम दुष्प्रभावों को नहीं देखते हम किसी खतरे को भांप नहीं पाते. अगर फेसबुक जैसी बड़ी कंपनी से डेटा चुराया जा सकता है तो हम कैसे सुनिश्चित करेंगे कि हमारे व्यक्तिगत डेटा का दुरूपयोग साइबर अपराधी नहीं कर रहे हैं.

विशेषज्ञों का कहना है कि फेसबुक जैसी घटनाएं न तो पहली हैं और न ही यह आखिरी होगी.

एक विशेषज्ञ ने कहा, ‘यह पहली बार नहीं हुआ है कि यूजर्स का डेटा चुराया गया है और निश्चित रूप से यह आखिरी बार भी नहीं हो रहा है. अच्छी बात यह है कि सरकार और निजी कंपनियां अपने पास मौजूदा नागरिकों के डेटा की रक्षा को महत्व दे रही हैं.’

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